Thursday, May 30, 2024
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नैनीताल में 30 मई को मा० उपराष्ट्रपति महोदय के दौरे के दौरान बदलेगा ट्रैफिक प्लान, इन रास्तों से होगा आवागमन

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नैनीताल में 30 मई को मा० उपराष्ट्रपति महोदय के दौरे के दौरान बदलेगा ट्रैफिक प्लान, इन रास्तों से होगा आवागमन

नैनीताल: भारत के माननीय उपराष्ट्रपति महोदय 30 मई 2024 को नैनीताल दौरे पर आ रहे हैं। उनके आगमन के मद्देनजर, नैनीताल शहर में यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए ट्रैफिक डायवर्जन प्लान तैयार किया गया है।

नैनीताल शहर से बाहर जाने वाले वाहन:

  • रुसी-2 से रुसी 1 को डायवर्जन कर कालाढूंगी भेजा जाएगा।
  • रानीखेत, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ से भवाली आने वाले वाहन: वी०वीआई०पी० महोदय के कार्यक्रम के दौरान, ये वाहन क्वारब से शीतला होते हुए खुटानी पहुंचेंगे।
  • हल्द्वानी से भवाली और भीमताल की ओर जाने वाले वाहन: ये वाहन ज्योलीकोट होते हुए अपने गंतव्य स्थान तक पहुंचेंगे।
  • भवाली से हल्द्वानी जाने वाले वाहन: फ्लीट के गुजरने के बाद, भवाली से हल्द्वानी जाने वाले वाहनों को भवाली से भीमताल तिराहा और काठगोदाम तक एकतरफा रास्ता मिलेगा।
  • नैनीताल से अल्मोड़ा जाने वाले वाहन: ये वाहन सुबह 9 बजे तक भवाली तिराहा से रामगढ़ तिराहा-शीतला होते हुए क्वारब जाएंगे।
  • भारी वाहनों की आवाजाही: वीवीआईपी कार्यक्रम के दौरान भारी वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से बंद रहेगी।
  • अतिरिक्त जानकारी: भवाली और भीमताल से हल्द्वानी जाने वाले वाहनों को सुबह 8 बजे तक ज्योलीकोट होते हुए हल्द्वानी जाना होगा।

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यह यातायात व्यवस्था 30 मई 2024 को सुबह 9 बजे से वीवीआईपी कार्यक्रम के समापन तक लागू रहेगी। नागरिकों से अनुरोध है कि वे इस दौरान यात्रा करते समय इस योजना का ध्यान रखें और वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें।

MSME एक्सटेंशन सेंटर में 1 जुलाई से शुरू होंगे स्वरोजगार प्रशिक्षण कार्यक्रम, SC-ST छात्रों को फीस में छूट

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MSME एक्सटेंशन सेंटर में 1 जुलाई से शुरू होंगे स्वरोजगार प्रशिक्षण कार्यक्रम, SC-ST छात्रों को फीस में छूट

हल्द्वानी: जिला उद्योग केंद्र परिसर स्थित MSME के इलेक्ट्रानिकी सेवा एवं प्रशिक्षण केंद्र (एक्सटेंशन सेंटर) में 2024-25 सत्र के लिए 1 जुलाई से विभिन्न स्वरोजगारपरक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू होने जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों में शामिल होने वाले SC-ST छात्रों को फीस में छूट भी दी जाएगी।

केंद्र इंचार्ज सुनीत भंडारी ने बताया कि सेंटर में एक वर्षीय सर्टिफिकेट कोर्स इन मशीन आपरेशन और डिप्लोमा इन कम्प्यूटर एप्लीकेशन एंड प्रोग्रामिंग चलाए जाएंगे। इसके अलावा छह माह के सर्टिफिकेट कोर्स इन मशीनिंग और सर्टिफिकेट कोर्स इन कम्प्यूटर एप्लीकेशन भी आयोजित किए जाएंगे।

