देहरादून: सचिवालय में आज मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिव समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने आगामी वित्तीय वर्ष की तैयारियों, कुम्भ मेला 2027 की रूपरेखा और शासन-प्रशासन में पारदर्शिता लाने के लिए कई कड़े दिशा-निर्देश जारी किए।
आगामी वित्तीय वर्ष और कुम्भ 2027 की प्राथमिकताएं
मुख्य सचिव ने वित्तीय अनुशासन पर जोर देते हुए स्पष्ट किया कि अगले वित्तीय वर्ष में प्रस्तावित नए कार्यों की सभी प्रशासनिक स्वीकृतियां 15 फरवरी तक अनिवार्य रूप से ले ली जाएं। उन्होंने प्रत्येक विभाग को अपना वार्षिक कैलेंडर तैयार करने के निर्देश दिए ताकि साल भर की गतिविधियों का संचालन सुचारू रूप से हो सके।
हरिद्वार में होने वाले कुम्भ मेला – 2027 को राज्य की प्रतिष्ठा से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि इससे संबंधित सभी कार्यों और प्रक्रियाओं को प्राथमिकता के आधार पर समय से पूर्ण किया जाए, ताकि अंतिम समय में किसी भी प्रकार की बाधा न आए।
खाद्य सुरक्षा और निवेश परियोजनाओं की निगरानी
जनस्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए मुख्य सचिव ने राज्य में खाद्य सुरक्षा मानकों के प्रवर्तन और निगरानी को और सख्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा:
- प्रदेश में टेस्टिंग लैब की संख्या बढ़ाई जाए।
- खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामलों के निस्तारण में तेजी लाई जाए।
वहीं, पूंजी निवेश के संबंध में उन्होंने निर्देश दिए कि केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को दी जाने वाली विशेष सहायता के तहत सभी प्रोजेक्ट्स को गतिशक्ति पोर्टल पर अपलोड किया जाए। इन परियोजनाओं की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने को भी कहा गया।
जन-जन की सरकार: तहसील और थाना दिवसों पर जोर
‘जन-जन की सरकार’ कार्यक्रम की सफलता को देखते हुए, मुख्य सचिव ने तहसील और थाना दिवसों को केवल औपचारिक न रखकर, उन्हें पूरे वर्ष नियमित रूप से आयोजित करने के निर्देश दिए। इसके लिए एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की जाएगी। साथ ही, डिजिटल उत्तराखंड की दिशा में कदम बढ़ाते हुए अब हर सचिव समिति की बैठक में ई-ऑफिस की प्रगति की समीक्षा की जाएगी।
यह भी पढ़े: कपकोट के आसमान में बिखरे रोमांच के रंग: राष्ट्रीय पैराग्लाइडिंग प्रतियोगिता का भव्य समापन
विभागों के बीच समन्वय और श्रमिकों का कल्याण
बैठक में दो महत्वपूर्ण प्रशासनिक सुधारों पर चर्चा हुई:
- नक्शा डेटा साझा करना: अब नक्शा पास करने वाली अथॉरिटीज को नक्शा पास करने के बाद उसकी जानकारी स्थानीय निकायों (नगर निगम/नगर पालिका) के साथ साझा करनी होगी, ताकि निकायों का प्रॉपर्टी डेटाबेस अपडेट रहे।
- लेबर कंप्लायंस टूल (Labour Compliance Tool): कुछ विभागों में सफल प्रयोग के बाद अब इस डिजिटल टूल को पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा। इससे श्रमिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान संभव हो सकेगा।
वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति
बैठक में प्रमुख सचिव श्री आर.के. सुधांशु, श्री एल. फैनई, श्री धनंजय चुतर्वेदी सहित सचिव श्री शैलेश बगौली, श्री नितेश कुमार झा, श्री सचिन कुर्वे और अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

