Wednesday, April 2, 2025
Homeराज्यबौखनाग देवता नामक लोक देवता के प्रकोप का परिणाम है उत्तरकाशी टनल...

बौखनाग देवता नामक लोक देवता के प्रकोप का परिणाम है उत्तरकाशी टनल हादसा ?

Baukhnaag devta story in Hindi

उत्तरकाशी टनल हादसे में अभी भी 40 मजदूरों की जान हलक में अटकी है। तमाम प्रयासों के बावजूद प्रसाशन अभी तक मजदूरों को बाहर निकालने में सफल नहीं हुवा है। इस हादसे का असल कारण क्या था ? वो बाद की तकनीकी जांचों पता चल जायेगा। लेकिन फ़िलहाल स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार यह हादसा क्षेत्र  शक्तिशाली लोक देवता बौखनाग देवता के प्रकोप के कारण हुवा है।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक पुराने मनेजमेंट ने पहले टनल के बहार एक देवता का एक छोटा सा मंदिर बनाया था। सभी अधिकारी और मजदूर वहां पूजा करके और सर झुका कर अंदर जाते थे। बाद में नए मैनेजमेंट वो मंदिर तोड़ दिया। और स्थानीय लोगों का मानना है कि इसी कारण लोकदेवता रुष्ट हो गए ,जिनके क्रोध के कारण आज यह दिन देखना पड़ा। स्थानीय ग्रामीणों का मानना है कि यह देवभूमि है। यहाँ की सारी जमीन और प्राकृतिक सम्पदा देवताओं की है। जिनका उपयोग करने से पूर्व लोकदेवताओं की आज्ञा लेना जरुरी है।

कौन हैं बौखनाग देवता –

यह टिहरी गढ़वाल, उत्तरकाशी , उत्तराखंड गढ़वाल के पक्षिमोत्तर क्षेत्रों रवाईं एवं भण्डारस्यूं पट्टियों के बहुपूजित नाग देवता हैं। इनका मंदिर रवाईं के  ग्राम भाटिया में है। और इनका एक और मंदिर राड़ी में भी है। इनके पुजारी डिमरी जाती के ब्राह्मण होते हैं। जेठ के महीने में बौखनाग देवता का उत्सव होता है। इनके उत्सव में दूर -दूर तक के लोग सम्मिलित होते हैं। अच्छी फसल और परिवार की सुख समृद्धि के लिए इस उत्सव का आयोजन किया जाता है। उत्सव में स्थानीय लोग अपने लोक गीतों पर जमकर झूमते हैं और अपने आराध्य देव से मनोतिया मंगाते हैं।

Hosting sale

यह मेला 12 गांव भाटिया, कफनोल कंसेरू, उपराड़ी, छाड़ा, नंदगांव, चक्कर गांव, चेसना, कुंड, हुडोली आदि गांव के लोकदेवता बौखनाग देवता का मेला है। भाटिया, कफनोल, कंसेरू, नंदगांव में देवता के चार मंदिर हैं। प्रत्येक मंदिर में एक साल के लिए देवता प्रवास करते हैं. 12 गांव में देवता की डोली यात्रा करती है । यात्रा के दौरान हर गांव में देव डोली रात्रि विश्राम करती है । देवता के उत्सव में आराध्य देव से प्रार्थना पूरी होने पर लोग उन्हें छतर चढ़ाते हैं । इसके साथ ही विशाल भंडारे का आयोजन होता है । देवता के मंदिर के पुजारी पर पश्वा अवतरित होते हैं,और वे  मेले में आये हुए ग्रामीणों को अपना आशीर्वाद देते हैं।

Best Taxi Services in haldwani

इनका मूलस्थान रवांई और भण्डारस्यूं पट्टियों के बीच स्थित पर्वत ( डांडा ) को माना जाता है। सम्पूर्ण रवाई क्षेत्र  में इस देवता  की जय जय कार होती है

यहाँ पढ़े _ उत्तराखंड के नागदेवता और कुमाऊं की नागगाथा ।

Follow us on Google News Follow us on WhatsApp Channel
Bikram Singh Bhandari
Bikram Singh Bhandarihttps://devbhoomidarshan.in/
बिक्रम सिंह भंडारी, देवभूमि दर्शन के संस्थापक और प्रमुख लेखक हैं। उत्तराखंड की पावन भूमि से गहराई से जुड़े बिक्रम की लेखनी में इस क्षेत्र की समृद्ध संस्कृति, ऐतिहासिक धरोहर, और प्राकृतिक सौंदर्य की झलक स्पष्ट दिखाई देती है। उनकी रचनाएँ उत्तराखंड के खूबसूरत पर्यटन स्थलों और प्राचीन मंदिरों का सजीव चित्रण करती हैं, जिससे पाठक इस भूमि की आध्यात्मिक और ऐतिहासिक विरासत से परिचित होते हैं। साथ ही, वे उत्तराखंड की अद्भुत लोककथाओं और धार्मिक मान्यताओं को संरक्षित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। बिक्रम का लेखन केवल सांस्कृतिक विरासत तक सीमित नहीं है, बल्कि वे स्वरोजगार और स्थानीय विकास जैसे विषयों को भी प्रमुखता से उठाते हैं। उनके विचार युवाओं को उत्तराखंड की पारंपरिक धरोहर के संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक विकास के नए मार्ग तलाशने के लिए प्रेरित करते हैं। उनकी लेखनी भावनात्मक गहराई और सांस्कृतिक अंतर्दृष्टि से परिपूर्ण है। बिक्रम सिंह भंडारी के शब्द पाठकों को उत्तराखंड की दिव्य सुंदरता और सांस्कृतिक विरासत की अविस्मरणीय यात्रा पर ले जाते हैं, जिससे वे इस देवभूमि से आत्मिक जुड़ाव महसूस करते हैं।
RELATED ARTICLES
spot_img
Amazon

Most Popular

Recent Comments