Wednesday, April 2, 2025
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जल प्रहरी सम्मान से सम्मानित हुए उत्तराखंड के दो पर्यावरण प्रेमी

आज दुनिया ग्लोबल वार्मिंग जैसी भयावह स्थिति का सामना कर रही है ऐसे में सबसे ज्यादा जरूरी है पर्यावरण संरक्षण की, उसके लिए हम सभी को मिलकर पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने की आवश्यकता है। हाल ही में भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय और उसकी सहयोगी संस्था सरकारटेल के सहयोग से महाराष्ट्र में एक सम्मेलन का आयोजन किया गया था जिसमें आने वाले जल संकट और उसके संरक्षण को लेकर गहन चर्चा हुई।

इस दौरान अन्य देशो से आए हुए विशेषज्ञ वैज्ञानिकों की टीम ने जल संकट को एक भयानक वैश्विक संकट मानते हुए इसके समाधान के लिये अपने कुछ सुझाव दिए तथा दुनिया भर में हो रहे ग्लोबल वार्मिंग व पेयजल के संकट से निपटने के लिए दुनियाभर की नई-नई तकनीकों और भारत द्वारा इस दिशा में उठाये जा रहे अनेकों सकारात्मक कदमों पर भी खूब चर्चा हुई। इस दौरान कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर तक के आए आए हुए 52 जल पर्यावरणविदों को जल प्रहरी सम्मान से से सम्मानित भी किया गया। जिसमें हमारे उत्तराखंड के नैनीताल जिले से ओखलकांडा निवासी चंदन सिंह नयाल व अल्मोड़ा जिले के शिव कुमार उपाध्याय का नाम भी शामिल है।

जल प्रहरी

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जल प्रहरी – शिव कुमार उपाध्याय

जलागम विभाग अल्मोड़ा के उप परियोजना निदेशक डाॅ० शिव कुमार उपाध्याय जी को महाराष्ट्र में आयोजित कार्यक्रम में उनके द्वारा किए गए अनुकरणीय कार्यों के लिए ‘जल प्रहरी सम्मान’ से सम्मानित किया गया। जोकि पूरे प्रदेश के लिए गर्व की बात है। हम डाॅ० शिव कुमार उपाध्याय जी को इस सम्मान के लिए बधाईयाँ देते हैं।

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जल प्रहरी

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चन्दन सिंह नयाल जी

नैनीताल जिले के ओखलकांडा ब्लाक, तोक चामा निवासी पर्यावरण प्रेमी चन्दन सिंह नयाल को भी उनके द्वारा बनाए गए 3200 से अधिक चालखाल और 53000 से ज्यादा पेड़ लगाने के अनुकरणीय कार्यों के लिए जल प्रहरी सम्मान से सम्मानित किया गया। चन्दन सिंह नयाल द्वारा किए गए कार्यों के लिए उन्हें पहले भी कई बार सम्मानित किया जा चुका है।

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Bikram Singh Bhandari
Bikram Singh Bhandarihttps://devbhoomidarshan.in/
बिक्रम सिंह भंडारी, देवभूमि दर्शन के संस्थापक और प्रमुख लेखक हैं। उत्तराखंड की पावन भूमि से गहराई से जुड़े बिक्रम की लेखनी में इस क्षेत्र की समृद्ध संस्कृति, ऐतिहासिक धरोहर, और प्राकृतिक सौंदर्य की झलक स्पष्ट दिखाई देती है। उनकी रचनाएँ उत्तराखंड के खूबसूरत पर्यटन स्थलों और प्राचीन मंदिरों का सजीव चित्रण करती हैं, जिससे पाठक इस भूमि की आध्यात्मिक और ऐतिहासिक विरासत से परिचित होते हैं। साथ ही, वे उत्तराखंड की अद्भुत लोककथाओं और धार्मिक मान्यताओं को संरक्षित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। बिक्रम का लेखन केवल सांस्कृतिक विरासत तक सीमित नहीं है, बल्कि वे स्वरोजगार और स्थानीय विकास जैसे विषयों को भी प्रमुखता से उठाते हैं। उनके विचार युवाओं को उत्तराखंड की पारंपरिक धरोहर के संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक विकास के नए मार्ग तलाशने के लिए प्रेरित करते हैं। उनकी लेखनी भावनात्मक गहराई और सांस्कृतिक अंतर्दृष्टि से परिपूर्ण है। बिक्रम सिंह भंडारी के शब्द पाठकों को उत्तराखंड की दिव्य सुंदरता और सांस्कृतिक विरासत की अविस्मरणीय यात्रा पर ले जाते हैं, जिससे वे इस देवभूमि से आत्मिक जुड़ाव महसूस करते हैं।
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