Author: Bikram Singh Bhandari

बिक्रम सिंह भंडारी उत्तराखंड की लोक संस्कृति, पर्व, देव परंपराओं और इतिहास पर लिखने वाले स्वतंत्र लेखक हैं। वे वर्षों से उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर को प्रामाणिक स्रोतों, लोक कथाओं और ऐतिहासिक संदर्भों के माध्यम से डिजिटल रूप में दस्तावेज़ करने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने उत्तराखंड की संस्कृति, पर्व और लोक परंपराओं पर 700 से अधिक लेख लिखे हैं।

देहरादून का बालाजी धाम : भारत के कई हिस्सों में भगवान हनुमान को संकट मोचन के रूप में पूजा जाता है। विशेष रूप से उत्तर भारत में हनुमान जी को बालाजी के नाम से जाना जाता है। राजस्थान के दौसा जिले की सिकराय तहसील में स्थित मेहंदीपुर बालाजी धाम देश ही नहीं, बल्कि विदेशों तक अपनी मान्यता और चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध है। यहां दर्शन करने के लिए हर वर्ष लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। देहरादून के बालाजी मंदिर के बारे में वीडियो देखें – https://youtu.be/rOtBYdkAe2w?si=RXIlL47G_7dJji03 इसी परंपरा और आस्था को आगे बढ़ाते हुए उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में भी एक…

Read More

उत्तराखंड में बसंत पंचमी ( Basant Panchami in Uttarakhand )  – वर्ष 2026 में समस्त भारतवर्ष में बसंत पंचमी का त्यौहार 23 जनवरी 2026 को मनाया जा रहा है हैं। इस त्यौहार को माँ सरस्वती के जन्मदिन के रूप मनाया जाता है। और माँ सरस्वती की पूजा अर्चना की जाती है। इस दिन से बसंत ऋतू की शुरुवात होती है। बसंत पंचमी के त्यौहार को श्रीपंचमी और माघ पंचमी के नाम से भी मनाया जाता है। इस दिन बिना मुहूर्त के शुभ काम किये जाते हैं। पीले वस्त्र धारण करके माँ सरस्वती की  पूजा अर्चना की जाती है। समस्त भारतवर्ष…

Read More

अगस्त्य मुनि (Agastmuni) : उत्तराखंड के केदारखण्ड का यह पवित्र तीर्थस्थल गढ़वाल मण्डल के रुद्रप्रयाग जनपद में इसकी तहसील इकाई मुख्यालय से 18 कि.मी. आगे मन्दाकिनी के तट पर प्रकृति के मनोरम अंक में स्थित है।उत्तराखंड के प्राचीन धार्मिक भूगोल से गहराई से जुड़ा हुआ है। केदारखण्ड (197:8,10 में कहा गया है– मन्दाकिन्या पूर्वतीरे कुम्भजन्माश्रयः प्रियः। अगस्त्येश्वरो तत्र महादेवस्त्रणासित भवमोचकः॥ इस श्लोक के अनुसार मन्दाकिनी नदी के पूर्वी तट पर स्थित यह स्थल कुम्भजन्मा अगस्त्य मुनि (Agastmuni) का प्रिय आश्रय है, जहाँ अगस्त्येश्वर महादेव भवबंधन से मुक्ति प्रदान करने वाले माने जाते हैं।  तपस्थली का भौगोलिक व आध्यात्मिक स्वरूप -…

Read More

Uttarayani mela : उत्तराखंड की संस्कृति का असली रूप रंग यहाँ के मेलों में समाहित है। उत्तराखंड के मेलों में ही यहाँ की संस्कृति का रूप निखरता है। हिन्दुओं के पवित्र माह माघ में मनाये जाने वाले महापर्व मकर संक्रांति को उत्तराखंड में खिचड़ी संग्रात ,घुघुतिया त्यौहार आदि नाम से मनाया जाता है। इस अवसर पर जहाँ गढ़वाल में माघ मेला उत्तरकाशी और गिंदी मेला का आयोजन होता है , वही कुमाऊं में सुप्रसिद्ध  ऐतिहासिक मेला उत्तरायणी मेला (uttarayani mela) का आयोजन होता है। इसे स्थानीय भाषा में उत्तरायणी कौतिक भी कहते हैं। कुमाऊं की स्थानीय भाषा में  मेले को…

Read More

Ghughutiya Festival 2026 : मानव अधिकार, संस्कृति और प्रकृति का उत्सव – घुघुतिया पर्व केवल एक पारंपरिक लोक-त्योहार नहीं है, बल्कि यह मानव अधिकार (Human Rights),सांस्कृतिक स्वतंत्रता, प्रकृति से सह-अस्तित्व और भावनात्मक समानता का भी प्रतीक है। उत्तराखंड के कुमाऊँ अंचल में मनाया जाने वाला यह पर्व बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और प्रकृति – सभी को समान सम्मान देने की सीख देता है। आज जब दुनिया मानव अधिकारों, सांस्कृतिक पहचान और लोक परंपराओं के संरक्षण की बात कर रही है, तब Ghughutiya Festival 2026 हमें अपनी जड़ों से जुड़ने और लोक-संस्कृति को आगे बढ़ाने का संदेश देता है। आखिर क्यों मनाते…

