ऊखीमठ/रुद्रप्रयाग: पंच केदारों में द्वितीय केदार के रूप में पूजे जाने वाले भगवान मद्महेश्वर की चल विग्रह उत्सव डोली शुक्रवार को अपने शीतकालीन गद्दी स्थल, ओंकारेश्वर मंदिर (ऊखीमठ) में विराजमान हो गई है। डोली के आगमन के साथ ही पूरा मंदिर परिसर ‘जय बाबा मद्महेश्वर’ के जयकारों और वेद ऋचाओं से गूंज उठा। इस भव्य स्वागत के लिए मंदिर समिति द्वारा ओंकारेश्वर मंदिर को 08 क्विंटल गेंदे के फूलों से विशेष रूप से सजाया गया था।
शनिवार से शुरू होगी शीतकालीन पूजा भगवान मद्महेश्वर की डोली के शीतकालीन गद्दी स्थल पर विराजमान होने के बाद, अब शनिवार से भगवान की शीतकालीन पूजा विधिवत रूप से शुरू की जाएगी। अगले 6 माह तक भक्त भगवान मद्महेश्वर के दर्शन ओंकारेश्वर मंदिर में ही कर सकेंगे।
ब्रह्म बेला में गिरीया गाँव से शुरू हुआ सफर डोली यात्रा के अंतिम चरण की शुरुआत आज ब्रह्म बेला में गिरीया गाँव से हुई। मन्दिर के प्रधान पुजारी शिव लिंग ने पंचाग पूजन के तहत भगवान मद्महेश्वर समेत अन्य देवी-देवताओं का आह्वान कर आरती उतारी। इसके पश्चात, निर्धारित समय पर डोली ऊखीमठ के लिए रवाना हुई।
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यात्रा के दौरान फाफंज और सलामी गाँव सहित विभिन्न पड़ावों पर ग्रामीणों ने डोली का भव्य स्वागत किया। भक्तों ने भगवान को पुष्प, अक्षत और वस्त्र अर्पित कर क्षेत्र की खुशहाली और विश्व समृद्धि की कामना की।
मंगोलचारी में चढ़ाया गया सोने का छत्र परंपरा के अनुसार, जब डोली मंगोलचारी पहुंची, तो वहाँ रावल भीमाशंकर लिंग ने भगवान मद्महेश्वर की डोली पर सोने का छत्र अर्पित किया। इसके बाद मंगोलचारी, ब्राह्मण खोली और डंगवाड़ी में ग्रामीणों ने पुष्प वर्षा कर डोली का स्वागत किया।
पुजारी संकल्प मुक्त, हजारों भक्तों ने किए दर्शन दोपहर बाद डोली के ओंकारेश्वर मंदिर पहुँचने पर हजारों श्रद्धालुओं ने दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। इस अवसर पर रावल भीमाशंकर लिंग ने मद्महेश्वर धाम के प्रधान पुजारी शिव लिंग को, जिन्होंने पिछले 6 माह तक धाम में पूजा-अर्चना की थी, उनके संकल्प से विधिवत मुक्त किया।

