Wednesday, April 2, 2025
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मन की बात का सौवा एपिसोड उत्तराखंड में यादगार और ऐतिहासिक रहा

उत्तराखंड के सभी जिलों में मोदीजी के मन की बात कार्यक्रम के 100 वें एपीसोड को को बड़े चाव के साथ सुना गया। भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने इस कार्यक्रम हेतु जमीनी स्तर से बहुत अच्छी मेहनत की थी जिसके फलस्वरूप लाखों की संख्या में लोगों ने उत्तराखंड में मन की बात कार्यक्रम को सुना। शिक्षा विभाग द्वारा पहली नोटिस जारी कर दिया गया था कि सभी विद्यार्थियों और शिक्षकों को इस कार्यक्रम का हिस्सा बनना है तथा भारतीय जनता पार्टी के बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं ने कड़ी लगन और मेहनत के साथ इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए हर संभव प्रयास किया।

मन की बात

उसी का परिणाम है कि पूरे प्रदेश में कार्यक्रम का 100 वा एपिसोड ऐतिहासिक व यादगार रहा। भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया के माध्यम से इसका खूब प्रचार भी किया और कार्यक्रम में आए हुए लोगों की फोटो फेसबुक इंस्टाग्राम में शेयर कर खुशी जाहिर की। मोदी जी ने अपने कार्यक्रम के सभी एपिसोड में अभी तक के सभी एपिसोड ओं के यादगार पलों को साझा करते हुए पिछले 8 सालों में उनके द्वारा देश हित में किए गए कार्यों का भी जिक्र किया साथ ही मोदी जी ने देश की जनता का आभार व्यक्त किया कि उन्होंने इस कार्यक्रम को सफल बनाने में मोदी जी का साथ दिया।

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विपक्ष के लोगों ने कार्यक्रम को लेकर तंज कस रहें हैं  कि ,यह कहा किया कार्यक्रम मोदी जी और भाजपा के लिए अपने मुंह मियां मिट्ठू होना जैसा है, कई लोगों ने सोशल मीडिया में इस कार्यक्रम का मजाक भी बना है।  लेकिन कार्यक्रम की सफलता प्रधानमंत्री मोदी जी के प्रति लोगों के विश्वास का प्रमाण है।

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Bikram Singh Bhandari
Bikram Singh Bhandarihttps://devbhoomidarshan.in/
बिक्रम सिंह भंडारी, देवभूमि दर्शन के संस्थापक और प्रमुख लेखक हैं। उत्तराखंड की पावन भूमि से गहराई से जुड़े बिक्रम की लेखनी में इस क्षेत्र की समृद्ध संस्कृति, ऐतिहासिक धरोहर, और प्राकृतिक सौंदर्य की झलक स्पष्ट दिखाई देती है। उनकी रचनाएँ उत्तराखंड के खूबसूरत पर्यटन स्थलों और प्राचीन मंदिरों का सजीव चित्रण करती हैं, जिससे पाठक इस भूमि की आध्यात्मिक और ऐतिहासिक विरासत से परिचित होते हैं। साथ ही, वे उत्तराखंड की अद्भुत लोककथाओं और धार्मिक मान्यताओं को संरक्षित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। बिक्रम का लेखन केवल सांस्कृतिक विरासत तक सीमित नहीं है, बल्कि वे स्वरोजगार और स्थानीय विकास जैसे विषयों को भी प्रमुखता से उठाते हैं। उनके विचार युवाओं को उत्तराखंड की पारंपरिक धरोहर के संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक विकास के नए मार्ग तलाशने के लिए प्रेरित करते हैं। उनकी लेखनी भावनात्मक गहराई और सांस्कृतिक अंतर्दृष्टि से परिपूर्ण है। बिक्रम सिंह भंडारी के शब्द पाठकों को उत्तराखंड की दिव्य सुंदरता और सांस्कृतिक विरासत की अविस्मरणीय यात्रा पर ले जाते हैं, जिससे वे इस देवभूमि से आत्मिक जुड़ाव महसूस करते हैं।
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