Wednesday, November 22, 2023
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G20 Summit 2022 में मेहमानों के लिए खास आकर्षण होंगे उत्तराखंड के ये उत्पाद !

G20 Summit 2022 को आयोजित करने की जिम्मेदारी इस बार भारत की है। यह समूह  19 देशों और यूरोपीय संघ का एक अनौपचारिक समूह है। इसकी स्थापना वर्ष 1999 में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष तथा विश्व बैंक के प्रतिनिधियों के साथ हुई थी। G20 के सदस्य देशों में अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राज़ील, कनाडा, चीन, यूरोपियन यूनियन, फ्राँस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, मेक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, कोरिया गणराज्य, तुर्की, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं। G20 का कोई  अपना स्थायी मुख्यालय नहीं है। प्रत्येक वर्ष समूह की मेज़बानी करने वाले या अध्यक्षता करने वाले देशों के बीच इसका मुख्यालय परिवर्तित होता रहता है।

G20 Summit 2022 इस बार भारत में भी आयोजित होगा। इस सम्मलेन में  उत्तराखंड के कुछ पारंपरिक उत्पाद, अलग -अलग देशो से आये प्रतिनिधियों का मान बढ़ाने के साथ -साथ उनके लिए आकर्षण का केंद्र भी होंगे। प्राप्त जानकारी के अनुसार भारतीय विदेश मंत्रालय ने , G20 Summit 2022 में प्रदर्शित करने के लिए भारत के विभिन्न राज्यों से उनके खास स्थानीय उत्पादों की जानकारी मांगी थी। राज्यों के उत्पादों के चयन के लिए, भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी और प्रमुख सचिव pk मिश्रा जी की अध्यक्षता में ,एक समिति का गठन किया गया है। जो सभी राज्यों द्वारा दिए गए उत्पादों में से खास उत्पाद चयन करेगी।

G20 Summit 2022 के लिए उत्तराखंड की तरफ से , केदारनाथ व बदरीनाथ मंदिर, लक्ष्मण झूला ऋषिकेश,  देहरादून का घंटाघर का  प्रतीकात्मक कला।  और इसके अलावा नैनीताल के  ऐपण, जैविक उत्पाद में उत्तरकाशी के  लाल चावल और शहद, अल्मोड़ा की बाल मिठाई, चंपावत का शहद, बागेश्वर की तांबे की गागर और  नेटल फाइबर (सिसूण ) से बनी जैकेट, ब्रह्म कमल वाली  पहाड़ी टोपी, पिथौरागढ़ के ऊनी शॉल, मफलर, ऊधमसिंह नगर जिले  के मूंझ घास से बने उत्पाद आदि को दिखाया गया।

बताया जा रहा कि इस प्रदर्शनी में उत्तराखंड के उत्पादों को काफी सराहा गया। कमिटी ने उत्पादों की गुणवत्ता और विशेषता को परखा।  जल्द ही G20 Summit 2022 के लिए मंत्रालय इन उत्पादों में से कुछ विशेष उत्पादों को चयनित करेगा।

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उम्मीद है इस सम्मेलन में उत्तराखंड के पारंपरिक उत्पाद एक अलग छाप छोड़ेंगे और उत्तराखंड की संस्कृति को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने में कामयाब होंगे।

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