सेंटर इंचार्ज सुनीत भंडारी
photo from kumaon jansandesh | सेंटर इंचार्ज सुनीत भंडारी

पांच माह का टैक्निशियन: रूम एयर कंडीशनर एंड होम एप्लाइंसेज, एक-एक माह का कम्प्यूटर फंडामेंटल और कम्प्यूटर टाइपिंग हिंदी एवं अंग्रेजी, और चार माह का टैक्निशियन हैंड हैल्ड प्रोडक्टस भी सिखाए जाएंगे।

कम समय के कार्यक्रमों में पीएलसी प्रोग्रामिंग, आटो कैड, सीएनसी प्रोग्रामिंग तथा मशीनिंग और कम्प्यूटर हार्डवेयर तथा नेटवर्किंग शामिल हैं, जो चार-चार सप्ताह के होंगे।

इसे भी पढ़े : द पैटर्न्स ऑफ इंडिया से मिली उत्तराखंड की ऐपण कला को नई उड़ान

भंडारी ने बताया कि सभी SC और ST छात्रों के लिए ये पाठ्यक्रम निःशुल्क होंगे। अधिक जानकारी के लिए इच्छुक उम्मीदवार सेंटर में आकर संपर्क कर सकते हैं।

यह खबर हल्द्वानी और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले युवाओं के लिए बहुत उपयोगी है जो स्वरोजगार के अवसरों की तलाश में हैं। MSME एक्सटेंशन सेंटर द्वारा आयोजित किए जाने वाले ये प्रशिक्षण कार्यक्रम उन्हें आवश्यक कौशल और ज्ञान प्रदान करने में मदद कर सकते हैं जिससे वे अपना खुद का व्यवसाय शुरू कर सकें या बेहतर रोजगार प्राप्त कर सकें।

द पैटर्न्स ऑफ इंडिया से मिली उत्तराखंड की ऐपण कला को नई उड़ान

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द पैटर्न्स ऑफ इंडिया से मिली उत्तराखंड की ऐपण कला को नई उड़ान
द पैटर्न्स ऑफ इंडिया

देहरादून: टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयर इंडिया एक्सप्रेस ने अपनी “द पैटर्न्स ऑफ इंडिया” योजना के तहत उत्तराखंड की लोक कला ऐपण को अपने नए B737Max विमान की पूंछ पर उकेरकर नई उड़ान दी है। यह योजना देशभर की कलाकृतियों को विमानों पर प्रदर्शित कर भारत की समृद्ध कला और विविधता को उजागर करती है।

“द पैटर्न्स ऑफ इंडिया” योजना के तहत एयर इंडिया एक्सप्रेस ने पहले विमान पर राजस्थान के बांधनी कपड़े का डिजाइन उकेरा था। अब उत्तराखंड की ऐपण कला को भी इस योजना में शामिल किया गया है। ऐपण को विमान की पूंछ पर चित्रित किया गया है, जो उत्तराखंड की संस्कृति और परंपराओं को दर्शाता है। आप को बता दे की “द पैटर्न्स ऑफ इंडिया” की पहल अक्टूबर 2023 में शुरू की गई थी। “द पैटर्न्स ऑफ इंडिया” पहल का मुख्य उद्देश्य भारत की कलात्मक विविधता को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करना और देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। यह पहल न केवल यात्रियों को प्रेरित करेगी, बल्कि भारतीय कला और कारीगरों को भी प्रोत्साहन देगी।

एयर इंडिया एक्सप्रेस के प्रवक्ता ने कहा, “हमें भारत की समृद्ध कला और विरासत को प्रदर्शित करने में गर्व महसूस हो रहा है। ‘द पैटर्न्स ऑफ इंडिया’ योजना के माध्यम से हम देश के विभिन्न क्षेत्रों की कला और संस्कृति को लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।”

https://x.com/AirIndiaX/status/1793997625714516416

ऐपण कला को विमान पर उकेरने का काम हैदराबाद में जीएमआर एयरो टेक्निक में किया गया है। यह कला प्राकृतिक रंगों और आकृतियों का उपयोग करके बनाई जाती है और इसका उपयोग त्योहारों और विशेष अवसरों पर घरों और मंदिरों को सजाने के लिए किया जाता है।

