Friday, April 4, 2025
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उत्तराखंड में गणतुवा रोज करते हैं, बाबा बागेश्वर धाम की तरह चमत्कार

आज कल श्री बागेश्वर धाम के पीठाधीश श्री धीरेन्द्र शास्त्री चर्चाओं में बने हुए हैं। चर्चाओं  का कारण है उनके द्वारा किये जाने वाला चमत्कार! जी हा श्रद्धालु इसे चमत्कार कह रहें हैं, और तथाकथित बुद्धिजीवी इसे विज्ञान या मैजिक ट्रिक कह रहें हैं। उनका चमत्कार या मैजिक ट्रिक यह है कि, वे ये जान लेते हैं सामने वाले के मन में क्या चल रहा है? वह किस विषय में सोच रहा है? उनकी इसी खूबी के सारे देश के लोग दीवाने हो रहे हैं। और दिन प्रतिदिन उनके समर्थक बढ़ते जा रहे हैं। अब वे चमत्कार कर रहे या विज्ञानं है, ये शोध का विषय है। लेकिन जिस चमत्कार के लोग दीवाने हो रहे, वही चमत्कार उत्तराखंड के पहाड़ों में लोग बरसों से करते आ रहे हैं, उन्हें हम पहाड़ में गणतुवा या पुछयारा कहते हैं।

उत्तराखंड की लोक भाषा में गणतुवा, पुछयारा, पुछेर या बाक्की वह व्यक्ति कहलाता है, जो आधिदैविक, अधिभौतिक व मानसिक कष्टों से पीड़ित व्यक्ति के द्वारा उनके कारणों और निवारण हेतु पूछे गए सवालों का शरीर में अवतरित दैवीय शक्ति के माध्यम से जवाब देता है। पुछयारी का  शाब्दिक अर्थ होता है, पूछताछ के आधार पर समाधान करने वाला। और गंतुवा का अर्थ होता है गणना करके समाधान देने वाला। वास्तव में गंतुवा पीड़ित के द्वारा लाये गए चावलों पर गणना करके अपना समाधान देता है।

इस कार्य हेतु गणतुवा प्रतिदिन स्नानदि से पवित्र होकर एक आसान पर बैठता है। एक मुट्ठी या सावा मुठ्ठी चावल के दाने पीड़ित के हाथ से छुवा कर या उसके सर से घुमा कर, गणतुवा के सामने रख देते हैं। वह बारी बारी से उन्हें उठाकर दैवीय आवेश में उनका परिक्षण करता है। इसके बाद वह उस पीड़ित के कष्टों और कारणों को बताता है। जो की प्रायः किसी देवी देवता  या पितृ की उपेक्षा किये जानेउन्हें  या उनके प्रति किये हुए वादे पूरा न किये जाने से कुपित होने के संबंध में होते हैं। इसके साथ शांत एवं संतुष्ट करने के उपाय भी बताता है।कई बार ये होता है कि मौसमी बिमारियों या भौतिक व्याधियों से परेशान लोग भी गंतुवा के पास जाते हैं। गंतुवा उन्हें कर्म रोग बताकर डॉक्टरी चिकत्सा लेने या परहेज करने की सलाह देते हैं।

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अब सामने वाले के मन की बात जानना चमत्कार है तो, पहाड़ों के गणतुवा, पुछेर ये चमत्कार बरसों से कर रहे हैं। अगर ये विज्ञान या जादुई ट्रिक है तो पहाड़ के पुछेर या गंतुवे तारीफ के अधिकारी हैं, वे बिना किसी शिक्षा, बिना अभ्यास के आपकी मन की बात जान लेते हैं।

गणतुवा
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समाज में  जब कोई सामान्य मानवीय सामर्थ्य से अधिक कार्य करके दिखाता है तो उस समाज के सामान्य श्रद्धावान लोग उस कार्य को उस मानव का चमत्कार , दैवीय चमत्कार या देव वरदान के रूप में मानते हैं। और उसी समाज के तथाकथित बुद्धिजीवी लोग उस कार्य को मैजिक ट्रिक या विज्ञान से जोड़ते हैं। समाज में इस प्रकार की घटनाएं चलती रहती हैं। कई बार श्रद्धावान मनुष्यों का मत सही होता है ,क्योकि संसार में कभी -कभी ऐसी घटनाये घटित होती हैं जिनके आगे विज्ञानं के सिद्धांत भी बौने लगते हैं। और इन्ही अप्रत्याशित घटनाओं के कारण कई लोग अतिश्रद्धावान हो जाते है। उनकी ऐसी अतिश्रद्धा का लाभ समाज के कुछ चतुर लोग लाभ उठाते हैं। ये सिलसिला समाज में चलता रहता है।

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नोट -प्रस्तुत लेख में हमारा उद्देश्य केवल इतना बताना है, कि जिस चमत्कार के बारे में देश में भीषण चर्चा का माहौल बना है ,वह चमत्कार हमारे पहाड़ों में बरसों से होता है, और यह पहाड़ वासियों के दैनिक जीवन का हिस्सा है। अब यह जादू है या चमत्कार यह शोध का विषय है।

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Bikram Singh Bhandari
Bikram Singh Bhandarihttps://devbhoomidarshan.in/
बिक्रम सिंह भंडारी, देवभूमि दर्शन के संस्थापक और प्रमुख लेखक हैं। उत्तराखंड की पावन भूमि से गहराई से जुड़े बिक्रम की लेखनी में इस क्षेत्र की समृद्ध संस्कृति, ऐतिहासिक धरोहर, और प्राकृतिक सौंदर्य की झलक स्पष्ट दिखाई देती है। उनकी रचनाएँ उत्तराखंड के खूबसूरत पर्यटन स्थलों और प्राचीन मंदिरों का सजीव चित्रण करती हैं, जिससे पाठक इस भूमि की आध्यात्मिक और ऐतिहासिक विरासत से परिचित होते हैं। साथ ही, वे उत्तराखंड की अद्भुत लोककथाओं और धार्मिक मान्यताओं को संरक्षित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। बिक्रम का लेखन केवल सांस्कृतिक विरासत तक सीमित नहीं है, बल्कि वे स्वरोजगार और स्थानीय विकास जैसे विषयों को भी प्रमुखता से उठाते हैं। उनके विचार युवाओं को उत्तराखंड की पारंपरिक धरोहर के संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक विकास के नए मार्ग तलाशने के लिए प्रेरित करते हैं। उनकी लेखनी भावनात्मक गहराई और सांस्कृतिक अंतर्दृष्टि से परिपूर्ण है। बिक्रम सिंह भंडारी के शब्द पाठकों को उत्तराखंड की दिव्य सुंदरता और सांस्कृतिक विरासत की अविस्मरणीय यात्रा पर ले जाते हैं, जिससे वे इस देवभूमि से आत्मिक जुड़ाव महसूस करते हैं।
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