Kainchi Dham: विश्व प्रसिद्ध नीम करोली बाबा के आश्रम कैंची धाम में अब श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को नियंत्रित करने और सुगम यात्रा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन बड़ा कदम उठाने जा रहा है। पर्यटन विभाग ने जिला प्रशासन के साथ मिलकर क्षेत्र की धारण क्षमता (कैरिंग कैपेसिटी) पर एक विस्तृत अध्ययन पूरा कर रिपोर्ट तैयार कर ली है। इसके आधार पर अब मंदिर में रोजाना आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या तय कर दर्शन प्रक्रिया को रेगुलेट किया जाएगा।
प्रदेश के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर लगातार बढ़ रहे पर्यटकों के दबाव को देखते हुए यह पहल की जा रही है। कैंची धाम में क्षमता से अधिक संख्या में पहुंच रहे श्रद्धालुओं के कारण भवाली-अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग पर घंटों लंबा जाम लगना आम बात हो गई है। अत्यधिक दबाव से न सिर्फ दर्शनार्थियों को असुविधा हो रही है, बल्कि स्थानीय निवासियों की दैनिक आवाजाही और पर्यावरण पर भी सीधा असर पड़ रहा है।
पर्यटन विभाग और स्थानीय प्रशासन की संयुक्त रिपोर्ट में कैंची धाम क्षेत्र के उपलब्ध बुनियादी ढांचे, सड़क की चौड़ाई, पार्किंग क्षमता और भीड़ प्रबंधन के वास्तविक आंकड़ों का वैज्ञानिक आकलन किया गया है। रिपोर्ट के मुख्य बिंदु और आगामी कदम:
- दैनिक सीमा का निर्धारण: अध्ययन के आधार पर क्षेत्र की वहन क्षमता तय होगी, जिससे एक निश्चित संख्या में ही श्रद्धालुओं को प्रवेश मिलेगा।
- यात्रा रेगुलेशन सिस्टम: भीड़ को चरणबद्ध तरीके से प्रबंधित करने के लिए टोकन या स्लॉट-आधारित दर्शन व्यवस्था लागू करने पर विचार किया जा रहा है।
- यातायात व जाम से राहत: वाहनों के अत्यधिक दबाव को कम कर स्थानीय नागरिकों और लंबी दूरी के यात्रियों को रोजमर्रा के जाम से राहत दिलाई जाएगी।
उत्तराखंड के अन्य संवेदनशील और लोकप्रिय गंतव्यों के लिए भी इस मॉडल को मानक के तौर पर देखा जा रहा है, ताकि देवभूमि की दिव्यता और स्थानीय संतुलन दोनों सुरक्षित रह सकें।