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एयर इंडिया एक्सप्रेस ने कहा कि वह भविष्य में भी इस योजना के तहत अन्य भारतीय कलाकृतियों को विमानों पर प्रदर्शित करेगी।

पावड़ा गीत | किसी वीर या देवता की वीरता का बखान करने वाली लोकगीत विधा।

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पावड़ा
फोटो : जागर गायिका रामेश्वरी भट्ट साभार अनंत हिमालया

पावड़ा :

उत्तराखंड के गढ़वाल मंडल में किसी वीर पुरुष अथवा देवता  के जीवन से संबंधित उसके वीरता पूर्ण घटनाओं का वर्णन जिन गीतों में किया जाता है उन्हें गढ़वाल में पावड़ा गीत कहा जाता है। यह कुमाऊँ के “कटकु ” , भड़गामा ,या राजस्थान के रासो गीत की तरह होते हैं गढ़वाल में देवताओं के पावड़ो में गोरिल देवता एवं नागराजा के पावड़े काफी प्रसिद्ध है।

गोरिल के पवाड़े में कहा गया है कि तैमूर लंग अपनी विशाल तुर्की सेना को लेकर पहाड़ों पर आक्रमण एवं लूटपाट करने की दृष्टि से दिल्ली से चलता हुआ बिजनौर जिले में स्थित गढ़मुक्तेश्वर के पास अपने कटक के साथ आगे बढ़ रहा था तो गोरिल ने अपने महर एवं फड़्त्याल वीर योद्धाओं एवं नाथपंथी साधुओं की फौज को संगठित करके उस पर आक्रमण करके उसके प्रसार को आगे बढ़ने से रोक दिया था।
पावड़ा गीत | किसी वीर या देवता की वीरता का बखान करने वाली लोकगीत विधा।
इस प्रकार गढ़वाल पर मंडराते हुए इन क्रूर विधर्मियों के विध्वंश से इसे बचा लिया था। देवता संबंधी इन पावड़ों का गान सामान्यतः जागरों के समय यहां के वाद्यवादकों ढोली, औजी, दास आदि के द्वारा किया जाता है। नागर्जा के पंवाड़े में उसे श्री कृष्ण, गोविन्द आदि नामों से पुकारा जाता है। उसके घड़ियालें में उसकी उन बाललीलाओं, जो उन्होंने ब्रज में की थीं, उनका बखान किया जाता है।
इनके अलावा गढ़वाल की वीरांगना तीलू रौतेली के पावड़े लोगों के बीच खूब प्रचलित हैं। और कत्यूरी राजा धाम देव के पावड़े गाये जाते हैं। और सरु कुमेन और गढ़ु सुम्याल के प्रेम कथा के पावड़े गाये जाते हैं।
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कंडार देवता | उत्तरकाशी क्षेत्र का महा ज्योतिष और न्यायकारी देवता।

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कंडार देवता

कंडार देवता गढ़वाल मंडल के उत्तरकाशी जिले के बारह गावों का अधिष्ठातृ देव है। इनका मूल स्थान मांडो गांव है। कहते हैं इस गांव में मांडय ऋषि का आश्रम होने के कारण इसे मांडो गांव के नाम से जाना जाता है। यहाँ के स्थानीय लोकदेवताओं में इन्हे श्रेष्ठ देव माना जाता है। कंडार देवता का प्रभाव क्षेत्र उत्तरकाशी का उत्तरी क्षेत्र है। इनका निवास स्थान उत्तरकाशी का ततराली गांव है। इसका मंदिर वरुणावत पर्वत पर स्थित संग्राली गांव में स्थित है। यहाँ इन्हे धातु के मुखोटे के रूप में स्थापित किया है।

