दादी-नानी योजना: देवभूमि की मातृशक्ति, जिन्होंने राज्य के निर्माण और विकास में अपनी पूरी जवानी खपा दी, अब उनके बुढ़ापे को संवारने के लिए उत्तराखंड सरकार एक अनूठी पहल करने जा रही है। प्रदेश की 60 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं के लिए ‘दादी-नानी योजना’ का खाका तैयार किया जा रहा है। यह केवल एक वित्तीय सहायता मात्र नहीं, बल्कि बुजुर्ग महिलाओं के लिए एक व्यापक सामाजिक और स्वास्थ्य सुरक्षा नीति होगी।
पेंशन से आगे की सोच: क्या है खास?
वर्तमान में वृद्ध महिलाओं को आर्थिक मदद के रूप में पेंशन तो मिलती है, लेकिन सरकार ने महसूस किया है कि उनकी चुनौतियां सिर्फ पैसों तक सीमित नहीं हैं। महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या के नेतृत्व में विभाग एक ऐसी नीति पर काम कर रहा है जो निम्नलिखित बिंदुओं पर केंद्रित होगी:
- स्वास्थ्य और देखभाल: घर पर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गंभीर बीमारियों के लिए विशेष सहायता।
- डिजिटल साक्षरता: बैंकिंग और तकनीकी कार्यों के लिए आत्मनिर्भर बनाना ताकि वे ठगी का शिकार न हों।
- अकेलेपन से जंग: जो महिलाएं अकेले रह रही हैं, उनके लिए विशेष केयर-टेकर सिस्टम या सामुदायिक नेटवर्क तैयार करना।
- समेकित योजना (Single Umbrella): विभिन्न विभागों की योजनाओं को एक ही छत के नीचे लाकर लाभ पहुंचाना।
पात्रता मानदंड
| मानदंड | विवरण |
| निवास | महिला का उत्तराखंड का स्थायी निवासी होना अनिवार्य है। |
| आयु सीमा | आवेदन के समय महिला की आयु 60 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए। |
| दस्तावेज़ | आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, आयु प्रमाण पत्र और बैंक खाता विवरण। |
| आय सीमा | (अभी स्पष्ट नहीं, लेकिन प्राथमिकता आर्थिक रूप से कमजोर और अकेले रहने वाली महिलाओं को दी जाएगी)। |
| विशेष श्रेणी | विधवा, निराश्रित या स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं से जूझ रही महिलाओं को वरीयता मिल सकती है। |
जमीन पर फीडबैक का दौर शुरू
योजना को केवल कागजों तक सीमित न रखकर प्रभावी बनाने के लिए विभाग सीधे लाभार्थियों से संवाद कर रहा है। राज्यभर के वृद्धाश्रमों, सामाजिक संस्थाओं और व्यक्तिगत रूप से घरों में जाकर 60+ आयु वर्ग की महिलाओं से उनके सुझाव लिए जा रहे हैं।
सर्वेक्षण में यह बात प्रमुखता से उभर कर आई है कि कई बुजुर्ग महिलाओं के पास पैसे तो हैं, लेकिन बैंक जाने या डिजिटल ट्रांजेक्शन करने के लिए उन्हें दूसरों का मुंह ताकना पड़ता है। इसी ‘निर्भरता’ को खत्म करना इस नई नीति का मुख्य उद्देश्य है।
नए वित्तीय वर्ष से सौगात की उम्मीद
उत्तराखंड सरकार पहले ही महिलाओं को पंचायतों में 50% और सरकारी नौकरियों में 30% क्षैतिज आरक्षण जैसी सुविधाएं दे रही है। अब इस कड़ी में ‘दादी-नानी योजना’ को मील का पत्थर माना जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि नए वित्तीय वर्ष तक इस नीति को धरातल पर उतार दिया जाए।
मंत्री रेखा आर्या का कथन:
“पेंशन के साथ-साथ सरकार बुजुर्ग महिलाओं का संबल कैसे बन सकती है, हम इसी पर मंथन कर रहे हैं। उनके अनुभवों को ही इस नीति का आधार बनाया जाएगा ताकि वे सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन जी सकें।”
यदि यह योजना समय पर लागू होती है, तो उत्तराखंड देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो जाएगा, जहां वरिष्ठ नागरिक महिलाओं के लिए एक समर्पित और समग्र नीति अस्तित्व में है।
