हौसले की उड़ान, पिथौरागढ़। कहते हैं कि अगर मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो शारीरिक अक्षमताएं और तंगहाली भी रास्ते का रोड़ा नहीं बन सकतीं। इस बात को सच कर दिखाया है सीमांत जनपद पिथौरागढ़ के नाचनी क्षेत्र के अंतर्गत राया बजेता निवासी शमशेर ने। बचपन से बोलने और सुनने में असमर्थ (मूक-बधिर) होने के बावजूद, शमशेर ने तकनीकी माडलिंग के क्षेत्र में अपनी असाधारण रचनात्मकता और अनूठे नवाचारों (इन्नोवेशंस) से हर किसी को हैरत में डाल दिया है। आजकल वे पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बने हुए हैं।
रिमोट कंट्रोल से तैरते शिकारे और दौड़ते ट्रक
शमशेर के पास कोई औपचारिक इंजीनियरिंग की डिग्री नहीं है, लेकिन उनकी तकनीकी समझ बड़े-बड़े जानकारों को हैरान करती है। उन्होंने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए कई अद्भुत मॉडल तैयार किए हैं:
- झील में तैरता शिकारा: उन्होंने पानी में तैरने वाले पारंपरिक शिकारे का एक बेहद खूबसूरत मॉडल बनाया है, जो पूरी तरह रिमोट कंट्रोल से संचालित होता है। यह मॉडल अपने बेहतरीन डिजाइन और कार्यप्रणाली के कारण लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
- पहाड़ी रास्तों का लाइव मॉडल: पहाड़ी क्षेत्र की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और संकरे रास्तों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने एक सड़क का मॉडल तैयार किया है। इस मॉडल पर छोटे-छोटे ट्रकों को रिमोट कंट्रोल के माध्यम से सफलतापूर्वक चलाया जा सकता है।
- सड़क निर्माण का प्रयोगात्मक कार्य: शमशेर ने अपने स्तर पर सड़क निर्माण का एक प्रयोगात्मक प्रोजेक्ट भी तैयार किया है, जो बुनियादी ढांचे और तकनीकी समझ के प्रति उनके गहरे लगाव को दर्शाता है।
- रोडवे, रोपवे और एयरक्राफ्ट: परिवहन व्यवस्था को करीब से समझने वाले शमशेर ने आधुनिक इंजीनियरिंग सोच को सरल रूप में प्रस्तुत करते हुए आकर्षक रोडवे और रोपवे के मॉडल भी बनाए हैं। इसके अलावा, उन्होंने एक एयरक्राफ्ट (हवाई जहाज) का मॉडल भी तैयार किया है, जिसे देखकर स्थानीय लोग उनकी प्रतिभा की खुलकर सराहना कर रहे हैं।
कठिन परिस्थितियां भी नहीं डिगा सकीं हौसला
शमशेर की यह सफलता इसलिए और भी बड़ी है क्योंकि उनका जीवन बेहद संघर्षपूर्ण रहा है। जब वह मात्र 12 वर्ष के थे, तभी उनके पिता भगत सिंह का असमय निधन हो गया था। पिता के साए के बिना और बचपन से मूक-बधिर होने के बाद भी उन्होंने कभी हार नहीं मानी।
वर्तमान में परिवार की जिम्मेदारी का पूरा भार उनके बड़े भाई चंद्रभानु सिंह के कंधों पर है, जो मेहनत-मजदूरी करके घर का पालन-पोषण करते हैं। वहीं उनकी माता मोहिनी देवी पशुपालन के माध्यम से घर को आर्थिक सहारा देती हैं।
पूरे क्षेत्र के लिए बने गौरव
तमाम आर्थिक तंगहालियों और पारिवारिक मुश्किलों के बावजूद शमशेर ने अपने हुनर को मरने नहीं दिया। उनकी इस अद्भुत तकनीकी क्षमता और कड़े संघर्ष की बदौलत आज वे न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे पिथौरागढ़ और उत्तराखंड क्षेत्र के लिए प्रेरणा और गौरव का विषय बन गए हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि शमशेर को सही मंच और सरकारी सहायता मिले, तो वे तकनीकी और नवाचार के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर सकते हैं।