कंडार देवता के पास भूत भविष्य और वर्तमान हर सवाल का जवाब है –

बैशाख माह में कंडार देवता का डोला यहाँ से ऐरासुगढ़ जाता है। वहां तीन चार दिन का उत्सव होता है। यहाँ अन्य देवताओं के डोले भी आते हैं। कंडार देवता को शिव स्वरूप माना जाता है। धातु रुपी मूर्ती डोले के अंदर सजी रहती है। देवता डोली को हिलाकर अपने भक्तों के सवालों का जवाब देता है। पुजारी डोली का इशारा समझकर उसे लोगो को समझाता है। इसके अलावा देवता जन्मपत्री देखकर ,भूत ,भविष्य और वर्तमान भी बता देते हैं।

कहते हैं कंडार देव जन्मपत्री देखकर विवाह भी तय कर देते हैं। होने ऐसे ऐसे लोगो का विवाह तय करवाया है जिसके लिए बड़े -बड़े ज्योतिषी मना कर चुके थे। कहते हैं जब कंडार देव को गुस्सा आता है तो ,इनकी प्रतिमा में से पसीना आने लगता है।

कंडार देवता | उत्तरकाशी क्षेत्र का महा ज्योतिष और न्यायकारी देवता।

कंडार देवता को स्थानीय देवताओं में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है –

इस देवता को स्थानीय लोकदेवताओं में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। धार्मिक महोत्सवों के अवसर पर इसका स्थान केंद्रीय और सर्वोच्च होता है। और बिना कंडार देव के स्थानीय देवता पहले स्नान नहीं कर सकते हैं और न ही धार्मिक यात्राओं में सम्मिलित हो सकते हैं। इसके बारे में एक जनश्रुति है कि , इनकी मूर्ति एक किसान को हल जोतते समय किसान को परशुराम मंदिर के पीछे मिली ,उसने राज्य की संपत्ति मानकर राजभवन श्रीनगर पहुचा दिया। और राजा ने ऐसे अपने मंदिर में सब देवताओं के नीचे रखवा दिया।

दूसरे दिन राजा मंदिर गया तो उसने देखा मूर्ति सबसे ऊपर थी। राजा ने उसे फिर नीचे रख दिया। दूसरे दिन राजा का आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा ,क्युकी वो मूर्ति फिर से सबसे ऊपर आ गई थी। इसके अलावा राज्य में अनेक उथलपुथल होने लगी। राजा ने इसे परशुराम मंदिर में पहुचा दिया। वहां के पुजारी ने इसकी प्रकृति को देख कर इसे एक टीले पर स्थापित करवा दिया।

कंडार देवता | उत्तरकाशी क्षेत्र का महा ज्योतिष और न्यायकारी देवता।
kandar devta uttarkashi

कहते हैं कंडार देवता भृमण प्रिय देवता है। यह एक स्थान पर नहीं रहता है। यह सदा अपने क्षेत्र में भ्रमण करता रहता है।  यह देवता न्यायप्रिय देवता है। दुष्टो को दंड देता है और पीड़ितों को न्याय देता है। कहते हैं कंडार देवता की वहां वही स्थिति है ,जो हनोल में महासू देवता ,कुमाऊँ में गोलू देवता और नैटवाड़ में पोखू देवता की होती है।

इसके बारे यह भी कहा जाता है कि सन 1962 से पहले भारत -तिब्बत व्यापार में भारत के शौका व्यापारियों और तिब्बती व्यापारियों के बीच जो अलिखित कॉन्ट्रेक्ट होता था उसे कंडार प्रथा कहते थे। इसमें दोनों पक्ष एक मूर्ति को सर में रखकर , आजीवन इस व्यापारिक संबंध को निभाने की कसमे खाते थे। सम्भवतः वह मूर्ति कंडार देवता की होती होगी।