Read More

उत्तराखंड में हर पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन, प्रकृति और लोकसंस्कृति से गहराई से जुड़ा उत्सव होता है। यहां मनाए जाने वाले पर्व-त्योहार न केवल ऋतु परिवर्तन के संकेतक हैं, बल्कि पीढ़ियों से चले आ रहे संस्कारों और सामाजिक एकता के प्रतीक भी हैं। उत्तराखंड में मकर संक्रांति 2026 भी ऐसा ही एक महत्त्वपूर्ण पर्व है, जिसे राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग नामों और परंपराओं के साथ बड़े उल्लास से मनाया जाता है। मकर संक्रांति का खगोलीय और धार्मिक महत्व – पौष मास के समाप्त होने और माघ मास की संक्रांति के दिन भगवान सूर्य धनु…

Read More

आजकल उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में एक अलग ही चर्चा जोरो पर है। चर्चा यह है कि पहाड़ में लड़को को शादी के लिए लड़किया नहीं मिल रही है। और लड़को की बिना शादी के उम्र जा रही है। इसका कारण है पहाड़ की लड़कियों और उनके माता -पिता की अनोखी शर्तें। प्राप्त जानकारी के अनुसार आजकल पहाड़ के माता पिता उसी लड़के से अपनी बेटी का विवाह करने को राजी हैं जिसकी सरकारी नौकरी हो या फिर हल्द्वानी /देहरादून जैसे मैदानी एरिया में प्लाट या मकान हो। अचानक समाज में फैली इस कुप्रथा के खिलाप कई लेखक ,समाचार पत्र…

Read More

इंद्रमणि बडोनी का जीवन परिचय पर आधारित विस्तृत जानकारी इस वीडियो में भी देख सकते हैं -(Indramani Badoni Biography in Hindi) https://youtu.be/KY5_semJj24?si=tQhfy4X2mA6kCh6j उत्तराखंड सदैव महापुरुषों, वीरों और समाज-सुधारकों की जननी रहा है। इस देवभूमि ने न केवल भारत की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक चेतना को दिशा दी, बल्कि अपनी लोक-संस्कृति, सामाजिक मूल्यों और आत्मसम्मान की रक्षा के लिए भी अनगिनत संघर्ष किए। ऐसे ही संघर्षशील महापुरुषों में इंद्रमणि बडोनी का नाम उत्तराखंड के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में अंकित है। उन्हें प्रेमपूर्वक “उत्तराखंड का गांधी” कहा जाता है। वे उत्तराखंड राज्य आंदोलन के पुरोधा, लोक-संस्कृति के संवाहक और जनआंदोलनों के नैतिक…

Read More

कुमाऊनी होली गीत (Kumaoni Holi Geet lyrics) | कुमाऊनी होली लिरिक्स – देश की प्रसिद्ध होलियों में से एक है कुमाऊनी होली (Kumaoni Holi)। डेढ़ से दो महीने तक चलने वाला यह त्यौहार उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। पौष माह से बैठकी होली (Baithki Holi) और रंग एकादशी से खड़ी होली (Khadi Holi) की रौनक शुरू हो जाती है। कुमाऊनी खड़ी होली (Kumaoni Khadi Holi) ब्रज और कुमाऊनी मिश्रित भाषा में गाई जाती है, जबकि बैठकी होली (Baithki Holi) में उर्दू का प्रभाव भी देखने को मिलता है। हमने पहले ही कुमाऊनी होली…

Read More

लोक संस्कृति दिवस – संस्कृति का अर्थ है सम्यक रूप से किया जाने वाला आचार ,व्यवहार ! सामान्य व्यवहार या बोलचाल में संस्कृति का अर्थ होता है सुन्दर ,रुचिकर और कल्याणकारी परिस्कृत व्यवहार। श्री देव सिंह पोखरिया अपनी प्रसिद्ध पुस्तक लोक संस्कृति के विविध आयाम में संस्कृति की सरल शब्दों में परिभाषा देते हुए लिखते हैं ,” परम्परा से प्राप्त किसी मानव समूह की निरंतर उन्नत मानसिक अवस्था ,उत्कृष्ट वैचारिक प्रक्रिया ,व्याहारिक शिष्टता ,आचरण पवित्रता , सौंदर्याभिरुचि आदि की परिस्कृत , कलात्मक तथा सामुहिक अभिव्यक्ति ही संस्कृति है। संस्कृति पुरे समाज का प्रतिबिम्ब होती है। कोई जन्मजात सुसंस्कृत नहीं होता…

Read More