उत्तराखंड का सावन 2021 – क्यों अलग मनाया जाता है, उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्र और नेपाल में सावन | कैसे शुरू हुई कावड़ यात्रा

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उत्तराखंड का सावन 2021 | पहाड़ो में सावन  | Uttarakhand Savan month 2021

संम्पूर्ण देश मे सावन 23 जुलाई 2021 से शुरू हो रहा है, और रविवार 22 अगस्त 2021 को खत्म होगा। किन्तु उत्तराखंड में पहाड़ का सावन 16 जुलाई हरेला त्यौहार के दिन से शुरू हो गया है। उत्तराखंड के सावन का पहला सोमवार 19 जुलाई 2021 को आएगा । 15 अगस्त 2021 को खत्म हो जाएगा पहाड़ियों के सावन । उत्तराखंड पहाड़ी क्षेत्रों तथा नेपाल का सावन अलग और देश के अन्य भागों में सावन अलग अलग क्यों होता है ? आइये जानते हैं, इस लेख में –

क्यों अलग होता है उत्तराखंड का सावन –

उत्तराखंड और हिमाचल के पहाड़ी मूल के लोग तथा नेपाल का सावन 16 जुलाई से शुरू होता है। जबकि उत्तराखंड के मैदानी क्षेत्र, उत्तर प्रदेश , बिहार , राजस्थान क्षेत्रो में सावन 23 जुलाई 2021 से शुरू होगा और 22 अगस्त 2021 को खत्म होगा । और भारत के दक्षिणी और पक्षिमी राज्यों में सावन 15 दिन पीछे सावन शुरू होता है। अर्थात गुजरात, महाराष्ट्र तेलंगाना, तमिलनाडु कर्नाटक  में सावन 09 अगस्त 2021 को शुरू होगा और 07 सिंतबर 2021 तक चलेगा । अब सवाल उठता है, कि

उत्तराखंड का सावन ,हिमाचली सावन और नेपाल का सावन अलग क्यों होता है ?

इस सवाल का जवाब हमे काशी के प्रसिद्ध ज्योतिषचार्य पंडित गणेश मिश्र जी ,तथा अन्य ज्योतिश्चरयों के लेख में मिलता है। उनके अनुसार ऐसी स्थिति प्रत्येक वर्ष हिन्दू पंचांग व्यवस्था के कारण होती है। देश के उत्तर मध्य और पुर्वी भागों ने पुर्णिमा के बाद नए हिन्दू महीने की शुरुआत होती है। इस पंचांग व्यवस्था में ,उत्तराखंड के मैदानी क्षेत्र, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश आते हैं।

नेपाल, उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्र, हिमाचल के कुछ हिस्सों में सौर कैलेंडर के अनुसार महीने शुरू व खत्म होते हैं, इसलिए यहाँ 16 जुलाई से सावन शुरू हो जाता है, और 15 अगस्त को खत्म हो जाता है।

नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर में भी 16 जुलाई 201 से सावन शुरू हो गए है। भारत के दक्षिण और पश्चिमी भाग में, हिन्दू माह अमावस्या के दिन से शुरू होते हैं। इसलिए इन्हें अमांत माह कहते हैं।

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सावन माह से जुड़ी पौराणिक कथाएं :-

कहा जाता है, कि देव और असुरों ने मिल कर इसी माह समुद्र मंथन  किया था। जब समुंद्र मंथन से हलाहल विष निकला तो उसे धारण करने की हिम्मत किसी को नही हुई । तब भगवान शिव ने हलाहल कालकूट विष को धारण किया। विष के  भयंकर प्रभाव से भगवान शिव का शरीर जलने लगा, तब समस्त देवों ने भगवान भोलेनाथ पर जल अर्पण किया। तब भगवान शिव की जलन कम हुई। तब से सावन माह और भगवान भोलेनाथ को जल चढ़ाने की शरुवात हुई।

उत्तराखंड के सावन

कांवड़ यात्रा कैसे शुरू हुई ?

कावड़ यात्रा के बारे में कहा जाता है, कि सर्वप्रथम  भगवान परशुराम जी  भगवान शिव को कांवड़ से लाकर जल चढ़ाया था, तब से कांवड़ की शुरुआत हुई । और कुछ लोगों का मानना है कि, त्रेतायुग में श्रवण कुमार ने सर्वप्रथम कांवड़ यात्रा की शुरुआत की थी।

उत्तराखंड सावन के सोमवार 2021 की महत्वपूर्ण तिथियां

 

16 जुलाई 2021 उत्तराखंड ,नेपाल सावन शुरुआत
19 जुलाई 2021 उत्तराखंड ,नेपाल सावन का पहला सोमवार
26 जुलाई 2021 उत्तराखंड एवं नेपाल, हिमाचल के सावन का दूसरा सोमवार
02 अगस्त 2021 नेपाल व पहाड़ियों के सावन का तीसरा सोमवार
09 अगस्त 2021 नेपाल व पहाड़ के सावन का आखिरी सोमवार

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