Author: Bikram Singh Bhandari

बिक्रम सिंह भंडारी उत्तराखंड की लोक संस्कृति, पर्व, देव परंपराओं और इतिहास पर लिखने वाले स्वतंत्र लेखक हैं। वे वर्षों से उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर को प्रामाणिक स्रोतों, लोक कथाओं और ऐतिहासिक संदर्भों के माध्यम से डिजिटल रूप में दस्तावेज़ करने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने उत्तराखंड की संस्कृति, पर्व और लोक परंपराओं पर 700 से अधिक लेख लिखे हैं।

समूह ग के अंतर्गत तकनीकी पदों में भर्ती – उत्तराखंड में तकनीकी पदों का इन्तजार कर रहे लोगों के लिए अच्छी खबर है। उत्तराखंड अधीनस्थ चयन आयोग ने उत्तराखंड में समूह ग के अंतर्गत निकली तकनीकी संवर्ग पदों पर भर्ती निकाली है। उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा विभिन्न विभागों के समूह ‘ग’ के प्रारूपकार के रिक्त 140 पदों, टैक्नीशियन ग्रेड-2 (विद्युत) के रिक्त 21 पदों, टैक्नीशियन ग्रेड-2 (यांत्रिक) के रिक्त 09 पदों, नलकूप मिस्त्री के रिक्त 16 पदों, प्लम्बर के रिक्त 01 पद, मेंटिनेस सहायक के रिक्त 01 पद, इलैक्ट्रिशियन के रिक्त 01 पद, इस्ट्रूमेंट रिपेयर के रिक्त 03…

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उत्तराखंड की एक सुन्दर घाटी हर्षिल घाटी जो प्राकृतिक सुंदरता के मामले में विश्व प्रसिद्ध है। उतना ही प्रसिद्ध इस घाटी का इतिहास है। इस घाटी के राजमा और सेव के बारे में सबको पता है कि वे विश्व प्रसिद्ध हैं। लेकिन अधिकतर लोग हर्षिल घाटी को राजमा और सेव की सौगात देने वाले फेड्रिक विल्सन या हुलसन साहब के बारे में नहीं जानते हैं। फेड्रिक ई विल्सन को कोई राजा कहता है तो कोई डाकू और कोई ठेकेदार कहता है। कौन था हर्षिल का राजा फेड्रिक विल्सन – फेड्रिक ई विल्सन के बारे में कहते हैं कि वह ब्रिटिश…

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विभाण्डेश्वर महादेव मंदिर – उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में द्वाराहाट नगर को मंदिरों का नगर उत्तर की द्वारिका भी कहा जाता है। इसी मंदिरो के नगर में काशी विश्वनाथ के महत्त्व के बराबर महत्त्व रखने वाला महादेव का मंदिर है जिसे विभाण्डेश्वर महादेव कहा जाता है। जीर्णोद्वार की बाट जोहता कुमाऊं का पौराणिक मंदिर विभाण्डेश्वर महादेव: पौराणिक महत्व रखने वाला यह मंदिर आज दिन प्रतिदिन जीर्ण अवस्था में जा रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार संभवतः जब से इस मंदिर का निर्माण हुआ है तब से इसका जीर्णोद्धार नहीं हुवा है। वर्तमान देख रेख करता श्री गोपाल जोशी जी से…

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स्वाला गांव की वास्तविक कहानी : क्या आप जानते  हो उत्तराखंड में एक गांव ऐसा है जहाँ केवल भूत रहते हैं। और उस गांव को उत्तराखंड का भूतिया गांव या घोस्ट विलेज ऑफ़ उत्तराखंड के नाम से प्रसिद्ध है। अब आप बोलोगे आधुनिक ज़माने में कहाँ भूत -प्रेत होते हैं ? बात तो सही है आधुनिक टैक्नोलॉजी के दौर में भूत प्रेत की बात औचित्यहीन लगती है। लेकिन ! देवभूमि उत्तराखंड में सब संभव है। यहाँ जितना विश्वास देवों पर या दैवीय शक्तियों पर किया जाता है ,उतना ही विश्वास भूत प्रेतों के अस्तित्व पर भी किया जाता है। और…

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ब्रह्म कपाल बद्रीनाथ – मित्रों आजकल पितृपक्ष चल रहे हैं , लोग अपने पूर्वजों को तर्पण देते हैं। कई लोग अपने पितरों की मुक्ति के लिए घरों में तर्पण करते हैं और कई लोग बड़े बड़े तीर्थों जैसे गया ,हरिद्वार इत्यादि में पिंडदान करते हैं। पितरों के तर्पण के लिए गया तीर्थ को सबसे अच्छा तीर्थ माना गया है। ऐसा माना जाता है कि गया में पिंडदान करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। भारत में पितरों को समर्पित गया के अलावा एक और तीर्थ है , जिसका नाम है ब्रह्म कपाल। कहते हैं जिन पितरों को गया…

