डिजिटल दौर में जब ज़्यादातर युवा कॉर्पोरेट दुनिया में अपनी जगह बनाने में जुटे हैं, वहीं आशीष नेगी ने एक अलग राह चुनी,जनता की आवाज़ बनने की। आज वे केवल एक राजनीतिक कार्यकर्ता नहीं, बल्कि उत्तराखंड के युवाओं के लिए उम्मीद का प्रतीक बनते जा रहे हैं।
कई लोग तुलना कर रहे हैं कि जैसे 2014 में नरेंद्र मोदी के चेहरे पर भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आई थी, वैसे ही 2027 में आशीष नेगी के युवा नेतृत्व से उत्तराखंड क्रांति दल राज्य की राजनीति में बड़ा उलटफेर कर सकता है। इसमें कितनी सच्चाई है,यह तो समय बताएगा, लेकिन सोशल मीडिया और ज़मीनी स्तर पर यूकेडी के प्रति बना “सॉफ्ट कॉर्नर” साफ दिखाई देता है।
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पहाड़ से उठी आवाज़: शुरुआती जीवन
आशीष नेगी मूल रूप से उत्तराखंड के चमोली ज़िले के कर्णप्रयाग ब्लॉक के कनोट गांव से ताल्लुक रखते हैं। पहाड़ की सीमित सुविधाओं और संघर्षों के बीच पले-बढ़े आशीष ने अपनी पढ़ाई पूरी कर MSc (मास्टर ऑफ साइंस) की डिग्री हासिल की। आगे चलकर उन्होंने अलग-अलग कंपनियों में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम किया और अपना एक स्टार्टअप भी शुरू किया।
यानी करियर के लिहाज़ से वे एक “सेटल्ड प्रोफेशनल” थे—लेकिन दिल पहाड़ में ही अटका था।
राजनीति में आने की वजह: एक घटना जिसने सोच बदल दी –
राजनीति में प्रवेश की कहानी बेहद निजी और भावनात्मक है। एक इंटरव्यू में आशीष बताते हैं कि उत्तराखंड के भीतर ही किसी विवाद के दौरान उनके साथ मारपीट हुई और उन्हें ताना दिया गया,
“तुम पहाड़ी हो, तुम क्या कर लोगे!”
यही शब्द उनके भीतर गहरे उतर गए। उसी क्षण उन्होंने तय कर लिया कि वे केवल अपने लिए नहीं, बल्कि पहाड़ के सम्मान और अधिकारों के लिए लड़ेंगे।
यूकेडी से जुड़ने को लेकर उनका कहना है कि जब मुश्किल समय में उनके साथ प्रदेश का कोई नहीं था, तब उत्तराखंड क्रांति दल ने उनका साथ दिया। तभी उन्हें महसूस हुआ कि राज्यहित की लड़ाई लड़ने की वास्तविक क्षमता इसी दल में है। वे अक्सर कहते हैं—
“कुछ फैसले हम नहीं लेते, प्रकृति तय करती है कि हमें कहाँ जाना है।” उनकी सबसे बड़ी ताकत: शब्द और संवेदना
31 वर्षीय इस युवा नेता की सबसे बड़ी विशेषता है उनकी स्पीच और मुद्दों की स्पष्ट समझ। पहाड़ की समस्याओं को वे जिस सहजता और तीखेपन के साथ रखते हैं, वह श्रोताओं पर सीधा असर करता है।
उनके प्रमुख मुद्दे हैं:
- स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली
- शिक्षा में क्षेत्रीय असमानता
- युवाओं के लिए रोजगार
- मूलनिवासी अधिकार
- राजधानी गैरसैंण
- सशक्त भू-कानून
इन विषयों पर उनका आक्रोश केवल भाषण तक सीमित नहीं रहता, वे गांव-गांव जाकर संवाद करते हैं, युवाओं से मिलते हैं और सोशल मीडिया के ज़रिए लगातार अपनी बात रखते हैं।
उनके व्यक्तित्व में पहाड़ के प्रति जो भाव है, वही उन्हें भीड़ से अलग बनाता है।
युवाओं के बीच बढ़ती लोकप्रियता :
आज आशीष नेगी सोशल मीडिया पर भी तेज़ी से उभर रहे हैं। उनकी सादगी, स्पष्ट विचार और ज़मीनी जुड़ाव युवाओं को आकर्षित कर रहा है। बहुत से युवा उन्हें “अपने जैसा लड़का” मानते हैं, जो सिस्टम से आया है, पहाड़ की पीड़ा समझता है और बदलाव की बात करता है। यही वजह है कि कम समय में वे उत्तराखंड की राजनीति का सबसे चर्चित युवा चेहरा बन चुके हैं।
निष्कर्ष:
क्या आशीष नेगी बदल पाएंगे उत्तराखंड की राजनीति?
आशीष नेगी की कहानी एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर से जनआंदोलन के चेहरे बनने तक की यात्रा है, जिसमें संघर्ष भी है, भावनाएं भी और भविष्य की संभावनाएं भी। वे कोई परंपरागत राजनेता नहीं हैं। वे उस पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं जो सवाल पूछती है, जवाब मांगती है और अपने राज्य के लिए खुद मैदान में उतरने का साहस रखती है।
अब देखना यह है कि यह युवा ऊर्जा आने वाले वर्षों में उत्तराखंड की राजनीति को किस दिशा में ले जाती , लेकिन इतना तय है कि आशीष नेगी अब केवल एक नाम नहीं, बल्कि पहाड़ के युवाओं की उम्मीद बनते जा रहे हैं।
लेख : गांव वाला पेज ( राजू नेगी )
आशीष नेगी के बारे में विस्तार से जाने उनके इस इंटरव्यू में:
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