देहरादून। प्रदेश के सरकारी और अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों में आगामी 7 अप्रैल का दिन बेहद खास होने वाला है। शिक्षा विभाग इस दिन को ‘प्रवेश उत्सव’ के रूप में मनाने जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य शिक्षा से वंचित हर बच्चे को स्कूल की चौखट तक लाना और नए छात्र-छात्राओं का उत्साहवर्धन करना है।
शिक्षा महानिदेशक दीप्ति सिंह ने इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि इस कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए ब्लॉक स्तर पर प्रभारियों की नियुक्ति की गई है, जो पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेंगे।
स्वागत के साथ होगा नामांकन
उत्सव के दौरान स्कूल पहुँचने वाले नव-प्रवेशी छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों का विद्यालय परिवार द्वारा भव्य स्वागत किया जाएगा। इस अभियान के तहत उन बच्चों को चिन्हित कर उनका नामांकन सुनिश्चित किया जाएगा, जो किन्हीं कारणों से अभी तक शिक्षा की मुख्यधारा से नहीं जुड़ पाए हैं।
बालवाटिका पर विशेष ध्यान
शिक्षा महानिदेशक ने सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों (CEO) को निर्देश दिए हैं कि:
- 3 वर्ष की आयु पूरी कर चुके बच्चों का ‘बालवाटिका-1’ में प्रवेश सुनिश्चित किया जाए।
- इसके लिए शिक्षक स्वयं आमंत्रण पत्र तैयार करेंगे।
- नजदीकी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से समन्वय स्थापित कर शत-प्रतिशत नामांकन का लक्ष्य रखा गया है।
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प्रतिभाओं का होगा सम्मान
प्रवेश उत्सव केवल नामांकन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह उपलब्धियों को सराहने का मंच भी बनेगा। महानिदेशक ने निर्देश दिए हैं कि इस अवसर पर आयोजित होने वाले अभिभावक-शिक्षक सम्मेलन में निम्नलिखित को सम्मानित किया जाएगा:
- बेहतरीन परीक्षा परिणाम देने वाले कक्षाध्यापक एवं विषयाध्यापक।
- कक्षा में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले मेधावी छात्र।
- खेलकूद एवं अन्य पाठ्येतर गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थी।
“प्रवेश उत्सव का लक्ष्य न केवल नामांकन बढ़ाना है, बल्कि समुदाय और स्कूल के बीच एक मजबूत जुड़ाव पैदा करना है।”
— दीप्ति सिंह, शिक्षा महानिदेशक
इस पहल से न केवल प्राथमिक शिक्षा के ढांचे को मजबूती मिलेगी, बल्कि सरकारी स्कूलों के प्रति अभिभावकों का भरोसा भी बढ़ेगा।