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खतड़वा त्यौहार उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में मनाया जाने वाला लोकपर्व है। यह वर्षाकाल की समाप्ति और शरद ऋतू की शुरुवात में मनाया जाने वाला लोक पर्व है। 2025 में खतड़वा त्यौहार (khatarua festival ) 17 सितम्बर 2025 को कन्या संक्रांति के दिन मनाया जायेगा। विडियो यहां देखो :  https://youtu.be/IwH5B9IEY8w प्रस्तावना – उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों के लोकोत्सव अधिकतर संक्रांति को मनाये जाते हैं। इसका कारण यह है कि पहाड़ों में सौर पंचांग का प्रयोग किया जाता है। और उत्तराखंड के सभी लोक पर्व प्रकृति को समर्पित और उच्च स्वास्थ को समर्पित तथा बच्चों को समर्पित होते हैं। खतड़वा त्यौहार…

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घणेली जागर : उत्तराखंड देवभूमि के रूप मान्य है। यहाँ देवी देवताओ की पूजा के साथ ,भूत प्रेतों और अदृश्य सकारात्मक और नकारात्मक शक्तियों की पूजा भी होती है। यहाँ दैवीय शक्तियों या अदृश्य शक्तियों के पूजन के लिए अलग -अलग विधियाँ अपनाई जाती हैं। इन्ही अलग अलग पूजा विधियों में एक है जागर विधि। जागर विधि का अर्थ है जगाना। इसमें लोकवाद्यों का प्रयोग करके देवता विशेष को मानव शरीर में अवतरण कराया जाता है। उनसे समस्याओं का समधान के साथ साथ आशीर्वाद लेते हैं। इसकी विस्तृत जानकारी हमने इस पोस्ट के अंत में दी है। आज इस पोस्ट…

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कोट भ्रामरी मंदिर जहाँ दो देवियों की एक साथ पूजा होती है – कोट भ्रामरी मंदिर उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल के बागेश्वर जिले में अल्मोड़ा -बागेश्वर राजमार्ग पर स्थित है। कत्यूरी शासकों द्वारा स्थापित प्रसिद्ध बैजनाथ मंदिर से 03 किलोमीटर दूर 975 मीटर की ऊंचाई पर एक छोटी पहाड़ी पर पुराने दुर्ग के अन्दर स्थित एक मंदिर है। कोट की माई अथवा भ्रामरी देवी के नाम से ज्ञात यह मंदिर मल्ला कत्यूर में कत्यूरियों के प्रशासनिक केन्द्र तैलीहाट में छोटे से पुरातन दुर्ग की दीवारों के अन्दर स्लेटों से आच्छादित देवी का मंदिर है। यहां पर कत्यूरियों की कुलदेवी भ्रामरी…

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दुबड़ी उत्सव उत्तराखंड के जौनपुर टिहरी मसूरी क्षेत्र का प्रसिद्ध लोक उत्सव या लोकपर्व है। यह इस क्षेत्र का बड़ा त्यौहार माना जाता है। जैसे कुमाऊं क्षेत्र में लाग हरयाव .. लाग बग्वाली…. करके उस क्षेत्र के बड़े उत्सव माने जाते हैं उसी प्रकार दुबड़ी जौनपुर-रवाई  क्षेत्र का बड़ा उत्सव माना जाता है। इस त्यौहार के लिए कहा जाता है – ” पैल आये दुबड़ी त्यार , फिर आये पितरू श्राद्ध , तब आये अशूज अष्टमी ,तब आये माल दिवाली ,तब आये मंगसीर दिवाली ” जन्माष्टमी के दसवें दिन मनाया जाता है दुबड़ी उत्सव – अनंत समृद्धि सूचक दूर्वा से…

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जौनसार के लोकदेवता महासू देवता के देवालय हनोल में प्रतिवर्ष  भाद्रपद के शुक्ल पक्ष को हरतालिका तीज पर विशाल जागड़ा पर्व मनाया जाता है। जौनसार बावर, रंवाई-जौनपुर, हिमाचल के जुब्बल-कोटखाई, नेरवा-चौपाल, और अन्य राज्यों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु  इस विशाल  जागड़ा मेला का आनंद लेने और देवदर्शन के लिए आते हैं। 2024 में जागड़ा मेला 6 सितम्बर और 07 सितंबर 2024  को मनाया जाएगा। क्या है जागड़ा मेला – जागड़ा का अर्थ होता है ,रात्रि जागरण। जांगड़ा उत्सव ,उत्तराखंड  गढ़वाल मंडल के देहरादून जिले में जौनसार बावर क्षेत्र के टौंस नदी के तट पर हनोल में स्थित लोकदेवता…

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