Thursday, May 30, 2024
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झंगोरा के फायदे और उसमे पाए जाने वाले पोषक तत्व

एक समय था जब झंगोरा पहाड़ी लोगों का दिन का अनिवार्य भोजन हुवा करता था। धीरे -धीरे परिस्थितियां बदली लोग पहाड़ छोड़ कर मैदानों में बस गए। लोगो की आय और जीवन स्तर बदल गया। जानकारी के अभाव में झुंगर जैसे सर्वगुण संपन्न अनाज को लोगों ने तुच्छ समझ कर त्याग दिया। आज जब लोगों को इस अनाज के गुणों का पता चल रहा तो आज दुगनी कीमत में भी झुंगरू खरीदने को तैयार हैं।

झंगोरा का परिचय  –

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यह उत्तराखंड का एक पारम्परिक मोटा अनाज है। इसे अंग्रेजी में Indian Barnyard Millet कहते हैं। संस्कृत में इसे श्यामाक,श्यामक, श्याम, त्रिबीज,अविप्रिय, सुकुमार,राजधान्य,तृणबीजोत्तम कहते हैं। इसके अलवा हिंदी में झंगोरा को शमूला,सांवा,सावाँ मोरधन,समा,वरई,कोदरी,समवत और सामक चाव आदि नामों से जाना जाता है। उत्तराखंड की कुमाउनी और गढ़वाली भाषा में ऐसे झंगोरा, झुंगरू आदि नामों से जाना जाता है। झंगोरा का वैज्ञानिक नाम इक्निकलोवा फ्रूमेन्टेसी है।

दुनिया के गर्म और समशीतोष्ण क्षेत्रों में उगाई जाने वाली एक प्राचीन बाजरा फसल है। एशिया, विशेष रूप से भारत, चीन, जापान और कोरिया में व्यापक रूप से खेती की जाती है।  यह चौथा सबसे अधिक उत्पादित लघु बाजरा है, जो दुनिया भर में कई गरीब लोगों को खाद्य सुरक्षा प्रदान करता है। विश्व स्तर पर, भारत पिछले 3 वर्षों  के दौरान 1034 किलोग्राम/हेक्टेयर की औसत उत्पादकता के साथ क्षेत्रफल (0.146 मिलियन हेक्टेयर-1) और उत्पादन (0.147 मिलियन टन) दोनों के मामले में बार्नयार्ड बाजरा का सबसे बड़ा उत्पादक है। बार्नयार्ड बाजरा की खेती मुख्य रूप से मानव उपभोग के लिए की जाती है, हालांकि इसका उपयोग पशुओं के चारे के रूप में भी किया जाता है। उत्तराखंड सहित हिमालयी पहाड़ी क्षेत्रों में लगभग 2200 मी की ऊँचाई तक इसकी खेती की जाती है।

झंगोरा

झंगोरा में पाए जाने वाले पोषक तत्व –

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झंगोरा उर्फ़ बार्नयार्ड बाजरा  एक छोटी अवधि की फसल है जो लगभग बिना किसी इनपुट के प्रतिकूल पर्यावरणीय परिस्थितियों में विकसित हो सकती है। और विभिन्न जैविक और अजैविक तनावों का सामना कर सकती है। इन कृषि संबंधी लाभों के अलावा, चावल, गेहूं और मक्का जैसे प्रमुख अनाजों की तुलना में अनाज को उनके उच्च पोषण मूल्य और कम खर्च के लिए महत्व दिया जाता है। इसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर और, विशेष रूप से, आयरन (Fe) और जिंक (Zn) जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों का एक समृद्ध स्रोत होता है। जो कई स्वास्थ्य लाभों से संबंधित हैं।

Jhangora nutritional value –

पोषक तत्व   झंगोरा प्रति 100 gm
कैलोरी  342 
कार्बोहाइड्रेट्स  64 ग्राम 
डाइटरी फाइबर  12.6 ग्राम 
प्रोटीन  11.2 ग्राम 
आयरन  16 से 18 ग्राम 
कैल्शियम  22 मिलीग्राम 
वसा  3. 6 ग्राम 
विटामिन B1 0.33 मिलीग्राम 
विटामिन B2 0.10 मिलीग्राम 
विटामिन B3 4.2 मिलीग्राम 
ग्लाइसेमिक इंडेक्स  50
झंगोरा in english
झंगोरा खाने के फायदे। झगोरा को हिंदी में क्या कहते हैं ?

झंगोरा के फायदे –

खून की कमी दूर करता है –

इसमें आयरन  की अच्छी मात्रा होने के कारण शरीर में होने वाली खून की कमी को दूर करता है। माहवारी में अधिक निकलने की समस्या से जूझ रही महिलाओं, एनीमिया से पीड़ित मरीजों के लिए यह वरदान साबित हो सकता है।

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पाचन में लाभदायक –

झंगोरा में डाइट्री फाइबर अधिक होने के कारण पेट की कई समस्याएं कब्जइ,एसिडिटी आदि में लाभदायक होता है। पेट में पाचन में सुधार करता है।

झंगोरा वजन घटाने में लाभदायक है –

इसमें फाइबर और प्रोटीन की अधिकता के कारण जल्दी भूख नहीं लगती है। शरीर में ऊर्जा बनी रहती है। कैलोरी की मात्रा इसमें कम होती है। इस कारण इसे वजन घटाने वाला अनाज माना जाता है।

मधुमेह में लाभदायक –

इसमें चावल की अपेक्षा कार्बोहाइड्रेड काफी कम होता है। और इसमें मौजूद हाई डाइयट्री फाइबर शरीर में ग्लूकोज की मात्रा को नियंत्रित करते हैं। इस कारण यह मधुमेह रोगियों के लिए लाभदायक होता है।

इसके अलावा झंगोरा अपने विशिष्ट गुणों के कारण यह ह्रदय मरीजों के लिए एक लाभदायक आहार है।

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Bikram Singh Bhandari
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बिक्रम सिंह भंडारी देवभूमि दर्शन के संस्थापक और लेखक हैं। बिक्रम सिंह भंडारी उत्तराखंड के निवासी है । इनको उत्तराखंड की कला संस्कृति, भाषा,पर्यटन स्थल ,मंदिरों और लोककथाओं एवं स्वरोजगार के बारे में लिखना पसंद है।
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