Tuesday, March 5, 2024
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कुमाउनी फिल्म माटी पछ्याण का रिव्यू 

बीते 23 सितम्बर 2022 को एक कुमाउनी फिल्म माटी पछ्याण ,उत्तराखंड के लगभग सभी सिनेमाघरों में रिलीज की गई। पहाड़ की जन समस्याओं पर बनी इस फिल्म के निर्माता फराज शेर हैं।  और इस फिल्म के निर्देशक अजय बेरी जी हैं। उत्तराखंड के दर्शकों को यह फिल्म कितना पसंद आती है इसका पता आने वाले दिनों में लगेगा।  युवा लेखक और सामाजिक कार्यों में समर्पित  शंकर भंडारी जी लेखनी के माध्यम से जानिए यह फिल्म कैसी है ? और आपको देखनी चाहिए या नहीं ?

कुमाउनी फिल्म माटी पछ्याण का रिव्यू -:

फिल्म “माटी पहचान” (माटी पछ्याण) कुमाऊ की पहली ऐसी फिल्म जो थियेटरों में रिलीज हो रही, मैं नहीं जानता कि इसके डायरेक्टर – प्रोड्यूसर लोगों ने हम उत्तराखंडी लोगों के लिए इतना बड़ा रिस्क क्यों लिया? करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद एक ऐसे दर्शक वर्ग के लिए फिल्म बनाना जिनकी पहुंच थिएटर तक बहुत कम है, इसके लिए वाकई में बहुत बड़ा जिगर चाहिए और इतिहास बनाने के लिए सबसे जरूरी यही है कि लाभ-हानि से उपर उठकर अपने काम को पूरी ई ईमानदारी  से करना, ये फिल्म वाकई में इतिहास बनाएगी।

फिल्म कितने पैसे कमाएगी ये मैं नहीं कह सकता पर जो भी देखेगा वो पूरी टीम को दुआएं जरूर देगा। इस फिल्म की  कहानी (Script) , डायरेक्शन , अभिनय (Acting) , संवाद अदायगी (Dialogue Delivery) सबकुछ बहुत ही शानदार है।

यह कहानी पहाड़ के एक ऐसे परिवार से शुरू होती है जिसका बाप शराबी है जो पैसों के लिए जमीन बेचना चाहता है , मां है जो दिन रात मेहनत करती है और अपने जीते जी जमीन बिकने नहीं देगी, एक बेटी जोकि पढ़ाई में अव्वल है और एक भाई जो घर की स्थिति सुधारने और बहन को पढाने के लिए मोटर मैकेनिक के वहां नौकरी करता है। 

कुमाउनी फिल्म माटी पछ्याण
कुमाउनी फिल्म माटी पछ्याण
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गांव की खूबसूरती, हसी मजाक और रिति रिवाजों के साथ कहानी काॅलेज तक पहुंचती है। फिर पलायन जैसी गंभीर समस्या पर बात होती है, थोड़ी प्यार-मोहब्बत के साथ ग्रामीण जीवन की उथल-पुथल, बाहरी लोगों द्वारा जमीनों की खरीद-फरोख्त इत्यादि देखने को मिलता है। सबसे बेहतरीन क्लाइमेक्स है जिसमें जबरदस्ती का कोई सीन नहीं दिखाया गया है, हर चीज को पहाड़ की हकीकत के हिसाब से दिखाने में यह फिल्म सफल रही है, फिल्म में कुछ भी बनावटी नहीं दिखाया गया है।।

समस्याएं, समाधान, हंसी- मजाक, प्यार-दुलार , इमोशंस और बेहतरीन सीख देने वाली है ये फिल्म। मैं स्टार देने वाला होता तो 10 में से 10 स्टार देता क्योंकि ये फिल्म आजकल की बाॅलीवुड की फिल्मों से बेहतरीन है। फिल्म की टीम ने अपना काम बेहतरीन ढंग से कर दिया है अब जिम्मेदारी है हम सभी कि, आपसे निवेदन करूंगा कि थिएटर में फिल्म देखने जरूर जाएं।

धन्यवाद।।

साभार शंकर भंडारी

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Bikram Singh Bhandari
Bikram Singh Bhandarihttps://devbhoomidarshan.in/
बिक्रम सिंह भंडारी देवभूमि दर्शन के संस्थापक और लेखक हैं। बिक्रम सिंह भंडारी उत्तराखंड के निवासी है । इनको उत्तराखंड की कला संस्कृति, भाषा,पर्यटन स्थल ,मंदिरों और लोककथाओं एवं स्वरोजगार के बारे में लिखना पसंद है।
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