देहरादून: उत्तराखंड पुलिस की कार्यकुशलता और आधुनिक तकनीक के समन्वय ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमाई है। वर्ष 2025 की चारधाम यात्रा के दौरान यातायात और भीड़ प्रबंधन के लिए विकसित की गई “अभिनव ट्रैफिक एवं कंट्रोल रूम प्रबंधन प्रणाली” को भारत के प्रतिष्ठित ‘SKOCH Award’ के लिए चुना गया है।
शासन और विकास के क्षेत्र में देश के इस सबसे बड़े स्वतंत्र सम्मान के लिए उत्तराखंड पुलिस का चयन राज्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
स्मार्ट तकनीक से सुगम हुई श्रद्धा की राह
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में, 2025 की चारधाम यात्रा को सुरक्षित और सुचारु बनाने के लिए पुलिस ने तकनीकी नवाचारों पर विशेष जोर दिया था। इस पूरी परियोजना का नेतृत्व पुलिस अधीक्षक (यातायात) देहरादून, श्री लोकजीत सिंह द्वारा किया गया। उनके द्वारा प्रस्तुत नामांकन “चारधाम यात्रा 2025 : निर्बाध तीर्थ प्रबंधन हेतु अभिनव कंट्रोल रूम समाधान” को 106वें SKOCH समिट के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया है।
इस प्रणाली की मुख्य विशेषताएं:
- रियल-टाइम मॉनिटरिंग: यात्रा मार्गों की 24×7 डिजिटल निगरानी।
- इंटेलिजेंट रूट डायवर्जन: जाम की स्थिति को भांपकर स्वतः वैकल्पिक रास्तों का चयन।
- डिजिटल समन्वय: विभिन्न विभागों के बीच सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान।
- आपातकालीन प्रतिक्रिया: संकट की स्थिति में रिस्पांस टाइम को न्यूनतम करना।
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सफलता का प्रमाण: जाम मुक्त और सुरक्षित यात्रा
प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के कारण हिमालयी मार्गों पर यातायात प्रबंधन एक बड़ी चुनौती होती है। उत्तराखंड पुलिस द्वारा अपनाए गए इस नए तंत्र के कारण न केवल ट्रैफिक जाम में भारी कमी आई, बल्कि दुर्घटनाओं और आपात स्थितियों में भी पुलिस ने त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की। यह सम्मान उत्तराखंड पुलिस की तकनीकी दक्षता और पारदर्शी कार्यशैली पर मुहर लगाता है।
“यह पुरस्कार उत्तराखंड पुलिस की पूरी टीम की मेहनत और समर्पण का परिणाम है। तकनीक आधारित पुलिसिंग ही भविष्य की चुनौतियों का समाधान है।” — महानिदेशक, उत्तराखंड पुलिस
28 मार्च को दिल्ली में होगा सम्मान
यह प्रतिष्ठित पुरस्कार 28 मार्च 2026 को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले 106वें SKOCH समिट के दौरान प्रदान किया जाएगा। एसपी ट्रैफिक श्री लोकजीत सिंह और उनकी टीम को इस उपलब्धि पर शासन और विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बधाई दी है।
यह सम्मान न केवल उत्तराखंड पुलिस का मान बढ़ाएगा, बल्कि भविष्य में अन्य राज्यों के लिए भी धार्मिक पर्यटन और भीड़ प्रबंधन का एक बेहतरीन मॉडल पेश करेगा।
