देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में आज उत्तराखंड सरकार और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल (ITBP) के बीच एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता ‘वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम’ के तहत किया गया है, जिसका उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों का विकास और स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना है।
क्या है यह समझौता?
उत्तराखंड औद्यानिक परिषद और ITBP के बीच हुए इस समझौते के तहत राज्य में तैनात ITBP की बटालियनों को अब स्थानीय स्तर पर उगाए गए ताजे फल और सब्जियों की आपूर्ति की जाएगी।
- जवानों को लाभ: दुर्गम क्षेत्रों में तैनात जवानों को अब अधिक गुणवत्तापूर्ण, ताज़ा और पौष्टिक खाद्य सामग्री मिल सकेगी।
- किसानों को लाभ: सीमांत क्षेत्रों के किसानों को उनकी उपज के लिए घर के पास ही एक बड़ा और स्थायी बाजार मिल गया है, जिससे उन्हें बिचौलियों और परिवहन की समस्याओं से राहत मिलेगी।
आर्थिक सशक्तिकरण की ओर कदम
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस पहल को राज्य के किसानों के लिए क्रांतिकारी बताया। उन्होंने कहा:
“यह MoU ‘लोकल फॉर वोकल’ के संकल्प को सिद्ध करता है। इससे चमोली, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़, चंपावत और देहरादून जैसे क्षेत्रों के किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी।”
महत्वपूर्ण आंकड़े:
- अब तक ITBP ₹14.77 करोड़ के स्थानीय उत्पादों की खरीद कर चुकी है।
- अनुमान है कि यदि ITBP अपनी वार्षिक मांग का केवल 25 प्रतिशत हिस्सा भी स्थानीय स्तर से खरीदती है, तो उत्तराखंड के किसानों को सीधे तौर पर ₹6 करोड़ की अतिरिक्त आमदनी होगी।
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किन क्षेत्रों को मिलेगा लाभ?
इस व्यवस्था के अंतर्गत विशेष रूप से दूरस्थ और सीमावर्ती जनपदों पर ध्यान केंद्रित किया गया है:
- चमोली
- उत्तरकाशी
- पिथौरागढ़
- चंपावत
- देहरादून
गरिमापूर्ण उपस्थिति
सचिवालय स्थित मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित इस कार्यक्रम में कृषि मंत्री गणेश जोशी, सचिव कृषि एस.एन. पाण्डेय, ITBP के आईजी मनु महाराज समेत शासन और सेना के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
यह कदम न केवल सीमा सुरक्षा में जुटे जवानों का मनोबल बढ़ाएगा, बल्कि पलायन जैसी समस्याओं को रोकने और पहाड़ों में स्वरोजगार को बढ़ावा देने में भी मील का पत्थर साबित होगा।
