देहरादून। डिजिटल दुनिया की बढ़ती चुनौतियों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के युग में सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए, राज्य सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) उत्तराखण्ड ने विद्यालयी शिक्षा निदेशालय के सहयोग से मंगलवार को विभिन्न राजकीय विद्यालयों में “सेफर इंटरनेट डे- 2026” का आयोजन किया। इस कार्यक्रम के माध्यम से छात्रों, शिक्षकों और समाज को ऑनलाइन फ्रॉड, डीपफेक और AI के बढ़ते दुरुपयोग के प्रति जागरूक किया गया।
‘स्मार्ट तकनीक, सुरक्षित विकल्प’ पर केंद्रित रहा अभियान
भारत सरकार द्वारा हर वर्ष फरवरी माह के दूसरे मंगलवार को मनाए जाने वाले इस अंतरराष्ट्रीय अभियान की इस वर्ष की थीम “स्मार्ट तकनीक, सुरक्षित विकल्प, AI के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग” रही। इस अवसर पर देहरादून के रा.बा.इं.का. राजपुर रोड और रा.इं.का. रायपुर में लगभग 200 छात्र प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित रहे, जबकि वर्चुअल माध्यम से 1100 से अधिक स्कूलों के लगभग 30,000 विद्यार्थियों ने इस जागरूकता अभियान में प्रतिभाग किया।
AI और साइबर सुरक्षा के महत्वपूर्ण सुझाव
कार्यशाला के दौरान एनआईसी के विशेषज्ञों और आधिकारिक पोस्टर के माध्यम से प्रतिभागियों को साइबर खतरों से बचने के लिए कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए गए:
- AIऔर डीपफेक से सतर्कता: डीपफेक वीडियो और क्लोन की गई आवाजें वास्तविक लग सकती हैं, इसलिए किसी भी भावनात्मक प्रतिक्रिया से पहले विश्वसनीय स्रोतों से इसकी पुष्टि करें। वीडियो में अप्राकृतिक चेहरे या होंठों का हिलना ए.आई. हेरफेर के संकेत हो सकते हैं।
- डेटा गोपनीयता और सोशल मीडिया: व्यक्तिगत जानकारी, तस्वीरें या अपनी लोकेशन सोशल मीडिया पर साझा करने से पहले सोचें। डीपीपी (DPDP) अधिनियम आपकी व्यक्तिगत डेटा की रक्षा करता है, इसे केवल आवश्यकता होने पर ही साझा करें।
- ऐप और डिवाइस सुरक्षा: अपने फोन में ऐप अनुमतियों (Permissions) की नियमित जांच करें और अनावश्यक एक्सेस को हटा दें।
- वित्तीय सुरक्षा: कॉल पर कभी भी अपनी संवेदनशील जानकारी जैसे OTP, आधार, पैन या बैंक विवरण साझा न करें। इसके साथ ही, उच्च लाभ का लालच देने वाले ऑनलाइन निवेश ऑफर से बचें।
- विशेषज्ञ सलाह: चिकित्सा, कानूनी या वित्तीय सलाह के लिए केवल ए.आई. पर निर्भर न रहें, वास्तविक विशेषज्ञों से परामर्श लें।
धोखाधड़ी होने पर यहाँ करें शिकायत
प्रतिभागियों को जानकारी दी गई कि यदि वे किसी साइबर अपराध या ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार होते हैं, तो वे तुरंत साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल https://cybercrime.gov.in या टोल फ्री नंबर 1930 पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
इनकी रही उपस्थिति
इस अवसर पर राज्य सूचना विज्ञान अधिकारी एवं उप महानिदेशक श्री ए. के. दधीचि अपनी विशेषज्ञ टीम (श्री राजीव जोशी, श्री हिमांशु कुमार, सुश्री पुष्पांजलि, श्री कैलाश किमोठी, श्री रोहित चंद्रा, श्री शक्ति रतूड़ी, सुश्री कनुप्रिय गाबा, सुश्री रचना एवं सौरभ रतूड़ी) के साथ उपस्थित रहे और छात्रों के साइबर सुरक्षा से जुड़े विभिन्न सवालों के जवाब दिए।

