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कुमाऊनी होली 2026 तिथि –
मुख्य तिथि: 27 फरवरी 2026 (रंग एकादशी) से होली छलड़ी 04 और दंपत्ति टीका 05 मार्च तक
इसी दिन चीर बंधन होगा और कुमाऊं में खड़ी होली की शुरुआत मानी जाएगी। यदि कुमाऊनी होली के बारे में वीडियो में देखना चाहते हैं तो वीडियो यह दिया है –
वैसे तो कुमाऊनी बैठकी होली की शुरुआत हर वर्ष पौष माह के प्रथम रविवार से हो जाती है, लेकिन वर्ष 2026 में कुमाऊँ की मुख्य रंग होली का शुभारंभ 27 फरवरी 2026 (रंग एकादशी) से होगा और यह पर्व 04–05 मार्च 2026 (दंपत्ति टीका) तक लगातार मनाया जाएगा। इसी अवधि के दौरान चीर बंधन, खड़ी होली, होलिका दहन और छलड़ी जैसे प्रमुख आयोजन संपन्न होते हैं।
विश्व की सांस्कृतिक विरासत मानी जाने वाली कुमाऊनी होली (Kumaoni Holi) शास्त्रीय संगीत और लोक संगीत के अद्भुत संगम पर आधारित होती है। यह होली ब्रज और खड़ी बोली में गाई जाती है, जिसमें स्थानीय कुमाऊनी शब्दों का भी सुंदर मिश्रण देखने को मिलता है।
यह पारंपरिक उत्सव पौष माह में बैठकी होली से प्रारंभ होकर फाल्गुन माह में रंगों से सजी खड़ी होली और छलड़ी के साथ पूर्ण होता है। कुमाऊनी होली केवल रंगों का पर्व नहीं, बल्कि संगीत, भक्ति, सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत प्रतीक है, जो पीढ़ियों से उत्तराखंड की लोक परंपराओं को जीवित रखे हुए है।
कुमाऊनी होली ( Kumaoni Holi) के प्रकार:
- बैठकी होली
- खड़ी होली
- महिला होली
बैठकी होली –
पौष के पहले रविवार से बैठकी होली शुरू होती है। हारमोनियम, तबला और ढोलक के साथ शास्त्रीय रागों में होली गाई जाती है। बसंत पंचमी के बाद श्रृंगार रस प्रधान गीतों का विशेष महत्व होता है।
खड़ी होली –
फाल्गुन रंग एकादशी (27 फरवरी 2026) से खड़ी होली प्रारंभ होती है। इसी दिन रंग खेला जाता है और चीर बंधन किया जाता है। इसके बाद होलियार मंदिरों से शुरुआत कर घर-घर होली गाते हैं।
महिला होली –
महिलाओं द्वारा गाई जाने वाली यह होली श्रृंगार रस से परिपूर्ण होती है। इसमें नृत्य, ठिठोली और पारंपरिक गीत शामिल होते हैं।
क्या है चीर बंधन (Cheer Bandhan)?
फाल्गुन रंग एकादशी के दिन कुमाऊं में होली की शुरुआत चीर बंधन से होती है। इस परंपरा में एक लकड़ी के दंड पर रंग-बिरंगी करतन (कपड़े) बांधकर ध्वजा बनाई जाती है। विधि-विधान से पूजा के बाद इसे एक नवयुवक की जिम्मेदारी सौंप दी जाती है। इसे होलिका का प्रतीक माना जाता है।
चीर बंधन की पारंपरिक मान्यताएं –
- चीर को होलिका का प्रतीक माना जाता है।
- रंग एकादशी के दिन इसमें प्राण प्रतिष्ठा की जाती है।
- कई स्थानों पर निशान बंधन किया जाता है।
- कहीं इसे पूरे गाँव में घुमाया जाता है और होलिका दहन के दिन जला दिया जाता है।
- चीर के दहन में कुमाऊनी अंतिम संस्कार विधियाँ अपनाई जाती हैं।
- कुछ क्षेत्रों में चीर की करतन प्रसाद स्वरूप बाँटी जाती है।
- मान्यता है कि चीर का कपड़ा घर में रखने से नकारात्मक शक्तियाँ दूर रहती हैं।
चीर हरण की परंपरा –
एक गाँव के लोग दूसरे गाँव की चीर से कपड़े का टुकड़ा चुराने का प्रयास करते हैं। यदि चीर चोरी हो जाए तो उस गाँव में अगले वर्ष होली नहीं मनाई जाती। इसी कारण ग्रामीण दिन-रात पहरा देते हैं। आज यह परंपरा बहुत कम देखने को मिलती है।
चीर बंधन के दौरान गाई जाने वाली होली:
कैले बांधी चीर, हो रघुनन्दन राजा । -2
गणपति बांधनी चीर, हो रघुनन्दन राजा ।
ब्रह्मा, विष्णु बाँधनी चीर, हो रघुनन्दन राजा । कैले बांधी !
शिव शंकर बाँधनी चीर, हो रघुनन्दन राजा । कैले बांधी !
रामचन्द्र बाँधनी चीर, हो रघुनन्दन राजा । कैले बांधी !
लछीमन बाँधनी चीर, हो रघुनन्दन राजा। कैले बांधी !
श्रीकृष्ण बाँधनी चीर, हो रघुनन्दन राजा। कैले बांधी !
बलीभद्र बाँधनी चीर, हो रघुनन्दन राजा। कैले बांधी !
नवदुर्गा बाँधनी चीर, हो रघुनन्दन राजा । कैले बांधी!
भोलानाथ बाँधनी चीर, हो रघुनन्दन राजा । कैले बांधी !
इष्टदेव बाँधनी चीर, हो रघुनन्दन राजा। कैले बांधी!
सबै नारी छिड़कत गुलाल, हो रघुनन्दन राजा । कैले बांधी ।।
होलिका दहन और छलड़ी –
होलिका दहन के अगले दिन छलड़ी मनाई जाती है। इस दिन रंग खेला जाता है और आशीष गीत गाए जाते हैं। सार्वजनिक स्थानों पर हलवा व पारंपरिक मिठाइयाँ बनाकर वितरित की जाती हैं।
उपसंहार –
कुमाऊनी होली (Kumaoni Holi ) केवल पर्व नहीं बल्कि सामाजिक एकता, संगीत और सांस्कृतिक गरिमा का प्रतीक है। यह परंपरा हमें प्रेम, भाईचारे और लोक विरासत से जोड़ती है। इसे सहेजना हम सभी की जिम्मेदारी है।
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कुमाऊनी खड़ी होली गीतों का संकलन PDF में। | kumaoni khadi holi pdf
