Monday, March 4, 2024
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इतिहास में पहली बार गढ़वाल और कुमाऊं के दिग्गज गायकों ने एक साथ गाया ,”बेडु पाको बारोमासा “

उत्तराखंड के इतिहास में पहली बार एक ऐसा गीत रिलीज हुवा है जिसे , उत्तराखंड के लगभग सभी प्रसिद्ध गायकों ने आवाज दी है। चांदनी इंटरप्राइजेज के यूट्यूब चैनल से बेडु पाको गीत का नया वर्ज़न उत्तराखंड स्थापना दिवस के शुभावसर पर देहरादून से रिलीज हुवा है। इस गीत की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ,इतिहास में पहली बार कुमाऊं ,गढ़वाल , और जौनसार के सभी  दिग्गज लोकगायकों एक साथ एक गीत में अपनी आवाज दी है।

उत्तराखंड के इन मोतियों को एक माला में पिरोने का काम किया है ,चांदनी इंटरप्राइजेज के नवीन टोलिया जी ने। उत्तराखंड के अघोषित राज्य गीत बेडु पाको बरोमासा को एक नया रूप मिला है। कुमाऊं से लेकर गढ़वाल और जौनसार के प्रसिद्ध गायको के मधुर आवाज और  RJ काव्या जी का वॉइस ओवर , संजय मिश्रा और हेमंत पांडे जी का गैस्ट अपीरियंस नेगी जी ,प्रीतम भरतवाण ,और नैननाथ रावल व् फौजी ललित मोहन जोश जी का खास अंदाज इस गीत को एक अलग स्तर प्रदान करता है।

इस गीत में कुमाऊं गढ़वाल के पुराने दिग्गज गायको के साथ नई पीढ़ी के युवा गायकों ने भी अपनी आवाज दी है। महिला गायको में मीना राणा ,कल्पना चौहान ,हेमा ध्यानी तथा रेशमा शाह ने अपनी मधुर आवाज इस गीत को दी है। इस ऐतिहासिक गीत के लिए संगीत की व्यवस्था की है ,प्रसिद्ध संगीतज्ञ रणजीत सिंह ने। और बेडु पाको की पारम्परिक अंतरों के अलावा इसमें कुछ अन्तरे बढ़ाएं गए हैं ,जिन्हे हेमंत बिष्ट जी के सहयोग से जोड़ा गया है।

बेडु पाको गीत का नया रूप यहाँ देखें –

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उत्तराखंड की एकता का परिचय देता यह ऐतिहासिक गीत सुनने में कर्णप्रिय और देखने में मनमोहक लगता है।

जैसा कि हमे पता है ,बेडुपाको बरोमासा गीत ,उत्तराखंड की ख़ास पहचान है। यह उत्तराखंड का एक प्रकार से अघोषित राज्य गीत है। या इसे उत्तराखंड का हस्ताक्षर गीत है। इस गीत के रचियेता स्व विजेंद्र लाल शाह और स्व मोहन उप्रेती जी हैं। इस गीत को सर्वप्रथम 1952 में राजकीय इंटरकालेज नैनीताल के मंच पर गाया था।

चांदनी इंटरप्राइजेज के अन्य गीत देखने के लिए यहाँ क्लिक करें

इन्हे भी देखें –

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‘ गढ़ कन्या ‘ उत्तराखंड गढ़वाल की एक वीरांगना नारी की वीर गाथा।

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Bikram Singh Bhandari
Bikram Singh Bhandarihttps://devbhoomidarshan.in/
बिक्रम सिंह भंडारी देवभूमि दर्शन के संस्थापक और लेखक हैं। बिक्रम सिंह भंडारी उत्तराखंड के निवासी है । इनको उत्तराखंड की कला संस्कृति, भाषा,पर्यटन स्थल ,मंदिरों और लोककथाओं एवं स्वरोजगार के बारे में लिखना पसंद है।
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