देहरादून: भारत निर्वाचन आयोग देश भर के 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आगामी अप्रैल 2026 से विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) कार्यक्रम शुरू करने की तैयारी में है। इस संबंध में आयोग ने सभी संबंधित राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) को पत्र भेजकर प्रशासनिक तैयारियों को पुख्ता करने के संकेत दिए हैं।
उत्तराखंड में भी इस अभियान को लेकर हलचल तेज हो गई है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों (DM) के साथ समीक्षा बैठक की और धरातल पर चल रही तैयारियों का जायजा लिया।
इन तीन जिलों में सुस्त रफ्तार पर नाराजगी
बैठक के दौरान मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने पाया कि राज्य के कुछ जिलों में मतदाताओं की मैपिंग का कार्य संतोषजनक नहीं है। विशेष रूप से तीन जिलों की प्रगति पर उन्होंने चिंता व्यक्त की:
- देहरादून
- ऊधमसिंह नगर
- नैनीताल
अधिकारी ने स्पष्ट किया कि इन जिलों में मतदाताओं की मैपिंग की प्रगति निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप काफी कम है। उन्होंने इस सुस्ती पर कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई।
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लापरवाही पर तय होगी जवाबदेही
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने तीनों जिलों के जिलाधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि:
- जिन बूथों पर मैपिंग का प्रतिशत कम है, वहां के निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) और जिम्मेदार कार्मिकों की तत्काल जवाबदेही तय की जाए।
- प्रशासनिक स्तर पर आ रही बाधाओं को दूर कर जल्द से जल्द मैपिंग का कार्य पूरा किया जाए।
- अप्रैल में प्रस्तावित एसआईआर कार्यक्रम से पहले सभी तैयारियां मानक के अनुसार पूरी होनी चाहिए।
क्या है एसआईआर (SIR) कार्यक्रम?
विशेष गहन पुनरीक्षण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके तहत मतदाता सूचियों को पूरी तरह शुद्ध और अपडेट किया जाता है। इसमें नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाने और मौजूदा डेटा में सुधार का कार्य बड़े स्तर पर किया जाता है। 2026 में होने वाले इस कार्यक्रम को भविष्य के चुनावों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
निर्वाचन आयोग का लक्ष्य है कि कोई भी पात्र मतदाता पंजीकरण से न छूटे और मतदाता सूची में किसी भी प्रकार की त्रुटि न रहे।
