उत्तराखंड की पावन नगरी हरिद्वार में एक ऐसा मंदिर है, जिसकी कहानी सुनकर आज भी लोग हैरान रह जाते हैं। यह है काली माता मंदिर, जो हर की पौड़ी से लगभग 300 मीटर दूर भीमगोडा रोड पर एक ऊँचे पहाड़ की गुफा में स्थित है। खास बात यह है कि इस मंदिर के ठीक नीचे से रेलवे लाइन गुजरती है , और मान्यता है कि यहाँ से निकलने वाली हर ट्रेन पहले माँ काली को “सलामी” देती है, फिर आगे बढ़ती है।
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महाभारत काल से जुड़ा माना जाता है यह काली माता मंदिर –
स्थानीय जानकारों और श्रद्धालुओं की मान्यता है कि यह स्थान महाभारत काल से ही आस्था का केंद्र रहा है। पहाड़ की गुफा में विराजमान माँ काली की प्रतिमा को अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है। दूर-दूर से भक्त यहाँ अपनी मनोकामनाएँ लेकर आते हैं — और कहते हैं कि सच्चे मन से माँगी गई हर मुराद यहाँ पूरी होती है।
जब ट्रेनें मंदिर के आगे रुक जाती थीं…
इस मंदिर से जुड़ी सबसे रोमांचक कथा ब्रिटिश दौर की है। बताया जाता है कि लगभग 1860 के आसपास, जब ब्रिटिश सरकार हरिद्वार–देहरादून रेल मार्ग का निर्माण करा रही थी, तब इसी पहाड़ी हिस्से में बार-बार काम अटक जाता था। चट्टान काटने पर भी रास्ता आगे नहीं बढ़ पा रहा था।
कहा जाता है कि एक रात रेलवे विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी को सपने में माँ काली ने दर्शन दिए और बताया कि इसी पहाड़ की गुफा में उनकी प्रतिमा विराजमान है।
निर्देश मिला — पहले प्रतिमा को बाहर निकालकर विधिवत स्थापित करो, तभी निर्माण पूरा होगा। अगले दिन अधिकारियों ने बताए गए स्थान पर खुदाई करवाई। कुछ ही दूरी पर एक छोटी गुफा मिली, जिसमें माँ काली की प्रतिमा प्रकट हुई। इसके बाद विधि-विधान से पूजा कर वहीं छोटा सा मंदिर बनाया गया — और तभी जाकर रेल मार्ग का कार्य सफलतापूर्वक पूरा हो सका।
आज भी निभाई जाती है अनोखी परंपरा-
इसी घटना के बाद एक नियम बन गया , मंदिर के नीचे से गुजरने वाली हर ट्रेन हॉर्न बजाकर माँ काली को प्रणाम करेगी। आज भी ऋषिकेश से हरिद्वार या देहरादून की ओर जाने वाली ट्रेनों में यह परंपरा जीवित है।
एक ओर श्रद्धालु पहाड़ी गुफा में माँ के दर्शन कर रहे होते हैं, तो दूसरी ओर नीचे से ट्रेनें गुजरती दिखाई देती है,आस्था और आधुनिकता का यह संगम हर किसी को भावुक कर देता है।
कैसे पहुँचें मंदिर तक?
मंदिर रेलवे लाइन के ठीक ऊपर स्थित है। एक छोटे से पुल को पार करके भक्त ऊपर मंदिर परिसर तक पहुँचते हैं। यहाँ शांत वातावरण, पहाड़ की ठंडी हवा और माँ काली की दिव्य उपस्थिति — सब मिलकर मन को अद्भुत शांति देते हैं।
क्यों ट्रेंड कर रहा है यह मंदिर?
आज सोशल मीडिया और ट्रैवल ब्लॉग्स पर यह मंदिर तेजी से वायरल हो रहा है —
- पहाड़ की गुफा में विराजमान देवी
- नीचे दौड़ती ट्रेनें
- और डेढ़ सौ साल पुरानी रहस्यमयी कथा
यही वजह है कि श्रद्धालु ही नहीं, ट्रैवल व्लॉगर्स भी इस अनोखे मंदिर को देखने हरिद्वार पहुँच रहे हैं।
आस्था, इतिहास और रहस्य का अद्भुत संगम –
काली माता मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि यह भारत की उन विरासतों में से है जहाँ विश्वास ने तकनीक को रास्ता दिखाया। अगर आप हरिद्वार जाएँ, तो इस रहस्यमयी मंदिर के दर्शन जरूर करें — शायद आपकी मुराद भी पूरी हो जाए।
बोलो… जय माता दी!
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