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नौ ढुंगा घर चम्पवात का अनोखा घर जिसके हर कोने से 9 ही पत्थर दिखाई देते हैं।

पोखु देवता मंदिर -उत्तराखंड का ऐसा मंदिर जहाँ भगवान को पीठ दिखा के पूजा होती है

भीमताल का छोटा कैलाश ,जहा से शिव ने देखा राम -रावण युद्ध।

भुकुंड भैरव | केदारनाथ धाम की हर गतिविधि पर पैनी नजर रहती है इनकी।

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बद्रीनाथ धाम में वीडियोग्राफी पर रोक का उल्लंघन: 37 लोगों पर हुई चालान की कारवाही

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बद्रीनाथ धाम में वीडियोग्राफी पर रोक का उल्लंघन: 37 लोगों पर हुई चालान की कारवाही

चमोली: श्री बद्रीनाथ धाम मन्दिर परिसर में वीडियोग्राफी और रील्स बनाने पर लगे प्रतिबंध का उल्लंघन करने वाले 37 लोगों पर चमोली पुलिस ने चालान काटकर सख्त कार्रवाई की है। पुलिस के अनुसार, इन श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर के 50 मीटर के दायरे में मोबाइल फोन से वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिए थे। यह मंदिर प्रबंधन द्वारा तय किए गए नियमों का उल्लंघन है।

पुलिस ने इन लोगों पर जुर्माना लगाने के साथ ही उन्हें हिदायत दी है कि वे दोबारा ऐसा न करें।

श्री बद्रीनाथ धाम मन्दिर एक पवित्र धार्मिक स्थल है। मंदिर परिसर में शांति और भक्ति बनाए रखने के लिए यह प्रतिबंध लगाया गया है। पुलिस और मंदिर प्रबंधन श्रद्धालुओं से अपील करते हैं कि वे मंदिर परिसर में शांति और भक्ति बनाए रखने में सहयोग करें। नियमों का उल्लंघन न करें और वीडियोग्राफी और रील्स बनाने से बचें।

https://x.com/uttarakhandcops/status/1793662250064171371

ब्रैकिंग न्यूज़ : केदारनाथ में हेलीकॉप्टर में खराबी के चलते करनी पड़ी इमरजेंसी लैंडिंग। टला बड़ा हादसा

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ब्रैकिंग न्यूज़ : केदारनाथ में हेलीकॉप्टर में खराबी के चलते करनी पड़ी इमरजेंसी लैंडिंग

24 मई 2024,देहरादून: केदारनाथ से एक बड़ी खबर आ रही हैं। आज सुबह 7:05 बजे के करीब, एक हेलीकॉप्टर को केदारनाथ में इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हेलीकॉप्टर में तकनीकी खराबी के कारण इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी। हेलीकॉप्टर सिरसी हेलीपैड से केदारनाथ धाम जा रहा था जब यह घटना हुई। रहत की खबर यह है की हेलीकॉप्टर में सवार सभी 6 यात्री और पायलट सुरक्षित हैं।

आप को बता दे की घटना की सूचना मिलते ही, स्थानीय प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंच गए। सभी यात्रियों को सुरक्षित निकाल लिया गया और उन्हें प्राथमिक उपचार प्रदान किए गए। अधिकारियों ने घटना की जांच शुरू कर दी है और हेलीकॉप्टर की इमरजेंसी लैंडिंग के कारणों का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। यह हेलीकॉप्टर क्रिस्टल एविएशन कंपनी का बताया जा रहा हैं।

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नौ ढुंगा घर चम्पवात का अनोखा घर जिसके हर कोने से 9 ही पत्थर दिखाई देते हैं।

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नौ ढुंगा घर
मूल फोटो - साभार गूगल

