Author: Bikram Singh Bhandari

बिक्रम सिंह भंडारी उत्तराखंड की लोक संस्कृति, पर्व, देव परंपराओं और इतिहास पर लिखने वाले स्वतंत्र लेखक हैं। वे वर्षों से उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर को प्रामाणिक स्रोतों, लोक कथाओं और ऐतिहासिक संदर्भों के माध्यम से डिजिटल रूप में दस्तावेज़ करने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने उत्तराखंड की संस्कृति, पर्व और लोक परंपराओं पर 700 से अधिक लेख लिखे हैं।

कुमाऊनी होली 2026 तिथि – मुख्य तिथि: 27 फरवरी 2026 (रंग एकादशी) से होली छलड़ी 04 और दंपत्ति टीका 05 मार्च तक  इसी दिन चीर बंधन होगा और कुमाऊं में खड़ी होली की शुरुआत मानी जाएगी। यदि कुमाऊनी होली के बारे में वीडियो में देखना चाहते हैं तो वीडियो यह दिया है । https://youtu.be/iN2Jb8y6swQ वैसे तो कुमाऊनी बैठकी होली की शुरुआत हर वर्ष पौष माह के प्रथम रविवार से हो जाती है, लेकिन वर्ष 2026 में कुमाऊँ की मुख्य रंग होली का शुभारंभ 27 फरवरी 2026 (रंग एकादशी) से होगा और यह पर्व 04–05 मार्च 2026 (दंपत्ति टीका) तक लगातार…

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फूलदेई त्यौहार 2026 ( Phooldei Festival 2026) इस वर्ष 15 मार्च 2026 को मनाया जाएगा। यह जानकारी पहाड़ के पुरोहितों की परामर्श पर आधारित है ।इसलिए सटीक है । यह उत्तराखंड का एक अत्यंत सुंदर, भावनात्मक और प्रकृति-आधारित लोक पर्व है, जिसे मुख्यतः छोटे–छोटे बच्चे मनाते हैं। इसी कारण इसे लोक बाल पर्व भी कहा जाता है। फूलदेई केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति आभार, नववर्ष का स्वागत और सामूहिक मंगलकामना की जीवंत परंपरा है। पहाड़ों की संस्कृति में जहाँ हर मौसम का अपना उत्सव है, वहीं फूलदेई बसंत ऋतु के आगमन का मधुर संदेश लेकर आता है।…

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डिजिटल दौर में जब ज़्यादातर युवा कॉर्पोरेट दुनिया में अपनी जगह बनाने में जुटे हैं, वहीं आशीष नेगी ने एक अलग राह चुनी,जनता की आवाज़ बनने की। आज वे केवल एक राजनीतिक कार्यकर्ता नहीं, बल्कि उत्तराखंड के युवाओं के लिए उम्मीद का प्रतीक बनते जा रहे हैं। कई लोग तुलना कर रहे हैं कि जैसे 2014 में नरेंद्र मोदी के चेहरे पर भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आई थी, वैसे ही 2027 में आशीष नेगी के युवा नेतृत्व से उत्तराखंड क्रांति दल राज्य की राजनीति में बड़ा उलटफेर कर सकता है। इसमें कितनी सच्चाई है,यह तो समय बताएगा, लेकिन सोशल…

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Meri nath gad de (Kumauni Holi )  – कुमाऊनी होली भारत की सबसे प्रसिद्ध होलियों में से एक होली है। कहते हैं मथुरा ,वृन्दावन की होली के बाद उत्तराखंड की कुमाऊनी होली सबसे प्रसिद्ध और सबसे अनोखी होली है। कुमाऊनी होली कुमाऊँ (उत्तराखंड) की एक जीवंत सांस्कृतिक विरासत है, जिसमें रंगों से अधिक राग, ताल और सामूहिक भावनाओं का उत्सव दिखाई देता है। देखिए ये कुमाऊनी होली के इतिहास पर आधारित ट्रेंडिंग वीडियो। https://youtu.be/iN2Jb8y6swQ फाल्गुन शुक्ल एकादशी से दंपती टीका तक चलने वाली इस परंपरा में खड़ी होली और बैठकी होली दोनों रूप प्रचलित हैं, खासकर काली कुमाऊँ के चम्पावत…

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देहरादून का बालाजी धाम : भारत के कई हिस्सों में भगवान हनुमान को संकट मोचन के रूप में पूजा जाता है। विशेष रूप से उत्तर भारत में हनुमान जी को बालाजी के नाम से जाना जाता है। राजस्थान के दौसा जिले की सिकराय तहसील में स्थित मेहंदीपुर बालाजी धाम देश ही नहीं, बल्कि विदेशों तक अपनी मान्यता और चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध है। यहां दर्शन करने के लिए हर वर्ष लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। देहरादून के बालाजी मंदिर के बारे में वीडियो देखें – https://youtu.be/rOtBYdkAe2w?si=RXIlL47G_7dJji03 इसी परंपरा और आस्था को आगे बढ़ाते हुए उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में भी एक…

