जोगी आयो शहर में व्योपारी (Jogi Aayo Shahar Mein Vyapari Lyrics)-कुमाऊँ अंचल का एक लोकप्रिय कुमाऊनी होली गीत है, जो बैठकी होली और खड़ी होली दोनों में गाया जाता है। इस गीत में एक जोगी (योगी/साधु) के रूप में आए व्यापारी का चंचल संवाद दिखाया गया है, जो नथ-वाली (पारंपरिक आभूषण पहने महिला) से हास्यपूर्ण अंदाज़ में भोजन, पानी और विश्राम की मांग करता है।यह गीत पारंपरिक कुमाऊनी लोक-संस्कृति की झलक देता है, जहाँ श्रृंगार, भक्ति और हास्य का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
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Jogi Aayo Shahar Mein Vyapari Lyrics (कुमाऊनी होली गीत 2026)
जोगी आयो शहर में व्योपारी – २
अहा, इस व्योपारी को भूख बहुत है,
पुरिया पकै दे नथ-वाली,
जोगी आयो शहर में व्योपारी।
अहा, इस व्योपारी को प्यास बहुत है,
पनिया पिला दे नथ-वाली,
जोगी आयो शहर में व्योपारी।
अहा, इस व्योपारी को नींद बहुत है,
पलंग बिछाये नथ-वाली,
जोगी आयो शहर में व्योपारी – २
गीत का भावार्थ (Meaning of Jogi Aayo Shahar Mein Vyapari) –
यह गीत केवल शब्दों का मेल नहीं, बल्कि कुमाऊँ की लोक परंपरा का जीवंत चित्र है।
- जोगी (व्योपारी) – यहाँ जोगी एक प्रतीक है, जो भेष बदलकर आता है।
- नथ-वाली – कुमाऊनी संस्कृति में विवाहित स्त्री का प्रतीक।
भूख, प्यास, नींद – मानवीय आवश्यकताओं के माध्यम से प्रेमपूर्ण और चुलबुला संवाद।
गीत में हास्य और श्रृंगार रस का सुंदर मिश्रण है। बैठकी होली में इसे शास्त्रीय रागों की छाया में गाया जाता है, जबकि खड़ी होली में ढोल-दमाऊ के साथ उत्साहपूर्ण अंदाज़ में प्रस्तुत किया जाता है।
कुमाऊनी होली में इस गीत का महत्व –
कुमाऊँ की होली पूरे उत्तराखंड में प्रसिद्ध है। यहाँ होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि संगीत और लोकजीवन का उत्सव है।
- बैठकी होली – शास्त्रीय रागों पर आधारित।
- खड़ी होली – गाँव की चौपाल में गोल घेरा बनाकर गाई जाती है।
“जोगी आयो शहर में व्यापारी” गीत अक्सर होली की महफिलों में हँसी और चुटीले अंदाज़ के लिए गाया जाता है।
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