गई गई असुर तेरी नार मंदोदरी एक बेहद लोकप्रिय पारंपरिक कुमाऊनी होली गीत है, जिसे हर साल होली के मौसम में पूरे उत्तराखंड के कुमाऊँ क्षेत्र में गाया जाता है।
कुमाऊनी होलियाँ अपनी अलग पहचान रखती हैं — यहाँ ब्रज भाषा मिश्रित स्थानीय बोली में भगवान राम, सीता और रावण प्रसंगों पर आधारित होलियाँ गायी जाती हैं। यही कारण है कि कुमाऊनी होली केवल त्योहार नहीं बल्कि एक जीवंत सांस्कृतिक परंपरा है।
आज इस पोस्ट में हम “गई गई असुर तेरी नार मंदोदरी” Kumaoni Holi Lyrics का पूरा संकलन प्रस्तुत कर रहे हैं।
Table of Contents
गई गई असुर तेरी नार मंदोदरी | Gai Gai Asur Teri Naar Holi Lyrics
गई गई असुर तेरी नार मंदोदरी सिया मिलन गई बागा में -2
सोल सिंगार वस्त्र-आभूषण, पहना नौ लाख हार,
मनोदरी सिया मिलन गई बागा में…..
गई गई असुर तेरी नार मंदोदरी सिया मिलन गई बागा में -2
थाली भर भर भोजन लाई, गहवा भर भर नीर ,
मनोदरी सिया मिलन गई बागा में…..
गई गई असुर तेरी नार मंदोदरी सिया मिलन गई बागा में। -2
ले जो सीता भोजन पाओ, मैं लंका की रानी ,
मनोदरी सिया मिलन गई बागा में ….
गई गई असुर तेरी नार मनोदरी सिया मिलन गई बागा में।
ना हम तुमरो भोजन खावैं, तुम हो असुर की नार,
मनोदरी सिया मिलन गई बागा में…..
गई गई असुर तेरी नार मंदोदरी सिया मिलन गई बागा में ,
सुन हो सीता जनक दुलारी लंका कैसे आई,
मंदोदरी सिया मिलन गई बागा में….
गई गई असुर तेरी नार मन्दोदरी सिया मिलन गई बागा में ।
पंचवटी में वास हमारो आई स्वामी के साथ,
मंदोदरी सिया मिलन गई बागा में,
गई गई असुर तेरी नार मन्दोदरी सिया मिलन गई बागा में।
तेरो पति हर के मुझे लायो गढ़ लंका पहुंचाय,
मंदोदरी सिया मिलन गई बागा में …
गई गई असुर तेरी नार मन्दोदरी सिया मिलन गई बागा में,
तेरे पति ने काल बुलायो रावण कुल को नाश,
मनोदरी सिया मिलन गई बागा में …….
गई गई असुर तेरी नार मंदोदरी सिया मिलन गई बागा में।
जलती आग में पानी पड़ो है राम लखन दो भाई,
मनोदरी सिया मिलन गई बागा में…..
गई गई असुर तेरी नार मन्दोदरी सिया मिलन गई बागा में -2
गई गई असुर तेरी नार मंदोदरी…” — भावार्थ (Meaning in Hindi)
यह कुमाऊनी होली गीत रामायण प्रसंग पर आधारित है। इसमें मंदोदरी और सीता के बीच कल्पनात्मक संवाद दिखाया गया है।
गीत की शुरुआत में कहा गया है कि असुर राजा रावण की पत्नी मंदोदरी सोलह श्रृंगार करके, भारी आभूषण पहनकर माता सीता से मिलने बाग (उद्यान) में जाती है।
मंदोदरी थाली भर-भर कर भोजन और कलश में जल लेकर आती है और सीता से आग्रह करती है —
“हे सीता, यह भोजन ग्रहण करो, मैं लंका की रानी हूँ।”
लेकिन सीता विनम्रता से इंकार कर देती हैं और कहती हैं कि —
“मैं असुर की पत्नी का दिया भोजन स्वीकार नहीं कर सकती।”
इसके बाद मंदोदरी पूछती है कि सीता लंका कैसे पहुँचीं। तब सीता उत्तर देती हैं कि उनका निवास तो पंचवटी में था, जहाँ वे अपने स्वामी के साथ रहती थीं, लेकिन रावण उन्हें बलपूर्वक उठा कर लंका ले आया।
गीत आगे बताता है कि रावण का यह कर्म उसके पूरे वंश के विनाश का कारण बनेगा। मंदोदरी को यह भी आभास हो जाता है कि उसके पति ने अपने लिए काल को बुला लिया है।
अंत में गीत में संकेत मिलता है कि जब युद्ध की अग्नि भड़केगी, तब राम और लक्ष्मण मिलकर उस आग को शांत करेंगे — यानी अधर्म पर धर्म की विजय होगी।
गई गई असुर तेरी नार मंदोदरी होली गीत (Gai Gai Asur Teri Naar Holi Lyrics ) वीडियो –
इस कुमाऊनी होली गीत का वीडियो चांदनी इंटरप्राइजेज यूट्यूब चैनल द्वारा रिलीज किया गया है।
इस गीत को कुमाऊँ के 11 सुप्रसिद्ध गायकों ने अपनी आवाज दी है, जबकि संगीत निर्देशन किया है प्रसिद्ध संगीतकार रितेश बिष्ट ने।
यह होली गीत रामायण प्रसंग पर आधारित है, जहाँ मंदोदरी और माता सीता के संवाद को होली शैली में प्रस्तुत किया गया है — यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है।
कुमाऊनी होली की खास पहचान –
कुमाऊनी होली लगभग दो महीने तक चलती है और इसमें बैठकी होली, खड़ी होली और महिला होली जैसी परंपराएँ शामिल होती हैं। ढोलक, हारमोनियम और मंजीरे की संगत में गायी जाने वाली ये होलियाँ पहाड़ की आत्मा को दर्शाती हैं।
कुमाऊनी होली का इतिहास | आखिर कैसे शुरू हुई विश्व प्रसिद्ध कुमाऊनी होली
कुमाऊनी होली पर एक डॉक्यूमेंट्री वीडियोदेखिये
