Meri nath gad de (Kumauni Holi ) – कुमाऊनी होली भारत की सबसे प्रसिद्ध होलियों में से एक होली है। कहते हैं मथुरा ,वृन्दावन की होली के बाद उत्तराखंड की कुमाऊनी होली सबसे प्रसिद्ध और सबसे अनोखी होली है। कुमाऊनी होली कुमाऊँ (उत्तराखंड) की एक जीवंत सांस्कृतिक विरासत है, जिसमें रंगों से अधिक राग, ताल और सामूहिक भावनाओं का उत्सव दिखाई देता है।
फाल्गुन शुक्ल एकादशी से दंपती टीका तक चलने वाली इस परंपरा में खड़ी होली और बैठकी होली दोनों रूप प्रचलित हैं, खासकर काली कुमाऊँ के चम्पावत क्षेत्र की होली ऐतिहासिक मानी जाती है, जहाँ चंद शासकों के संरक्षण और मथुरा-काशी से आए विद्वानों के प्रभाव से ब्रज बोली व शास्त्रीय संगीत का सुंदर समन्वय विकसित हुआ; दिन में ढोल-झांझ के साथ गोल घेरे में गाई जाने वाली खड़ी होली और रात को हारमोनियम-तबला पर आधारित बैठकी होली में देवी-देवताओं की स्तुति, राधा-कृष्ण लीलाएँ और पौराणिक कथाएँ सैकड़ों गीतों के माध्यम से जीवंत हो उठती हैं।
यही कारण है कि कुमाऊनी होली केवल त्योहार नहीं, बल्कि पीढ़ियों से सहेजी जा रही लोक-आस्था और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बन चुकी है।
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मेरी नथ गड़ी दे कुमाऊनी होली | meri nath gad de lyrics in hindi –
वैसे तो कुमाऊनी होली गीतों की फेरहिस्त काफी बड़ी है , कुमाऊनी होली गीतों का कलेक्शन काफी समृद्ध है ,लेकिन पिछले साल से एक पारंपरिक कुमाऊनी होली गीत काफी पसंद किया जा है , जिसका शीर्षक है ,मेरी नथ गढ़ी दे (meri nath gad de ), वैसे तो यह एक शृंगार रस प्रधान कुमाऊनी होली गीत है। इसे पिछले साल 2025 में चांदनी इंटरप्राइजेज नामक यूट्यूब चैनल से रिलीज किया गया है। इसमें लगभग उत्तराखंड के अधिकतम कलाकारों ने अपनी आवाज़ दी है। 2026 की कुमाऊनी होली में भी मेरी नथ गड़ी दे कुमाऊनी होली को काफी पसंद किया जायेगा।
मेरी नथ गड़ी दे लिरिक्स –
मेरी नथ गढ़ी दे होली एक शृंगार प्रधान होली है। जिसमे पहाड़ की स्त्री ,सुनार से अपने लिए नथ बनाने की अनुरोध करती है ,और सुनार इसके बदले कुछ नजराना मांगता है। शृंगार रस से पिरोये इन्ही शब्दों से बनी है ये सुन्दर नोक झोक वाली कुमाऊनी होली। अब देखिये इसके बोल और उसके बाद यहाँ मेरी नथ गड़ी दे कुमाऊनी होली का ओरिजनल वीडियो भी लगाया गया है ,जिसे आप आराम से देख कर मेरी नथ गढ़ी दे (meri nath gad de ) होली का आनंद ले सकते हैं।
स्त्री:
मेरी नथ गड़ी दे छैला सुनारा,
मेरी नथ गड़ी दे छैला रे…
पुरुष:
तेरी नथ गड़ी द्यूलो मतवाली नारा,
तेरी नथ गड़ी द्यूलो छैला वे…
स्त्री:
नथुली गड़ाई को क्या ल्येलो यारा?
मेरी नथ गड़ी दे छैला रे…
पुरुष:
नथुली गड़ाई को क्या देली यारा?
तेरी नथ गड़ी द्यूलो छैला वे…
स्त्री:
रूपैयाँ–पैसा त्वे द्यूलो यारा,
मेरी नथ गड़ी दे छैला रे…
पुरुष:
नथुली गड़ाई को नज़र मिलाली,
तेरी नथ गड़ी द्यूलो छैला वे…
स्त्री:
मैं नी मिलाऊँ नज़र सुनारा,
मेरी नथ गड़ी दे छैला रे…
पुरुष:
नथुली गड़ाई हाथ मिलाली,
तेरी नथ गड़ी घूलो छैला वे…
स्त्री:
हाथ मिला ल्यूलो छैला सुनारा,
मेरी नथ गड़ी दे छैला रे…
पुरुष (दोहराव):
तेरी नथ गड़ी द्यूलो छैला सुनारा,
तेरी नथ गड़ी द्यूलो छैला वे…
मेरी नथ गड़ी दे कुमाऊनी होली का अर्थ (सरल हिन्दी) –
स्त्री कहती है:
हे सुनार युवक, मेरी नथ जड़वा दो।
पुरुष जवाब देता है:
हे मतवाली लड़की, मैं तेरी नथ ज़रूर जड़वा दूँगा।
स्त्री पूछती है –
नथ जड़वाने के बदले क्या लोगे?
पुरुष हँसते हुए कहता है –
तुम क्या दोगी?
स्त्री कहती है –
पैसे दे दूँगी।
पुरुष कहता है –
नहीं, बस ज़रा नज़र मिला लो।
स्त्री शर्माकर बोलती है –
मैं नज़र नहीं मिलाऊँगी।
पुरुष फिर कहता है –
चलो, हाथ मिलाकर बात पक्की कर लो।
स्त्री मान जाती है –
ठीक है, हाथ मिला लिया।
और अंत में पुरुष दोहराता है –
मैं तेरी नथ ज़रूर जड़वा दूँगा।
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