Thursday, May 30, 2024
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ऐपण राखी – पहाड़ की बहिनों द्वारा बनाई गई स्वदेशी राखियों से मनाइये रक्षाबंधन !

भाई बहिन के प्यार का प्रतीक राखी का त्यौहार, रक्षाबंधन 31 अगस्त 2023 को पूर्णिमा की तिथि में मनाया जाएगा। उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में यह त्यौहार पारम्परिक जनेऊ पनेउ या जनेऊ त्यौहार के रूप में मनाया जाता है। वर्तमान में कुछ उत्तराखंड के युवा इसे कुमाऊँ की लोककला ऐपण के साथ जोड़कर, ऐपण वाली राखी बना कर उत्तराखंड की लोककला को प्रोत्साहित कर रहे हैं।

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उत्तराखंड के कुछ युवाओं ने, उत्तराखंड की पौराणिक पारम्परिक लोककला ऐपण को राखियों में उतार कर , ऐपण कला के संवर्धन में एक नई शुरुआत की है। साथ ही ऐपण वाली राखी से , उत्तराखंड में रक्षाबंधन त्यौहार में एक नई ताजगी सी आ रही है। ऐपण वाली राखियों ने उत्तराखंड स्वरोजगार को एक नया विकल्प दिया है। तथा उत्तराखंड के बाजार में  चीन की राखियों की टक्कर के लिए, एक विकल्प के रूप में ऐपण वाली राखी अपना महत्वपूर्ण किरदार अदा कर सकती है।

ऐपण वाली राखी की शुरुआत सबसे पहले मीनाक्षी खाती ने की , ये वर्तमान में रामनगर में रहती हैं, तथा मीनाक्षी खाती को उत्तराखंड की ऐपण गर्ल के नाम से भी जाना जाता है। मीनाक्षी खाती ऐपण कला में विस्तार से कार्य कर रही है। वो न केवल राखी में ऐपण कला उकेर रही बल्कि पूजा के थाल, शुभवर्तन ,चौकी, नेमप्लेट और पूजा के कपड़ो पर ऐपण कला उकेर कर उत्तराखंड की लोककला के प्रचार प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। मीनाक्षी खाती ने ऐपण कार्य को विस्तार से करने के लिए मिनाकृति ऐपण प्रोजेक्ट ( Minakriti – The aipan project ) नाम से एक कार्यशाला बनाई है। इसी नाम फेसबुक पेज भी है, जिसके माध्यम से मीनाक्षी खाती व उनकी टीम  जनता से जुड़ते हैं ,ऐपण का प्रचार प्रसार के साथ, अपने सामान को बेचते हैं।

मीनाक्षी खाती के अलावा  मनोरमा मुक्ति भी उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों के साथ साथ ऐपण राखी बना रही हैं। इनके साथ कई महिला समूह और अन्य ग्रामीण महिलाएं जुड़ी हैं  जो इनके माध्यम से अपना ऐपण प्रोडक्ट बेच कर रोजी रोटी कमा रही हैं।

ऐपण राखी
मनोरमा मुक्ति की राखी
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इनके अलावा और कई युवक और युवतियों ने ऐपण विधा से राखी बना कर,अन्य पवित्र वस्तुओं पर ऐपण कला उकेर कर , अपनी पारम्परिक लोककला को एक मजबूत स्वरोजगार के विकल्प के तौर पर प्रस्तुत कर रहे हैं।

ऐपण क्या है?

देवभूमी उत्तराखंड के कुमाऊँ क्षेत्र की पारम्परिक एवं पौराणिक लोककला है ऐपण कला ।किसी शुभकार्य व त्यौहार के अवसर पर भूमि और दीवार पर लाल मिट्टी ( गेरू ) द्वारा रंगाई करके, चावल के विस्वार से और हल्दी ,जो,मिट्टी, गाय के गोबर तथा रोली ,अष्टगंध से रेखांकित की गई, शुभ आकृति को ऐपण कहते हैं। उत्तराखंड कुमाऊँ क्षेत्र में कई प्रकार के ऐपण बनाये जाते हैं। जो निम्न है –

ज्योतिपट्ट , शिव पीठ, लक्ष्मी पीठ, आसन, नाता, लक्ष्मी नारायण, चिड़िया चौकी, चामुंडा हस्त चौकी, सरस्वती चौकी, जनेउ चौकी, शिवचरण पीठ, सूर्यदर्शन चौकी स्योव ऐपण ,आचार्य चौकी, विवाह चौकी, धूलिअर्घ चौकी आदि हैं।

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ऐपण वाली राखी कहाँ से खरीदें ?

