Wednesday, April 2, 2025
Homeसंस्कृतिफूलदेई के गीत | मंगलकामनाओं से भरे फूलदेई के गढ़वाली और कुमाऊनी...

फूलदेई के गीत | मंगलकामनाओं से भरे फूलदेई के गढ़वाली और कुमाऊनी गीत

फूलदेई के गीत – फूलदेई उत्तराखंड का प्रसिद्ध लोक पर्व है। प्रकृति को समर्पित इस प्रसिद्ध त्योहार के दिन छोटे छोटे बच्चे अपने थालियों में या झोले में फूल रख कर ,सबकी देहरी पर “फूलदेई छम्मा देई ” फुलदेई के गीत गाते हैं। लोगो को शुभ आशीष देते है।यह त्यौहार चैत्र संक्रांति के दिन मनाया जाता है। इसी दिन से हिंदू नववर्ष शुरू होता है। प्रस्तुत लेख में फूलदेई के गीत और पारंपरिक कविताएं व फूलदेई की शुभकामनायें फोटो , का संकलन किया है।

फूलदेई के गढ़वाली और कुमाऊनी गीत

फूलदेई के गीत कुमाउनी भाषा में –

उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में बच्चे फूल देई के दिन लोगो की देहरी पर फूल डाल कर आशीष गीत गाते हैं। जो इस प्रकार है। इस गीत के माध्यम से बच्चे घर की देहरी पर फूल डाल कर प्रणाम करते हैं। और घर की खुशहाली और सुख सम्रद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं।

Hosting sale

फूलदेई छम्मा देई ।
फूल देई छम्मा देई ।
दैणी ,द्वार भर भकार।
यो देलि कु नमस्कार ।
जतुके दियाला ,उतुके सई ।।

फूलदेई के गीत गढ़वाली भाषा में  :-

Best Taxi Services in haldwani

गढ़वाल क्षेत्र में छोटे – छोटे बच्चे , परिवार के लिए शुभता की प्रार्थना करते हुए गाते हैं –

ओ फुलारी घौर।
जै माता का भौंर ।।
क्यौलिदिदी फुलकंडी गौर ।
डंडी बिराली छौ निकोर।।
चला छौरो फुल्लू को।
खांतड़ि मुतड़ी चुल्लू को।।
हम छौरो की द्वार पटेली।
तुम घौरों की जिब कटेली।।

चला फुलारी फूलों को ,एक लोकप्रिय गढ़वाली गीत |

गढ़वाली लोक गायक श्री नरेन्द्र सिंह नेगी जी का एक प्रसिद्ध गीत है,चला फुलारी फूलों को । इस गीत पांडवास की टीम ने एक नए रुप में पेश किया था। जिसे लोगों ने काफी सराहा।

चला फुलारी फूलों को
सौदा-सौदा फूल बिरौला।
हे जी सार्यूं मा फूलीगे ह्वोलि फ्योंली लयड़ी
मैं घौर छोड्यावा ।
हे जी घर बौण बौड़ीगे ह्वोलु बालो बसंत
मैं घौर छोड्यावा ।।
हे जी सार्यूं मा फूलीगे ह्वोलि
चला फुलारी फूलों को
सौदा-सौदा फूल बिरौला
भौंरों का जूठा फूल ना तोड्यां ।

म्वारर्यूं का जूठा फूल ना लायाँ।
ना उनु धरम्यालु आगास
ना उनि मयालू यखै धरती
अजाण औंखा छिन पैंडा
मनखी अणमील चौतर्फी
छि भै ये निरभै परदेस मा तुम रौणा त रा
मैं घौर छोड्यावा ।।
हे जी सार्यूं मा फूलीगे ह्वोलि
फुल फुलदेई दाल चौंल दे
घोघा देवा फ्योंल्या फूल
घोघा फूलदेई की डोली सजली।।
गुड़ परसाद दै दूध भत्यूल
अयूं होलू फुलार हमारा सैंत्यां आर चोलों मा ।
होला चैती पसरू मांगना औजी खोला खोलो मा ।।
ढक्यां मोर द्वार देखिकी फुलारी खौल्यां होला।

फुलदेई के गीत
फुलदेई की शुभकामनाएं

फूलदेई उत्तराखंड का लोक पर्व के बारे में विस्तार से जानने के लिए यहां क्लिक करें।
फूलदेई त्यौहार की कहानी जानने के लिए यहां क्लिक करें ।

देवभूमि दर्शन के व्हाट्सअप ग्रुप में जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

Follow us on Google News Follow us on WhatsApp Channel
Bikram Singh Bhandari
Bikram Singh Bhandarihttps://devbhoomidarshan.in/
बिक्रम सिंह भंडारी, देवभूमि दर्शन के संस्थापक और प्रमुख लेखक हैं। उत्तराखंड की पावन भूमि से गहराई से जुड़े बिक्रम की लेखनी में इस क्षेत्र की समृद्ध संस्कृति, ऐतिहासिक धरोहर, और प्राकृतिक सौंदर्य की झलक स्पष्ट दिखाई देती है। उनकी रचनाएँ उत्तराखंड के खूबसूरत पर्यटन स्थलों और प्राचीन मंदिरों का सजीव चित्रण करती हैं, जिससे पाठक इस भूमि की आध्यात्मिक और ऐतिहासिक विरासत से परिचित होते हैं। साथ ही, वे उत्तराखंड की अद्भुत लोककथाओं और धार्मिक मान्यताओं को संरक्षित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। बिक्रम का लेखन केवल सांस्कृतिक विरासत तक सीमित नहीं है, बल्कि वे स्वरोजगार और स्थानीय विकास जैसे विषयों को भी प्रमुखता से उठाते हैं। उनके विचार युवाओं को उत्तराखंड की पारंपरिक धरोहर के संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक विकास के नए मार्ग तलाशने के लिए प्रेरित करते हैं। उनकी लेखनी भावनात्मक गहराई और सांस्कृतिक अंतर्दृष्टि से परिपूर्ण है। बिक्रम सिंह भंडारी के शब्द पाठकों को उत्तराखंड की दिव्य सुंदरता और सांस्कृतिक विरासत की अविस्मरणीय यात्रा पर ले जाते हैं, जिससे वे इस देवभूमि से आत्मिक जुड़ाव महसूस करते हैं।
RELATED ARTICLES
spot_img
Amazon

Most Popular

Recent Comments