Wednesday, July 24, 2024
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मेरी दुर्गा हरे गे गीत के बोल

दोस्तों आज आपके लिए अपने इस ब्लॉग में लाएं है। एक सदाबहार कुमाउनी गीत मेरी दुर्गा हरे गे के बोल और वीडियो। यह गीत गाया है, उत्तराखंड के प्रसिद्ध गायक स्वर्गीय श्री पाल बाबू गोस्वामी जी ने। मेले पहले जमाने मे पहाड़ो में मेल मिलाप और खुशियां मनाने के प्रमुख साधन होते थे। पहले शिक्षा व संचार साधनों के अभाव में कई लोग मेलों में खो भी जाते थे। इसलिए लोगों के मन मे एक भय यह भी रहता था,कि मेलों में जाकर हम कही खो न जाये। स्वर्गीय श्री गोपाल बाबू जी ने जनता के इसी भय पर एक चुटीला सा गीत बना दिया। इसके लिए उन्होंने अल्मोड़ा के प्रसिद्ध मेले स्याल्दे बिखोति मेले का सहारा लिया। स्याल्दे बिखोति का मेला, द्वाराहाट कस्बे में लगता है। स्याल्दे मेला एक सांस्कृतिक और ऐतिहासिक मेला है, जो कत्यूर राजाओं ने शुरू करवाया था। इस गीत की पृष्ठभूमि इस प्रकार है, कि पति पत्नी हँसते मुस्कराते, स्याल्दे बिखोति के मेले को जाते हैं। लेकिन मेले में जाते ही पत्नी खो जाती है। इसी स्थिति पर एक प्यारा सा चुटीला गीत, स्वर्गीय श्री गोपाल बाबू गोस्वामी जी ने बनाया है।

मेरी दुर्गा हरे गे
स्याल्दे बिखोति का मेला

मेरी दुर्गा हरे गे सांग लिरिक्स

अल्खते बिखौती मेरी दुर्गा हरै गे।
अले म्यार दगाड़ छि यो म्याव में अले जानी काँ शटिग गे ।येल म्यार गाव गाव गाड़ी ह्यालो मी काँ ढूँढ इक इतु खुबशुरत छो यो क्वे शटके ली जालो। कोये गेवाड़िया या द्वारहाटिया तो म्यार ख्वार फोड़ हो जाल दाज्यू देखों धै तुमिल कैं देखि?
अल्खते बिखौती मेरी दुर्गा हरै गे।
हाय सार कौतिका चाने मेरी कमरा पटे गे।।
अल्खते बिखौती मेरी दुर्गा हरै गे।
हाय सार कौतिक चाने मेरी कमरा पटे गे।।
ये दुर्गा चान चान मेरी कमरा पटे गे।
ये अल्खते बिखोती मेरी दुर्गा हरै गे।।
ओ…. दाज्यू तुमले देखि छो यारो बते दियो भागी
तुमले देखि छो यारो बते दियो भागी
रंगीली पिछौड़ी विकी बुटली घागरी
आंगेड़ी मखमली दाज्यू मेरी दुर्गा हरै गे।
ये सार कौतिक चान मेरी कमरा पटे गे।
हाय सार कौतिक चान मेरी कमरा पटे गे
ये अल्बेर बिखौती मेरी दुर्गा हरै गे।
द्वारहाट कौतिक मेरी दुर्गा हरै गे।
स्याल्दे का कौतिक मेरी दुर्गा हरे गे
दुर्गा चाने चाने मेरी कमरा पटे गे
दुर्गा चाने चाने मेरी कमरा पटे गे
ऐ….. दुर्गा मी के खाली में टोकलि
गुलाबी मुखड़ी वीकी काई आँखी
गुलाबी मुखड़ी वीकी काई काई आँखी।।
गालड़ी उगाई जैसी ग्युं की जै फुलकी
गालड़ी उगाई जैसी ग्यु की जै फुलकी।।
सुकिला चमकाना दांता मेरी दुर्गा हरै गे
हाय सार कौतिक चाने मेरी कमरा पटे गे
हाय सार कौतिका चाने मेरी कमरा पटे गे
अल्बेर बिखौती मेरी दुर्गा हरै गे
हाय अल्बेर बिखौती मेरी दुर्गा हरै गे
दुर्गा चाने चाने मेरी कमरा पटे गे
दुर्गा चाने चाने मेरी कमरा पटे गे
अल्बेर बिखौती मेरी दुर्गा हरै गे
अल्बेर बिखौती मेरी दुर्गा हरै गे
ऐ…. दाज्यू तलि बाजारा मलि बाजार द्वाराहाट में
तलि बाजारा मलि बाजारा सार कौतिक ढूंढ़ई
हाई दुर्गा तू काँ मर गई पाई गे छे आँखी
तू काँ मर गे छे पाई गे छे आँखी
मेरी दुर्गा हरै गे, हाय सार कौतिक चाने मेरी कमरा पटे गे
मेरी दुर्गा हरै गे, हाय सार कौतिक चाने मेरी कमरा पटे गे
ये अल्बेर बिखौती मेरी दुर्गा हरै गे।
ये दुर्गा चान चान मेरी कमरा पटे गे
ये दुर्गा चान चान मेरी कमरा पटे गे।
अब मैं कसिक घर जानू दुर्गा बिना
अब मैं कसिक घर जानू दुर्गा बिना
कौतिकयारा सब घर नैह गये धार नैह गो दिना
कौतिकयारा सब घर नैह गये धार नैह गो दिना।।
म्येर आँखी भरीण लेगे दाज्यू, किले हसणों छ ?, मेरी दुर्गा हरै गे
सार कौतिक चाने मेरी कमरा पटे गे ।
ओ हिरदा सार कौतिक चाने मेरी कमरा पटे गे।
सार कौतिका चाने मेरी कमरा पटे गे…
अल्बेर बिखौती मेरी दुर्गा हरै गे
अल्बेर बिखौती मेरी दुर्गा हरै गे
हिरदा दुर्गा हरै गे, हिरदा दुर्गा हरै गे, बतै दे दुर्गा हरै गे
हिरदा दुर्गा हरै गे, हिरदा दुर्गा हरै गे…

गीत का वीडियो :-

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स्याल्दे बिखोति के बारे में विस्तार से जानने के लिए यहां क्लिक करें।
स्वर्गीय श्री गोपाल बाबू गोस्वामी जी का जीवन परिचय के लिए यहां क्लिक करें।

Note – चित्र प्रतिकात्मक प्रयोग के लिए सोशल मीडिया से साभार लिए गए हैं।

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Bikram Singh Bhandari
Bikram Singh Bhandarihttps://devbhoomidarshan.in/
बिक्रम सिंह भंडारी देवभूमि दर्शन के संस्थापक और लेखक हैं। बिक्रम सिंह भंडारी उत्तराखंड के निवासी है । इनको उत्तराखंड की कला संस्कृति, भाषा,पर्यटन स्थल ,मंदिरों और लोककथाओं एवं स्वरोजगार के बारे में लिखना पसंद है।
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