अपनी पारम्परिक लोककला के प्रचार और प्रसार के लिए, उत्तराखंड में विदेशी राखियों का एक मजबूत विकल्प और अपने नए स्वरोजगार करने वाले युवाओं का साथ देने के लिए हमे 2023 के रक्षाबंधन में ऐपण वाली राखी का प्रयोग करना चाहिए। अब ये समस्या आ रही कि ये ऐपण वाली राखी कहाँ से खरीदे ? तो आप चिंता मत कीजिए ,उत्तराखंड के ये युवा उद्यमी ऑनलाइन ऐपण वाली राखी बेच रहे हैं । बस आपको आर्डर देना है और ऐपण वाली राखी एक हफ्ते में आपके दिए गए पते पर पहुच जाएगी। यदि आप अपने रिश्तेदार को राखी भिजवाना चाहते हैं, तो सीधे उनका पता दे दीजिए रखी वही पहुँच जाएगी । Aipan wali Rakhi खरीदने के लिए आप निम्न विकल्पों का इस्तेमाल कर सकते हैं –

ऐपण राखी
मीनाक्षी खाती टीम द्वारा बनाई राखी

मीनाक्षी खाती जी की ऐपण वाली राखी – मिनाकृति ऐपण प्रोजेक्ट

मिनाकृति ऐपण प्रोजेक्ट ऐपण गर्ल मीनाक्षी खाती जी की एक कार्यशाला है। जिसके माध्यम से ये अपने ऐपण कला से बनी वस्तुओं का प्रचार एवं विक्रय करती हैं। इस नाम से इनका फेसबुक पेज भी है, जिससे आप ऐपण राखी तथा ऐपण से बने अन्य उत्पाद खरीद सकते हैं। Aipan Rakhi खरीदने के लिए आप इनसे  फेसबुक मैसेंजर  द्वारा संपर्क कर सकते हैं। हमने भी इनसे फ़ेसबुक मैसेंजर से संपर्क करके कुछ राखियां मंगवाई, हमारी खरीदारी इनके साथ काफी अच्छी और संतोषजनक रही हैं।

मिनाकृति ऐपण प्रोजेक्ट टीम से संपर्क करने के लिए यहां क्लिक करें।

मनोरमा मुक्ति ऐपण वाली राखी और अन्य सांस्कृतिक सामान

सोमेश्वर की  बेटी मनोरमा उत्तराखंड की लोककला ऐपण पर आधारित उत्पाद बना कर ,अपने व्हाट्सप कैटलॉग पर बेचती हैं। उन्होंने रक्षाबंधन 2023 के लिए बहुत प्यारी प्यारी ऐपण वाली राखी बना रहीं हैं। हाल ही में प्राप्त जानकारी के अनुसार मनोरमा मुक्ति और उनसे जुड़ी महिलाएं  सनातन धर्म के प्रतीकों और तुलसी की लकड़ी पर ऐपण कला बना कर ” सनातनी राखी “ नाम से राखियां बना रही हैं। इनके साथ कई महिला समूह और व्यक्तिगत महिलाएं जुड़ कर स्वरोजगार प्राप्त कर रहीं हैं। राखी के अलावा आपको मनोरमा जी के कैटलॉग से आप अन्य पहाड़ी सामान , जैसे -पहाड़ी टोपी ,पिछोड़ा ,लिंगुड़े का अचार आदि खरीद सकते हैं।

मनोरमा मुक्ति जी के कैटलॉग से ऐपण राखी मंगाने के लिए क्लिक करें

ऐपण राखी
मनोरमा मुक्ति द्वारा बनाई राखी

नोट –  उपरोक्त लेख उत्तराखंड की लोककला ऐपण का प्रचार प्रसार तथा उत्तराखंड में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लक्ष्य से लिखा गया है। इस लेख में दिए गए तथ्य जानकारियां इंटरनेट व सोशल मीडिया से सभार ली गई है। यदि इस लेख के कंटेंट से किसी मित्र को आपत्ति हो तो वो हमें हमारे फेसबुक पेज देवभूमी दर्शन पर अवगत करा सकते हैं।

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Bikram Singh Bhandari
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बिक्रम सिंह भंडारी देवभूमि दर्शन के संस्थापक और लेखक हैं। बिक्रम सिंह भंडारी उत्तराखंड के निवासी है । इनको उत्तराखंड की कला संस्कृति, भाषा,पर्यटन स्थल ,मंदिरों और लोककथाओं एवं स्वरोजगार के बारे में लिखना पसंद है।
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