लाल रंग की साड़ी मां भजन लिरिक्स (lal rang ki sadi mein bhajan lyrics ) – उत्तराखंड की लोकगायिका खुशी जोशी के भजन पहाड़ की लोकसंस्कृति और धार्मिक आस्था से जुड़े हुए हैं। नवरात्रि और माता रानी की भक्ति के अवसर पर पहाड़ी माता के भजन सुनना भक्तों को विशेष आनंद देता है। “लाल रंग की साड़ी मां, अष्टभुजा धारी मां” भी मां दुर्गा की स्तुति में गाया जाने वाला एक भक्तिमय भजन है।
इस लेख में पढ़िए खुशी जोशी के इस पहाड़ी माता भजन के लिरिक्स। अगर आप पहाड़ी भजन लिरिक्स, कुमाऊनी भजन लिरिक्स, कुमाऊनी माता के भजन या पहाड़ी माता के भजन के बोल खोज रहे हैं, तो यहां आपको फोटो में उपलब्ध गीत के पूरे बोल मिलेंगे।
Table of Contents
लाल रंग की साड़ी मां भजन के लिरिक्स –
लाल रंग की साड़ी मां,
अष्टभुजा धारी मां,
दुर्गा भवानी!
दानव सब मारी मां,
भक्त जन तारी मां,
अंबिका रानी!
जब आली शेर सवारी,
मेरी अंबे मां भली लागली।
जब आली शेर सवारी,
मेरी अंबे मां भली लागली!
अंतरा 1
शिवजयू की अर्धांगिनी,
गणपति की ईजा।
हिम की पुत्री मैया,
तेरि करनू पूजा।
कोरस-
के छु तेरो नाम मैया?
का छु तेरो धाम?
कैलाश में धाम छौ,
गौरा मैया नाम छौ,
अंबिका रानी।
शक्ति कि पहचान छौ,
भौल् करन नाम छौ,
दुर्गा भवानी।
चण्ड मुण्ड दानव मारी,
मेरि दूर्गा मा भलि लागलि।
कोरस-
जब आलि शेर सवारी,
मेरी अम्बे मां भली लागली।
अंतरा 2-
बल और बुद्धि मैया,
तेरी ही कृपा छौ।
वाणी मिठास मैया,
तेरी ही दया छो।
कोरस-
के छु तेरो नाम मैया?
का छु तेरो धाम?
स्वर्ग में तेरो धाम छौ,
सरस्वती नाम छौ,
दुर्गा भवानी।
ज्ञान को भंडार छौ,
महिमा अपार छौ,
अम्बिका रानी।
जब आलि हँस सवारी,
मेरी अम्बे मां भली लागली।
कोरस-
जब आलि शेर सवारी,
मेरी अम्बे मां भली लागली।
अंतरा 3
धन वैभव को भंडार भरी देली।
तू मेरी मयाली ईजा,
मै तेरी चेली।
कोरस
के छु तेरो नाम मैया?
का छु तेरो धाम?
बैकुंठ में धाम छौ,
लक्ष्मी मैया नाम छौ,
अंबिका रानी।
कंचन सी काया छौ,
योग महामाया छौ,
दुर्गा भवानी।
जब आलि गरुड़ सवारी,
मेरी अम्बे मां भली लागली।
कोरस-
जब आलि शेर सवारी,
मेरी अम्बे मां भली लागली।
मुखड़ा (दोहराव)
लाल रंग की साड़ी मां,
अष्टभुजा धारी मां,
दुर्गा भवानी!
दानव सब मारी मां,
भक्त जन तारी मां,
अंबिका रानी!
जब आली शेर सवारी,
मेरी अंबे मां भली लागली।
जब आली शेर सवारी,
मेरी अंबे मां भली लागली!
खुशी जोशी का पहाड़ी माता भजन –
खुशी जोशी उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र की लोकगायिका हैं। उनके गायन में पहाड़ी लोकसंगीत और स्थानीय परंपराओं की झलक देखने को मिलती है। उनके भजनों में मां दुर्गा, मां भवानी और अन्य देवी स्वरूपों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की जाती है।
“लाल रंग की साड़ी मां” भजन में मां दुर्गा के लाल वस्त्र, अष्टभुजा स्वरूप और शेर की सवारी का वर्णन है। गीत में भक्त मां को दानवों का संहार करने वाली और अपने भक्तों का उद्धार करने वाली देवी के रूप में याद करते हैं।
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पहाड़ी माता के भजन और कुमाऊनी भजन लिरिक्स –
उत्तराखंड में माता के भजनों की अपनी अलग पहचान है। कुमाऊं और गढ़वाल के अलग-अलग क्षेत्रों में देवी-देवताओं की स्तुति लोकगीतों, जागरों और भजनों के माध्यम से की जाती है। नवरात्रि, देवी पूजा और धार्मिक आयोजनों में ऐसे भजन भक्तिभाव का वातावरण बनाते हैं।
अगर आप पहाड़ी माता के भजन लिरिक्स, कुमाऊनी माता के भजन, उत्तराखंड के देवी भजन या खुशी जोशी के भजन खोज रहे हैं, तो देवभूमि दर्शन पर प्रकाशित लोकगीतों और भजनों से जुड़े लेख भी पढ़ सकते हैं।
दुर्गे मैया वे भजन लिरिक्स : नवरात्रि का पवित्र उत्तराखंडी भजन | खुशी जोशी भजन लिरिक्स
इस कुमाऊनी भजन का वीडियो यहाँ देखें –
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