देहरादून: उत्तराखंड सरकार अब राज्य की आर्थिकी को मजबूत करने के लिए ‘कार्बन क्रेडिट’ (Carbon Credit) की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन ने गुरुवार को सचिवालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में स्पष्ट किया कि कार्बन क्रेडिट प्रदेश के लिए आय का एक महत्त्वपूर्ण स्रोत बन सकता है।
विभागों को संभावनाएं तलाशने के निर्देश
बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी विभाग अपने-अपने कार्यक्षेत्र में कार्बन क्रेडिट अर्जित करने की संभावनाएं तलाशें और इसके लिए आवश्यक तैयारियां शुरू करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि शुरुआत में उन प्रोजेक्ट्स पर फोकस किया जाए, जिनमें आसानी से सफलता प्राप्त की जा सकती है।
परिवहन और वन विभाग निभाएंगे अहम भूमिका
मुख्य सचिव ने राज्य में कार्बन क्रेडिट अर्जित करने के लिए तीन प्रमुख क्षेत्रों को रेखांकित किया:
- परिवहन विभाग: राज्य में जल्द ही 1,000 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू किया जा रहा है। इन बसों के संचालन से कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी, जिससे परिवहन विभाग कार्बन क्रेडिट का लाभ उठा सकता है।
- वन विभाग: उत्तराखंड की वन संपदा को देखते हुए वन पंचायतों के माध्यम से कार्बन क्रेडिट अर्जित करने की अपार संभावनाएं हैं।
- सहकारिता विभाग: पैक्स (PACS) के माध्यम से भी कार्बन क्रेडिट अर्जित कर उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में बेचकर अतिरिक्त आय प्राप्त की जा सकती है।
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पर्यावरण विभाग होगा नोडल एजेंसी
इस पूरी कवायद के लिए प्रदेश का पर्यावरण विभाग नोडल विभाग के रूप में कार्य करेगा। मुख्य सचिव ने पर्यावरण विभाग को जल्द से जल्द किसी विशेषज्ञ एजेंसी को ‘नॉलेज पार्टनर’ (Knowledge Partner) के रूप में शामिल करने के निर्देश दिए हैं, ताकि तकनीकी सहायता मिल सके।
श्री बर्द्धन ने सभी विभागों को आपसी तालमेल (Coordination) के साथ काम करने की बात कही। बैठक में प्रमुख सचिव श्री आर.के. सुधांशु, एपीसीसीएफ (APCCF) श्री एस.पी. सुबुद्धि, नाबार्ड के उच्चाधिकारी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
