हल्द्वानी। उत्तराखंड की लोक परंपराओं और कलात्मक धरोहर को समर्पित ‘कुमाऊं द्वार महोत्सव’ में शिरकत करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पर्वतीय समाज की विशिष्ट पहचान और सांस्कृतिक जड़ों के संरक्षण पर विशेष बल दिया। हल्द्वानी को कुमाऊं की सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना का प्रमुख केंद्र बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जनसहभागिता यह स्पष्ट करती है कि प्रदेशवासी आधुनिकता के दौर में भी अपनी पारंपरिक पहचान को सहेजे हुए हैं।
महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री ने ‘वैदेही कल्चरल एजुकेशन एंड आर्ट फाउंडेशन’ के प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने रेखांकित किया कि छोलिया, झोड़ा, चांचरी, बरदा नाटी जैसी नृत्य शैलियों और ढोल-दमाऊ, रणसिंहा, तुर्री व भंकोरा जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों को डिजिटल माध्यमों से वैश्विक पहचान मिल रही है, जिससे नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से निरंतर जुड़ रही है।
नीतिगत निर्णय: सुशासन और पारदर्शिता पर जोर
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में राज्य सरकार के नीतिगत सुधारों का ब्योरा देते हुए कहा कि देवभूमि के मूल स्वरूप और युवाओं के हितों की रक्षा के लिए कई निर्णायक कदम उठाए गए हैं:
- भर्ती प्रक्रियाओं में शुचिता: नकल माफिया पर प्रभावी रोक लगाने के लिए लागू किए गए कड़े नकल विरोधी कानून से प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता आई है।
- सुरक्षा एवं सामाजिक संतुलन: समान नागरिक संहिता (UCC), धर्मांतरण रोधी प्रावधान, दंगारोधी व्यवस्था और सख्त भू-कानून जैसे कदम राज्य के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखकर उठाए गए हैं।
- सिद्धांत: मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रशासन के लिए राष्ट्रहित और जनहित हमेशा सत्ता या राजनीतिक नफे-नुकसान से ऊपर रहेंगे।
संवेदनशील मुद्दों पर मर्यादा और न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान
ऐतिहासिक और समसामयिक विषयों पर अपने विचार रखते हुए मुख्यमंत्री ने रामपुर तिराहा गोलीकांड के शहीदों और आंदोलनकारियों के बलिदान को नमन किया। उन्होंने कहा कि राज्य निर्माण की कुर्बानियों से जुड़े संवेदनशील विषयों पर सार्वजनिक टिप्पणियों में मर्यादा का पालन आवश्यक है। इसके साथ ही, उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के संदर्भ में बात करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा में समर्पित शख्सियतों को राजनीतिक बयानबाजी से दूर रखा जाना चाहिए।
अंकिता भंडारी प्रकरण पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि राज्य की बेटी को न्याय दिलाना व्यवस्था का सर्वोच्च दायित्व है। उन्होंने आह्वान किया कि संवेदनशील मामलों को राजनीतिक औजार बनाने के बजाय न्यायिक प्रक्रिया, साक्ष्यों और न्यायालय के फैसलों का सम्मान करते हुए तथ्यों के आधार पर बात होनी चाहिए।





