पहाड़ी अम्मा पहाड़ी अम्मा के किरदार में वायरल हो रहा अल्मोड़ा का ये लड़का :कहते हैं कि असली प्रतिभा को पहचान दिलाने के लिए किसी सिफारिश की जरूरत नहीं पड़ती। अगर हुनर में दम हो तो लोग खुद उसे सिर आंखों पर बिठा लेते हैं। इन दिनों उत्तराखंड में वायरल हो रहा अल्मोड़ा का एक युवा कलाकार इसकी बेहतरीन मिसाल है।
सोशल मीडिया पर “पहाड़ी अम्मा” के किरदार से लोगों को हंसाने वाला यह लड़का है अल्मोड़ा जिले के केस्ता (दौलाघट) का रहने वाला 21 वर्षीय आशु बिष्ट। खास बात यह है कि उसकी इस रचनात्मक यात्रा में सबसे बड़ी साथी उसकी मां मुन्नी देवी हैं, जिन्हें लोग प्यार से “पनुवा की ईजा” के नाम से जानते हैं।
आज जब तनाव और भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों के चेहरे से मुस्कान गायब होती जा रही है, ऐसे समय में आशु अपने वीडियो के जरिए लोगों को हंसाने का काम कर रहा है। लेकिन उसकी लोकप्रियता की वजह सिर्फ कॉमेडी नहीं, बल्कि अपनी मातृभाषा कुमाऊनी और पहाड़ की संस्कृति को जीवंत तरीके से प्रस्तुत करना भी है।
आशु हरी साड़ी पहनकर, गोल चश्मा लगाकर और सिर पर परांदा बांधकर एक बुजुर्ग पहाड़ी अम्मा का किरदार निभाता है। उसकी आवाज, हाव-भाव और संवाद अदायगी इतनी स्वाभाविक होती है कि कई बार दर्शकों को लगता है जैसे गांव की कोई असली दादी उनके सामने बैठी बातें कर रही हो।
चाहे सास-बहू की नोकझोंक हो, गांव की चुगली हो या किसी बात पर अम्मा का गुस्सा, आशु हर किरदार को बेहद जीवंत तरीके से निभाता है। उसके वीडियो की सबसे बड़ी खासियत यह है कि उनमें कुमाऊनी बोली के वे पुराने शब्द और मुहावरे सुनने को मिलते हैं, जो अब धीरे-धीरे आम बोलचाल से गायब होते जा रहे हैं।
वर्तमान में ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहे आशु बताते हैं कि उनकी मां वीडियो की स्क्रिप्ट तैयार करने में उनकी मदद करती हैं। एक छोटी-सी वीडियो के पीछे भी घंटों की मेहनत छिपी होती है। स्क्रिप्ट लेखन, शूटिंग और एडिटिंग तक हर काम को वह बेहद गंभीरता से करते हैं। यही वजह है कि उनके वीडियो लोगों को इतने वास्तविक और अपनेपन से भरे हुए लगते हैं।
आशु के साथ-साथ उनकी मां मुन्नी देवी का योगदान भी कम महत्वपूर्ण नहीं है। उन्होंने यह साबित किया है कि गांव-पहाड़ की महिलाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। जरूरत सिर्फ उसे सामने लाने और खुद पर भरोसा करने की होती है।
आज सोशल मीडिया पर जहां कई लोग सिर्फ वायरल होने के लिए किसी भी तरह का कंटेंट बनाने में लगे हैं, वहीं आशु और उनकी मां की जोड़ी यह संदेश देती है कि अपनी संस्कृति, भाषा और मौलिकता के दम पर भी बड़ी पहचान बनाई जा सकती है।
अगर आपने अभी तक “Bisht Ji Almora Wale” के वीडियो नहीं देखे हैं, तो एक बार जरूर देखिए। शायद आपको अपने गांव की वही पुरानी अम्मा फिर से याद आ जाए, जो अपनी बातों और अंदाज से पूरे माहौल को खुशनुमा बना देती थीं।
देखिए : स्यूरा प्यूरा : कुमाऊँ के लोकगीतों में जीवित वीर गाथा और प्राचीन इतिहास की झलक
लेखक : राजेन्द्र सिंह नेगी ( गांव वाला चैनल )
पहाड़ी अम्मा का इंटरव्यू का वीडियो देखें यहां