प्रस्तुत लेख में उत्तराखंड के एक ऐसे ऐतिहासिक घर का वर्णन किया गया है ,जिसके बारे में कहा जाता है कि यह नौ पत्थरों से बना है। क्यूकी इसको किसी भी कोने से देखे तो केवल नौ पत्थर दिखाई देते हैं। इसलिए इसका नाम स्थानीय भाषा में नौ ढुंगा घर ( Nau Dhunga Ghar) यानि नौ पत्थरों वाला मकान भी कहते हैं।

उत्तराखंड का अनोखा घर नौ ढुङ्गा घर –

उत्तराखंड के कुमाऊँ मंडल के चम्पावत जिले में चम्पावत-पिथौरागढ़ राजमार्ग पर उससे 1.5 किमी दूर मांदली नामक गांव में एक प्राचीन मकान के भग्नावेश हैं। इस घर का नाम है नौ ढुंगा घर ( Nau Dhunga Ghar champawat ) यह घर यहाँ के मध्यकालीन भवनों का एकमात्र अवशेष है।

मांदली प्रारम्भिक वर्षों में चम्पावत के चन्द शासकों का आवास स्थल रहा था। इसकी पुष्टि राजा अभयचन्द के सन् 1358ई. के मानेश्वर शिलालेख से होती है। जिसमें कि उसे ‘मांदली’ से प्रसारित किये जाने का उल्लेख है। शोधकर्ताओं का मानना है कि पुरातन भवनशिल्प का यह भग्नावशेष प्रारम्भिक चन्द शासकों के भवन का ही अवशेष हो सकता है। इसके अवशिष्ट प्रथम मंजिल की बनावट से लगता है कि यह भवन मूलतः दो मंजिला रहा होगा।

नौ ढुंगा घर के हर कोने से 9 पत्थर दिखाई देते हैं –

इस भवन की विशेषता यह है कि इसकी दीवारों पर लम्बाई में एक रद्दे में छोटे-बड़े मिलाकर केवल नौ पत्थरों का उपयोग किया गया है, किन्तु चौड़ाई में दीवारों का माप कम होने से उनका निर्माण 6 से 9 शिलाओं के योग से किया गया है। किसी भी कोने से गिननेपर 9 पत्थर ही होते हैं। अपनी इस विशिष्टता के कारण ही यह भवन ‘नौढुङा (नौ पत्थर वाला) घर के नाम से जाना जाता है।

नौ ढुंगा घर
मूल फोटो -साभार गूगल

डा. रामसिंह अनुसार इसमें लगी तरासी हुई शिलाओं की अधिकतम माप इस प्रकार है-2मी. लम्बाई x 0.67 सेमी. उठान x 0.31 सेमी. तक ऊपरी और निचली पहल की चौड़ाई है। पत्थरों को बड़ी कुशलता पूर्वक तराशा गया है। इसकी दीवारों की सभी शिलाएं लम्बाई में पंक्तिबद्ध चुनी गयी हैं।

संदर्भ – उत्तराखंड ज्ञानकोष प्रो dd शर्मा। 

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क्या आप शुभ अशुभ से जुडी इन पहाड़ी मान्यताओं के बारे में जानते हैं ?

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पहाड़ी मान्यताओं पर आधारित लेख

हर समाज में शुभ अशुभ से जुडी कई मान्यताएं होती हैं। ठीक उसी प्रकार हमारे पहाड़ो में दैनिक जीवन और क्रियाकलापों से जुड़ी घटनाओं को शुभ और अशुभ से जोड़ा जाता है। वर्तमान में शहरीकरण के प्रभाव इन पहाड़ी मान्यताओं का प्रभाव थोड़ा काम हो गया हैं ,लेकिन ग्रामीण अंचलों में ये मान्यताएं अपने पारंपरिक रूप में अभी भी प्रचलित हैं। उत्तराखंड में प्रचलित लोकविश्वासो ,आस्थाओं ,शुभ-अशुभ सम्बन्धी अवधारणाओं एवं वर्जनों -प्रतिवर्जनों में से अनेक ऐसे हैं कि जो सर्वत्र स्तर पर आंशिक भेदों के साथ पुरे हिमालयी क्षेत्र में माने जाते हैं। इनमे में से

