Home संस्कृति खान-पान कुमाऊनी रायता , सीखिए अनोखे पहाड़ी रायता बनाने की विधि।

कुमाऊनी रायता , सीखिए अनोखे पहाड़ी रायता बनाने की विधि।

पहाड़ी ककड़ी का रायता बनाने की विधि

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कुमाऊनी रायता,फोटो साभार प्रिंटसेट , उत्तराखंड टूरिज्म. काम

कुमाऊनी रायता जी हा नाम से ही अपनी पहचान बता रहा है। भारतीय भोजन शैली में रायते का विशेष स्थान है। शादी,नामकरण,पूजा या तेरहवीं मे सार्वजनिक भोज को अलग अलंकरण देता है।सामान्यतः रायता बूंदी,और मट्ठे, नमक मिर्च मिला कर बनाया जाता है। थोड़ा अलग तरीके से बनाया जाता है।

इसमें शुद्ध देसी राई की सनसनाहट होती है । छाछ के माखन कि खटास,और पहाड़ी पकी हुई ककड़ी का स्वाद। अच्छे अच्छे लोगों के मुंह से पानी निकाल देता है ये पहाड़ी खीरे का रायता। कुमाऊनी लोगो को रायता बहुत पसंद होता है। कुमाऊं मण्डल के मेलो में,तथा बाजारों में खीरे का रायता बहुत आसानी से मिल जाता है।

नैनीताल भवाली का कुमाऊनी रायता पकोड़ा बहुत प्रसिद्ध है। कुमाऊं मण्डल में लोग रायते को अलग अलग चीजो के साथ मिलाकर अलग कॉम्बिनेशन बना दिए हैं, जो बहुत ही यूनिक और टेस्टी लगता है।

जैसे –

  • रायता पकोड़ा
  • आलू रायता
  • छोले रायता
  • दाल चावल रायता
  • राजमा चावल रायता

कुमाऊनी रायता  बनाने की विधि –

पहाड़ी रायता मुख्यत दो प्रकार से बनाया जाता है-

  • पहाड़ी खीरे का रायता
  • मूली का रायता

पहाड़ी खीरा केवल सितम्बर और अक्टूबर मे होती है। कुमाऊं में रायता साल भर खाया जाता है। जाड़ों मे रायता बनाने के लिए कुमाऊं के कुछ क्षेत्रों में मूली का प्रयोग भी किया जाता है। मूली के प्रयोग से रायते की संसानहट और बड़ जाती।

कुमाऊनी रायता , सीखिए अनोखे पहाड़ी रायता बनाने की विधि।

पहाड़ी रायता ( कुमाऊनी रायता ) बनाने के लिए सामग्री –

  • कद्दूकस की हुई पहाड़ी ककड़ी या मूली
  • छाछ का माखन या दही
  • शुद्ध देशी आर्गेनक राई
  • कटी हुई हरी मिर्च
  • नमक स्वदानुसार , पहाड़ी पिसा नमक हो तो ज्यादा अच्छा।
  • हरा धनिया सजाने के लिए।
  • जंबू गन्दर्यनी तड़के के लिए, यदि आप तड़का लगाना चाहते हैं तो।

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कुमाउनी खीरा रायता बनाने के लिए सर्व्रथम छाछ का माखन बना  लेंगे । छाछ का माखन बनाने के लिए  छाछ को एक पतले कपड़े मे बांध कर टांग देते है। उसके नीचे बाल्टी रख देते है। बाल्टी में पानी जमा हो जाता है। और माखन कपड़े मे रह जाता है।

अगर छाछ का माखन उपलब्ध नहीं है तो, दही से भी बना सकते हैं। उसके बाद पहाड़ी खीरा /पहाड़ी मूली को कद्दूकस करके रख लेते हैं। ककड़ी को निचोड़कर उसका पानी निकाल लेते हैं। उसके बाद देसी राई को तवे में हल्का गर्म करके पीस लेंगे। राई  अपने स्वादानुसार डाले। ज्यादा राई स्वाद खराब कर सकती है।

बाकी की विधि नीचे दिए स्टेप बाई स्टेप मे सीखिए –

  • एक गहरा बर्तन लेंगे
  • उसमें कदुकस की हुई ककड़ी/मूली लेंगे, जो निचोड़कर रखी थी।
  • उसमे छाछ का माखन या दही डालेंगे
  • फिर मिर्च,पिसी हुई राई और नमक मिलाएंगे
  • राई,नामक,मिर्च तीनों ध्यान से स्वादनुसर डाले।
  • इन सामग्री के मिश्रण को अच्छी तरह 5मिनट तक मिलाए।
  • अगर आपको तड़के का स्वाद लेना है तो, थोड़ा तेल गरम करके जंबू गंद्रेनी का तड़का लगा दे।

लो जी तैयार हो गया कुमाऊनी रायता। हरे धनिए से सजाकर अपने मनपसंद पकवान के साथ आंनद लीजिए।

नोट – पहाड़ों में बुजुर्ग लोग बताते हैं। अगर कुमाऊनी रायते का असली स्वाद लेना है तो, इसको बना के 2 घंटे के लिए ढक कर रख दें। इसके बाद इसकी सनसनाहट सिर चड़ती है। मतलब बनाने के बाद कुमाऊनी रायता जितना पुराना होता जाएगा,राई उसपे उतना ज्यादा असर छोड़ देती है। और रायता उतना ही स्वादिष्ट और यूनीक बन जाता है।

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बिक्रम सिंह भंडारी, देवभूमि दर्शन के संस्थापक और प्रमुख लेखक हैं। उत्तराखंड की पावन भूमि से गहराई से जुड़े बिक्रम की लेखनी में इस क्षेत्र की समृद्ध संस्कृति, ऐतिहासिक धरोहर, और प्राकृतिक सौंदर्य की झलक स्पष्ट दिखाई देती है। उनकी रचनाएँ उत्तराखंड के खूबसूरत पर्यटन स्थलों और प्राचीन मंदिरों का सजीव चित्रण करती हैं, जिससे पाठक इस भूमि की आध्यात्मिक और ऐतिहासिक विरासत से परिचित होते हैं। साथ ही, वे उत्तराखंड की अद्भुत लोककथाओं और धार्मिक मान्यताओं को संरक्षित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। बिक्रम का लेखन केवल सांस्कृतिक विरासत तक सीमित नहीं है, बल्कि वे स्वरोजगार और स्थानीय विकास जैसे विषयों को भी प्रमुखता से उठाते हैं। उनके विचार युवाओं को उत्तराखंड की पारंपरिक धरोहर के संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक विकास के नए मार्ग तलाशने के लिए प्रेरित करते हैं। उनकी लेखनी भावनात्मक गहराई और सांस्कृतिक अंतर्दृष्टि से परिपूर्ण है। बिक्रम सिंह भंडारी के शब्द पाठकों को उत्तराखंड की दिव्य सुंदरता और सांस्कृतिक विरासत की अविस्मरणीय यात्रा पर ले जाते हैं, जिससे वे इस देवभूमि से आत्मिक जुड़ाव महसूस करते हैं।

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