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उत्तराखंड में बसंत पंचमी ( Basant Panchami in Uttarakhand )  – वर्ष 2026 में समस्त भारतवर्ष में बसंत पंचमी का त्यौहार 23 जनवरी 2026 को मनाया जा रहा है हैं। इस त्यौहार को माँ सरस्वती के जन्मदिन के रूप मनाया जाता है। और माँ सरस्वती की पूजा अर्चना की जाती है। इस दिन से बसंत ऋतू की शुरुवात होती है। बसंत पंचमी के त्यौहार को श्रीपंचमी और माघ पंचमी के नाम से भी मनाया जाता है। इस दिन बिना मुहूर्त के शुभ काम किये जाते हैं। पीले वस्त्र धारण करके माँ सरस्वती की  पूजा अर्चना की जाती है। समस्त भारतवर्ष…

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अगस्त्य मुनि (Agastmuni) : उत्तराखंड के केदारखण्ड का यह पवित्र तीर्थस्थल गढ़वाल मण्डल के रुद्रप्रयाग जनपद में इसकी तहसील इकाई मुख्यालय से 18 कि.मी. आगे मन्दाकिनी के तट पर प्रकृति के मनोरम अंक में स्थित है।उत्तराखंड के प्राचीन धार्मिक भूगोल से गहराई से जुड़ा हुआ है। केदारखण्ड (197:8,10 में कहा गया है– मन्दाकिन्या पूर्वतीरे कुम्भजन्माश्रयः प्रियः। अगस्त्येश्वरो तत्र महादेवस्त्रणासित भवमोचकः॥ इस श्लोक के अनुसार मन्दाकिनी नदी के पूर्वी तट पर स्थित यह स्थल कुम्भजन्मा अगस्त्य मुनि (Agastmuni) का प्रिय आश्रय है, जहाँ अगस्त्येश्वर महादेव भवबंधन से मुक्ति प्रदान करने वाले माने जाते हैं।  तपस्थली का भौगोलिक व आध्यात्मिक स्वरूप -…

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Uttarayani mela : उत्तराखंड की संस्कृति का असली रूप रंग यहाँ के मेलों में समाहित है। उत्तराखंड के मेलों में ही यहाँ की संस्कृति का रूप निखरता है। हिन्दुओं के पवित्र माह माघ में मनाये जाने वाले महापर्व मकर संक्रांति को उत्तराखंड में खिचड़ी संग्रात ,घुघुतिया त्यौहार आदि नाम से मनाया जाता है। इस अवसर पर जहाँ गढ़वाल में माघ मेला उत्तरकाशी और गिंदी मेला का आयोजन होता है , वही कुमाऊं में सुप्रसिद्ध  ऐतिहासिक मेला उत्तरायणी मेला (uttarayani mela) का आयोजन होता है। इसे स्थानीय भाषा में उत्तरायणी कौतिक भी कहते हैं। कुमाऊं की स्थानीय भाषा में  मेले को…

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Ghughutiya Festival 2026 : मानव अधिकार, संस्कृति और प्रकृति का उत्सव – घुघुतिया पर्व केवल एक पारंपरिक लोक-त्योहार नहीं है, बल्कि यह मानव अधिकार (Human Rights),सांस्कृतिक स्वतंत्रता, प्रकृति से सह-अस्तित्व और भावनात्मक समानता का भी प्रतीक है। उत्तराखंड के कुमाऊँ अंचल में मनाया जाने वाला यह पर्व बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और प्रकृति – सभी को समान सम्मान देने की सीख देता है। आज जब दुनिया मानव अधिकारों, सांस्कृतिक पहचान और लोक परंपराओं के संरक्षण की बात कर रही है, तब Ghughutiya Festival 2026 हमें अपनी जड़ों से जुड़ने और लोक-संस्कृति को आगे बढ़ाने का संदेश देता है। आखिर क्यों मनाते…

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उत्तराखंड में हर पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन, प्रकृति और लोकसंस्कृति से गहराई से जुड़ा उत्सव होता है। यहां मनाए जाने वाले पर्व-त्योहार न केवल ऋतु परिवर्तन के संकेतक हैं, बल्कि पीढ़ियों से चले आ रहे संस्कारों और सामाजिक एकता के प्रतीक भी हैं। उत्तराखंड में मकर संक्रांति 2026 भी ऐसा ही एक महत्त्वपूर्ण पर्व है, जिसे राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग नामों और परंपराओं के साथ बड़े उल्लास से मनाया जाता है। मकर संक्रांति का खगोलीय और धार्मिक महत्व – पौष मास के समाप्त होने और माघ मास की संक्रांति के दिन भगवान सूर्य धनु…

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