Wednesday, April 2, 2025
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गणतंत्र दिवस परेड 2025: इस बार उत्तराखंड की झांकी होगी खास! दिखेंगे साहसिक खेल

गणतंत्र दिवस परेड 2025 के लिए नई दिल्ली में कर्तव्य पथ पर प्रदर्शित की जाने वाली उत्तराखंड की झांकी का चयन अब तय हो चुका है। इस बार उत्तराखंड की झांकी में राज्य के साहसिक खेलों (एडवेंचर स्पोर्ट्स) को प्रदर्शित किया जाएगा, जिसे भारत सरकार ने अंतिम रूप से स्वीकार कर लिया है। यह चयन राज्य के लिए गर्व का विषय है, खासकर जब हम यह याद करते हैं कि 2023 में उत्तराखंड की “मानसखण्ड” झांकी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया था।

मुख्यमंत्री का बयान :

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने इस चयन पर खुशी जताते हुए कहा कि यह हमारे राज्य के लिए गर्व का विषय है कि गणतंत्र दिवस परेड 2025 में उत्तराखंड की झांकी को जगह मिली है। मुख्यमंत्री ने कहा, “इस बार की झांकी में हम राज्य की पहचान, प्राकृतिक सौंदर्य और साहसिक खेलों के क्षेत्र में उत्तराखंड की महत्वपूर्ण भूमिका को प्रदर्शित करेंगे। हमारा राज्य न केवल आध्यात्मिक और प्राकृतिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यह साहसिक खेलों के क्षेत्र में भी अग्रणी है।”

उन्होंने झांकी के निर्माण में जुड़े सभी कलाकारों और अधिकारियों को बधाई दी और कहा कि यह झांकी उत्तराखंड को पर्यटन और साहसिक खेलों के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

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गणतंत्र दिवस परेड 2025 की झांकी का डिज़ाइन और निर्माण :

महानिदेशक सूचना श्री बंशीधर तिवारी ने बताया कि अक्टूबर 2024 में भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति के सामने 34 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों ने अपनी झांकी के प्रस्ताव भेजे थे। इस दौरान उत्तराखंड के नोडल अधिकारी और संयुक्त निदेशक, सूचना श्री के.एस. चौहान ने उत्तराखंड की झांकी के डिज़ाइन, मॉडल और संगीत का प्रस्तुतीकरण किया था।

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श्री तिवारी ने यह भी बताया कि भारत सरकार ने 21 दिसम्बर, 2024 को एक पत्र के माध्यम से उत्तराखंड राज्य की झांकी के डिज़ाइन, मॉडल और संगीत को उत्कृष्ट पाया और इसके बाद इस झांकी का अंतिम चयन किया गया। इस झांकी में उत्तराखंड के साहसिक खेलों को प्रमुखता दी गई है, जो न केवल राज्य की प्राकृतिक सुंदरता को बल्कि एडवेंचर स्पोर्ट्स के क्षेत्र में उसकी बढ़ती पहचान को भी प्रदर्शित करेगा।

गणतंत्र दिवस परेड 2025

गणतंत्र दिवस परेड 2025 में उत्तराखंड की झांकी में क्या होगा खास?

उत्तराखंड की झांकी में इस बार कई महत्वपूर्ण और साहसिक खेलों को दिखाया जाएगा। झांकी के अग्रभाग में राज्य की पारंपरिक कला “ऐपण” को प्रदर्शित करते हुए उत्तराखंडी परिधान में एक महिला को चित्रित किया जाएगा। इसके बाद, झांकी के मध्य और पिछला भाग विभिन्न साहसिक खेलों पर आधारित होगा, जो राज्य के एडवेंचर स्पोर्ट्स के प्रमोटर के रूप में उसकी वैश्विक पहचान को मजबूत करेगा।

गणतंत्र दिवस परेड 2025 में उत्तराखंड की झांकी में प्रदर्शित होने वाले साहसिक खेलों में शामिल होंगे:

  • रॉक क्लाइम्बिंग
  • पैराग्लाइडिंग
  • बन्जी जम्पिंग
  • हिल साइकलिंग
  • ट्रैकिंग
  • रिवर राफ्टिंग
  • स्कीइंग (औली)
  • जिप-लाइनिंग और रॉक क्लाइम्बिंग (ऋषिकेश)

यह झांकी उत्तराखंड के पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देने के साथ-साथ राज्य को साहसिक खेलों के केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

निष्कर्ष :

गणतंत्र दिवस परेड 2025 में उत्तराखंड की झांकी का चयन राज्य के लिए एक ऐतिहासिक पल है। यह झांकी राज्य की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक धरोहर और साहसिक खेलों के क्षेत्र में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका को प्रदर्शित करेगी। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी की पहल और राज्य के अधिकारियों की मेहनत के परिणामस्वरूप यह झांकी देशभर में उत्तराखंड की नई पहचान को स्थापित करेगी। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि 2025 में कर्तव्य पथ पर उत्तराखंड की झांकी कैसे देशवासियों को अपनी ओर आकर्षित करती है।

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Bikram Singh Bhandari
Bikram Singh Bhandarihttps://devbhoomidarshan.in/
बिक्रम सिंह भंडारी, देवभूमि दर्शन के संस्थापक और प्रमुख लेखक हैं। उत्तराखंड की पावन भूमि से गहराई से जुड़े बिक्रम की लेखनी में इस क्षेत्र की समृद्ध संस्कृति, ऐतिहासिक धरोहर, और प्राकृतिक सौंदर्य की झलक स्पष्ट दिखाई देती है। उनकी रचनाएँ उत्तराखंड के खूबसूरत पर्यटन स्थलों और प्राचीन मंदिरों का सजीव चित्रण करती हैं, जिससे पाठक इस भूमि की आध्यात्मिक और ऐतिहासिक विरासत से परिचित होते हैं। साथ ही, वे उत्तराखंड की अद्भुत लोककथाओं और धार्मिक मान्यताओं को संरक्षित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। बिक्रम का लेखन केवल सांस्कृतिक विरासत तक सीमित नहीं है, बल्कि वे स्वरोजगार और स्थानीय विकास जैसे विषयों को भी प्रमुखता से उठाते हैं। उनके विचार युवाओं को उत्तराखंड की पारंपरिक धरोहर के संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक विकास के नए मार्ग तलाशने के लिए प्रेरित करते हैं। उनकी लेखनी भावनात्मक गहराई और सांस्कृतिक अंतर्दृष्टि से परिपूर्ण है। बिक्रम सिंह भंडारी के शब्द पाठकों को उत्तराखंड की दिव्य सुंदरता और सांस्कृतिक विरासत की अविस्मरणीय यात्रा पर ले जाते हैं, जिससे वे इस देवभूमि से आत्मिक जुड़ाव महसूस करते हैं।
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