जैसा कि हम सबको पता है , कोर्णाक का सूर्य मंदिर भारत का सबसे प्राचीन सूर्य मंदिर है। तो क्या आपको पता है ? कोर्णाक के बाद भारत का दूसरा प्राचीन सूर्य मंदिर कौन सा है ?

उत्तराखंड राज्य के अल्मोड़ा में स्थित कटारमल सूर्य मंदिर को भारत के सबसे प्राचीन सूर्य मंदिरों में से एक माना जाता है। कई विद्वान तो इसे कोर्णाक सूर्य मंदिर से भी 200 साल पुराना मानते हैं। 

कटारमल सूर्य मंदिर अल्मोड़ा से लगभग 16 किमी दूर कटारमल अधोली सुनार गाँव मे स्थित है। कटारमल का सूर्य मंदिर समुद्र तल से 2116 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। 

कटारमल का सूर्य मंदिर अपनी विशेष वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है। कटारमल के सूर्यमंदिर का लोकप्रिय नाम बारादित्य है। इस  मंदिर का निर्माण कत्यूरी वंश के राजा कटारमल देव ने कराया था।

यहाँ छोटे छोटे 45 मंदिरों का समूह है। इतिहासकारों के अनुसार मुख्य मंदिर का निर्माण अलग अलग समय माना जाता है। वास्तुकला और शिलालेखों के आधार पर इस मंदिर का निर्माण 13 वी शताब्दी में माना जाता है।

अल्मोड़ा सूर्य मंदिर की दीवार पर तीन लाइन लिखा एक शिलालेख भी है। जिसके अनुसार प्रसिद्ध लेखक राहुल सांकृत्यायन 10वी या 11 वी शताब्दी का माना है। 

यहाँ के सूर्य भगवान की मूर्ति बड़ की लकड़ी से बने होने के कारण इसे  बड़आदित्य मंदिर कहा जाता है। इस मंदिर में भगवान सूर्य देव की मूर्ति पद्मासन में स्थित है।

कहानी

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यहाँ पहाड़ो पर ऋषि मुनि अपनी जप तप करते थे। एक बार द्रोणागिरी , कक्षयपर्वत और कंजार पर्वत पर ऋषि मुनि अपना जप तप कर रहे थे। तभी उनको वहाँ एक असुर परेशान करने लगा।

ऋषियों ने वहाँ से भाग कर , कौशिकी नदी ( कोसी नदी ) के तट पर शरण ली। वहाँ उन्होंने भगवान सूर्य देव की आराधना की । तब भगवान सूर्य देव ने प्रसन्न होकर अपने  तेज को एक वटशिला मे स्थापित कर दिया ।

tवटशिला के तेज के सामने असुर परास्त हो गया ,और ऋषियों ने निर्बिघ्न अपनी पूजा आराधना,जप तप किया। बाद में कत्यूरी वंशज राजा कटारमल देव ने इसी वटशिला पर भगवान सूर्यदेव के भव्य मंदिर का निर्माण कराया।