जागेश्वर धाम: लाखों श्रद्धालुओं की अगाध आस्था के केंद्र और ऐतिहासिक महत्व वाले जागेश्वर धाम में अब अमर्यादित और छोटे कपड़े पहनकर आने वाले पर्यटकों पर सख्ती की जाएगी। मंदिर की पवित्रता और सदियों पुरानी गरिमा को बनाए रखने के लिए, धाम परिसर में शालीनता से कपड़े न पहनने वालों पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी तेज कर दी गई है।
क्या है पूरा मामला?
जागेश्वर मंदिर समिति के पूर्व प्रबंधक प्रकाश भट्ट और चित्रगुप्त पीठ जागेश्वर के महामंडलेश्वर लाल बाबा ने इस दिशा में अहम पहल की है। उन्होंने धाम को ‘पिकनिक स्पॉट’ की तरह इस्तेमाल किए जाने और पर्यटकों द्वारा अमर्यादित वस्त्र पहनकर आने पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए प्रशासन को पत्र लिखा था। उनका कहना है कि इस तरह के पहनावे से मंदिर की पवित्रता और स्थानीय संस्कृति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
इस गंभीर विषय पर संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन ने मंदिर समिति के कार्यवाहक प्रबंधक को एक पत्र जारी किया है। इस निर्देश के तहत प्रशासन ने धाम परिसर में शालीनता बनाए रखने के लिए उचित कार्रवाई करने और उसकी रिपोर्ट सौंपने को कहा है।
स्थानीय व्यापारियों और पुजारियों का मिला समर्थन
प्रशासन के इस कदम का स्थानीय व्यापारियों और पुरोहित समाज ने पुरजोर समर्थन किया है। व्यापार मंडल अध्यक्ष मुकेश भट्ट ने बताया कि वे पर्यटकों के आने के बिल्कुल विरोधी नहीं हैं, लेकिन धाम की मर्यादा सर्वोपरि है। इसके साथ ही, स्थानीय व्यापारियों ने भी यह भरोसा दिलाया है कि वे अपनी दुकानों के माध्यम से आने वाले श्रद्धालुओं को मर्यादित वस्त्र पहनने के लिए जागरूक करेंगे।
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विकास और व्यवस्था सुधार के लिए भी रखी गईं 5 प्रमुख मांगें
अमर्यादित कपड़ों पर रोक के अलावा, पूर्व प्रबंधक प्रकाश भट्ट ने जिलाधिकारी (डीएम) को एक अन्य पत्र सौंपकर धाम के विकास और व्यवस्था सुधार के लिए पांच प्रमुख मांगें उठाई हैं:
- मंदिर के गर्भगृह में 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सोलर ग्रिड जोड़ना।
- आगामी सावन मेले की तैयारियों को लेकर तुरंत बैठक बुलाना।
- ब्रह्मकुंड में बारिश के कारण जमा हुई मिट्टी की सफाई करवाना।
- श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बायो-टॉयलेट का निर्माण करना।
- विनायक पुल से ब्रह्मकुंड तक जगह-जगह डस्टबिन लगाना।
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हर साल पहुंचते हैं लाखों भक्त
गौरतलब है कि पौराणिक महत्व वाले इस ज्योतिर्लिंग क्षेत्र (जागेश्वर धाम) में हर साल देश-विदेश से करीब 7 से 8 लाख श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। कुछ पर्यटकों के अमर्यादित आचरण के कारण दूर-दराज से आने वाले पारंपरिक श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंच रही थी। प्रशासन और स्थानीय लोगों के इस संयुक्त प्रयास से उम्मीद जताई जा रही है कि भविष्य में धाम की मर्यादा और पवित्रता बनी रहेगी।