आइये जानते हैं कुछ पहाड़ी मान्यताओं के बारे में –

  • लोहे से लोहा टकराना या खाली कैंची चलना पहाड़ी मान्यताओं में अशुभ माना जाता है।
  • गले में हाथ लगने से गले में गलकण्ड होने का खतरा माना जाता है। जिसका निवारण हाथ में फूंक मरना होता है।
  • कुत्ते का आकाश की ओर मुँह करके रोना ,दिन में उल्लू का बोलना और रात को कौओं का रात को बोलना अशुभ माना जाता है।
  • शिशु का बार -बार नाक मसलना अस्वस्थ होने का संकेत माना जाता है।
  • बच्चे को छींक आने पर कुमाऊँ क्षेत्र की माताएं , “जय श्री ” छैक छीका छतुर का उच्चारण करती है। जिसके पीछे मान्यता है कि ऐसा बोलने से शिशु से इसके नकारात्मक प्रभाव दूर हो जाते हैं।
  • चूल्हे पर आग जलाते समय फूकं मारने पर यदि आग नहीं जलती है तो कहते हैं उक्त लड़के या लड़की को कंजूस सास मिलेगी या कही ये माना जाता है कि उक्त व्यक्ति की सास इस दुनिया में नहीं है।
  • पहाड़ों में चिल्लाने और चटख कपडे न पहनने की हिदायत दी जाती है। कहा जाता है कि पहाड़ों में चटख कपडे पहनने से या चिल्लाने से भूत प्रेत चिपटने का खतरा रहता है। मगर इसका वैज्ञानिक कारण भी है ,पहाड़ों पर जो से बोलने पर हिमस्खलन का खतरा रहता है।

पहाड़ी मान्यताओं पर लेख

  • पहाड़ी मान्यताओं में विवाह मंडप पर दूल्हा दुल्हन के हसने या बोलने की मनाही होती है। इसके पीछे मान्यता यह है कि जो दूल्हा या दुल्हन मंडप पर बोलते हैं या हँसते हैं उनकी संतान गूंगी होती है।
  • शिशुओं के दातों के संबंध में कहा जाता है कि बालक के सातवें महीने में और कन्या के सातवें महीने दांत निकलना शुभ होता है।
  • पहाड़ी मान्यताओं में दाएं हाथ की हथेली खुजाना मतलब पैसे आना और बायीं हथेली खुजलाना मतलब पैसे जाना होता है।
  • पहाड़ी मान्यता के अनुसार हिचकी आने का मतलब आपको कोई अपना याद कर रहा है। और आंगन में सुबह सुबह कौआ बोले तो उस दिन घर में मेहमान आने की उम्मीद रहती है।
  • घर के अंदर सिटी या मुरली बजाने पर कहते हैं घर में सांप आते हैं।
  • पहाड़ी मान्यताओं कुवारों के लिए में खाने के बर्तनो या करछी को चाटना मना है। कहते हैं ऐसा करने से उनकी शादी में बारिस होती है।
  • कहते हैं यदि दांत निकले से पूर्व शिशु के मसूड़े छू दिए तो उसके दांत देर में आते हैं।
  • कहते हैं छलनी को सिर या भूमि में रखने से छलनी के छिद्रों के बराबर कर्ज होता है।
  • कहते हैं हाथ में नमक पकड़ाना या मिर्च पकड़ाने से झगड़ा होने का खतरा होता है।
  • जलती हुई आग यदि भुरभुराएँ तो कहते हैं कोई अपना याद कर रहा होगा।
  • रोटी बनाने के बाद तवे को खाली उतारने से दरिद्रता आने की आशंका होती है।

