Wednesday, April 2, 2025
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उत्तराखंड बंद – 2अक्टूबर 2022 को अंकिता भंडारी और रामपुर तिराहा कांड के पीड़ितों के लिए न्याय की मांग

02 अक्टूबर को समस्त देश बापू व् लाल बाहदुर शास्त्री जी की जयंती मनाता है। किन्तु उत्तराखंड इसे काला दिवस के रूप में मनाता है। 02 अक्टूबर 1994 का दिन उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों के लिए काला दिवस साबित हुवा। क्योंकि 1 अक्टूबर 1994 की रात अलग उत्तराखंड की मांग के लिए दिल्ली जा रहे आंदोलनकारियों पर मुजफ्फर नगर के रामपुर तिराहे पर तत्कालीन प्रशाशन ने गोलियाँ चलाई और कई आंदोलनकारी शहीद हो गए। और तत्कालीन उत्तर प्रदेश की पोलिस पर उत्तराखंड की महिला आंदोलनकारियों के साथ दुराचार के आरोप भी लगे। इस कांड पर आज भी उन पीड़ितों को इंसाफ नहीं मिला है….. इस साल 2022 में परीक्षा घोटाला और उसके बाद अंकिता भंडारी हत्याकांड ने उत्तराखंड की जनता को झकझोर कर रख दिया है। इसलिए 1uk (गैर राजनितिक संगठन ) उत्तराखंड क्रांतिदल , तथा अन्य उत्तराखंड के सामाजिक संगठनों ने 02 अक्टूबर 2022 को ,रामपुर तिराहा के पीड़ितों और अंकिता भंडारी के लिए न्याय और उत्तराखंड को भ्रष्टाचार मुक्त करने की मांग के लिए उत्तराखंड बंद की घोषणा की है।

शुक्रवार को उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के शहीद स्थल में आयोजित बैठक में भी यही निर्णय लिया गया कि , 1994  रामपुर तिराहा के अत्याचार और वर्तमान में उत्तराखंड की स्थिति ,अंकिता भंडारी की इंसाफ की मांग के लिए और कई मुद्दों पर जनांदोलन को आगे बढ़ाते हुए 02 अक्टूबर को शांति पूर्ण उत्तराखंड बंद रखा जाय। इस बैठक के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में सामाजिक संगठनों के प्रवक्ताओं और विपक्षी दलों के प्रवक्ताओं ने बताया कि ,व्यापारिक संगठनों ,टेक्सी  यूनियनों और छात्र संगठनों ने इस बंद को समर्थन दिया है।

01 अक्टूबर की शाम को उत्तराखंड के लोगों और सामजिक संगठनों ने कई जगहों पर मशाल जुलूस निकाले। कई बाजारों में व्यपारियों ने भी शांतिपूर्ण उत्तराखंड बंद को समर्थन दिया है।

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Bikram Singh Bhandari
Bikram Singh Bhandarihttps://devbhoomidarshan.in/
बिक्रम सिंह भंडारी, देवभूमि दर्शन के संस्थापक और प्रमुख लेखक हैं। उत्तराखंड की पावन भूमि से गहराई से जुड़े बिक्रम की लेखनी में इस क्षेत्र की समृद्ध संस्कृति, ऐतिहासिक धरोहर, और प्राकृतिक सौंदर्य की झलक स्पष्ट दिखाई देती है। उनकी रचनाएँ उत्तराखंड के खूबसूरत पर्यटन स्थलों और प्राचीन मंदिरों का सजीव चित्रण करती हैं, जिससे पाठक इस भूमि की आध्यात्मिक और ऐतिहासिक विरासत से परिचित होते हैं। साथ ही, वे उत्तराखंड की अद्भुत लोककथाओं और धार्मिक मान्यताओं को संरक्षित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। बिक्रम का लेखन केवल सांस्कृतिक विरासत तक सीमित नहीं है, बल्कि वे स्वरोजगार और स्थानीय विकास जैसे विषयों को भी प्रमुखता से उठाते हैं। उनके विचार युवाओं को उत्तराखंड की पारंपरिक धरोहर के संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक विकास के नए मार्ग तलाशने के लिए प्रेरित करते हैं। उनकी लेखनी भावनात्मक गहराई और सांस्कृतिक अंतर्दृष्टि से परिपूर्ण है। बिक्रम सिंह भंडारी के शब्द पाठकों को उत्तराखंड की दिव्य सुंदरता और सांस्कृतिक विरासत की अविस्मरणीय यात्रा पर ले जाते हैं, जिससे वे इस देवभूमि से आत्मिक जुड़ाव महसूस करते हैं।
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