निष्कर्ष –

मित्रों उपरोक्त में हमने उत्तराखंड के पहाड़ी समाज में मान्य कुछ मान्यताओं का वर्णन किया है। पहले संसाधनों के आभाव में लोग इन्ही मान्यताओं के आधार पर अपने दैनिक जीवन का निर्वहन करते थे। पुराने ज़माने के लोगों ने अपने जीवन शैली को सरल व्यवस्थित रखने के उस समय के अनुसार और अपनी जानकारी के आधार पर  इन मान्यताओं को बनाया था। हालांकि आजकल इन पहाड़ी मान्यताओं का अस्तित्व लगभग ख़त्म हो गया है। इनका प्रमुख कारण वर्तमान पहाड़ी समाज की जीवन शैली में काफी बदलाव आ गया है।

पुराने जमाने की इन मान्यताओं में से कुछ के बहुत गहरे अर्थों के साथ उनके पीछे वैज्ञानिक कारण भी होता है। जैसे – पहाड़ों में आवाज करने से भूत चिपट जाते हैं। इसके पीछे वैज्ञानिक तर्क यह है कि  हिमालयी पहाड़ कच्चे होते हैं और तेज आवाज से दरकने का खतरा होता है। इसलिए पहाड़ों में तेज आवाज करने की मनाही होती है।

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भुकुंड भैरव | केदारनाथ धाम की हर गतिविधि पर पैनी नजर रहती है इनकी।

घोड़ाखाल मंदिर नैनीताल – न्याय के देवता गोलू देवता का घंटियों वाला मंदिर

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होमगार्ड जवानों ने दिखाई वीरता, 7 किलोमीटर पैदल चलकर बचाया श्रद्धालु की जान

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होमगार्ड जवानों ने दिखाई वीरता, 7 किलोमीटर पैदल चलकर बचाया श्रद्धालु की जान

रुद्रनाथ: उत्तराखंड पुलिस ने सोशल मीडिया प्लॅटफॉम x में एक वीडियो पोस्ट की हैं। जिसमे होमगार्ड जवान एक आदमी को अपनी पीठ पर लेके पहाड़ी दुर्गम इलाके से गुजर रहे हैं। यह वीडियो रुद्रनाथ पैदल मार्ग की हैं। जहा पुंग बुग्याल के पास एक श्रद्धालु का स्वास्थ्य अचानक खराब होने से हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही होमगार्ड जवान पुष्कर और नीरज 7KM पैदल चलके मौके पर पहुंचे।

वहा पहुंच कर जवानों ने देखा कि श्रद्धालु की हालत गंभीर है और उसे तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता है। 7 किलोमीटर का दुर्गम पहाड़ी रास्ता होने के बावजूद, दोनों जवानों ने बिना किसी देरी के श्रद्धालु को अपनी पीठ पर उठाकर सड़क तक लाने का निर्णय लिया।

कठिन परिस्थितियों और थकान के बावजूद, जवानों ने हार नहीं मानी और अपनी वीरता का परिचय देते हुए श्रद्धालु को समय रहते सड़क तक पहुंचाया। वहां से उन्हें तुरंत चिकित्सालय ले जाया गया, जहाँ उनका इलाज किया जा रहा है।

https://x.com/uttarakhandcops/status/1792727565683343688

सूत्रों के अनुसार, श्रद्धालु की हालत अब स्थिर है और वह खतरे से बाहर है। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने होमगार्ड जवानों की इस वीरता और साहसिक कार्य की भरपूर प्रशंसा की है।

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यह घटना एक बार फिर से हमारे जवानों की वीरता और तत्परता का प्रमाण है। वे सदैव आम जनता की सेवा के लिए तत्पर रहते हैं और किसी भी आपातकालीन स्थिति में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हैं।